मंदिर के बाद दूतावासों में भी विराजेंगे श्रीराम!

Share

अयोध्या शोध संस्थान की तरफ से तैयार करवाई जा रही ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया की प्रतियां वहां रखी जाएंगी
इन्हें उन दूतावासों में रखा जाएगा, जहां श्रीराम या रामायण के अंश मिलते हैं
अयोध्या (एजेंसी)। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रीराम के विराजने के बाद इन्हें उन दूतावासों में विराजा जाएगा, जहां श्रीराम या रामायाण के अंश मिलते हैं। अयोध्या शोध संस्थान की तरफ से तैयार करवाई जा रही ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया की प्रतियां वहां रखी जाएंगी। संस्थान के निदेशक डॉ़ वाईपी सिंह कहते हैं कि हम विदेश मंत्रालय से अनुरोध करेंगे कि वे दूतावासों में श्रीराम और रामायण से जुड़े उन प्रतीकों को रखें, जो उन देशों से संबंधित हों।
सिंह कहते हैं कि ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया में हम हर उस देश को ढूंढ रहे हैं, जहां रामायण के या रामायणकालीन अवशेष और परंपराएं मिलती हों। रामलीलाओं के माध्यम से श्रीराम वहां पहुंचते हों। देश के तमाम हिस्सों में श्रीराम से जुड़े प्रतीकों का संग्रह तो किया ही जा रहा है। अब श्रीराम से पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरोने की तैयारी हो रही है। पाकिस्तान से लेकर इटली, रूस, मॉरीशस और सूरीनाम तक रामायण और श्रीराम की भक्ति परंपराओं के अवशेष मिलते हैं।
डॉ.सिंह कहते हैं कि ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने सभी राजदूतों और हाई कमिशनरों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने यहां श्रीराम से जुड़े शोध करवाएं। वह कहते हैं कि ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया तैयार होने पर इसकी प्रतियां सभी राजदूतावासों में रखी जाएंगी। इसके अलावा श्रीराम व रामायण से जुड़े सभी प्रतीकों को भी दूतावासों में रखा जाएगा।
विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रति झुकाव होगा
डॉ. सिंह कहते हैं कि श्रीराम और रामायण के साथ संबंध की नए सिरे से व्याख्या होने का फायदा भारतीय संस्कृति के प्रति झुकाव को मिलेगा। वह कहते हैं इराक में 4000 साल पुराने भित्तिचित्र मिलते हैं। रूस में रामलीलाओं की विशेष परंपरा है। इटली में पांचवीं शताब्दी ईसापूर्व के समय के चित्र मिलते हैं।
यह चित्र रामायण से मिलते जुलते हैं। ब्रिटिश अधिकारी फ्रेंडरिक सालमन ग्राउस ने श्रीरामचरितमानस का अंग्रेजी में अनुवाद किया। कैलीफर्निया, कंबोडिया, लाओस में भी श्रीराम की कथाओं के अंश दिखते हैं। लाओस के राजमहल में तो रामलीलाओं का मंचन भी होता है। ऐसी चीजें जब विदेशों में प्रसारित होंगी तो इससे भारतीय संस्कृति के प्रति उनमें झुकाव होगा।


Share