Wednesday , 20 November 2019
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भीम ने गुस्से में मारी लात तो बन गया भीमताल

chittorgarh_fortपूरी दुनिया को अपनी तरफ आकर्षित करने वाला राजस्थान खुद में ना जाने कितने रोचक तथ्य छुपाए हुए है। जिसका एक जीता जागता उदाहरण वहां का चिाौडग़ढ़ किला है। यह किला विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल है। इस किले के बनने के पीछे की कहानी भी कम मजेदार नहीं है। जब पांडव के दूसरे भाई भीम संपाि की खोज में निकले थे तो रास्ते में उनकी मुलाकात एक योगी से हुई। उस योगी के पास पारस पत्थर था। भीम ने वह पारस पत्थर योगी से मांग लिया। जिसके बदले में योगी ने एक किले की मांग की। जो वरदान योगी ने भीम से मांगा वह कोई और नहीं बल्कि चिाौडग़ढ़ का किला था। भीम ने अपने बल और भाइयों की सहायता से किले का निर्माण शुरू किया। काम को लगभग समाप्त होता देख योगी के मन में कपट उत्पन्न हो गया। उसने जल्दी सवेरा करने के लिए यति से मुर्गे की आवाज में बांग देने को कहा। जिससे भीम सवेरा समझकर निर्माण कार्य बंद कर दे और उसे पारस पत्थर नहीं देना पड़े। मुर्गे की बांग सुनते ही भीम को क्रोध आया और उसने क्रोध से अपनी एक लात जमीन पर दे मारी। जहां भीम ने लात मारी वहां एक बड़ा सा जलाशय बन गया। आज इसे भीमलात के नाम से जाना जाता है। चिाौडग़ढ़ का किला सबसे बड़ा माना जाता है। यह 700 एकड़ में फैला हुआ है। यह धरती से 180 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ की शिखा पर बना हुआ है। यह किला 3 मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा है। किले के चारों तरफ पहाड़ी का एक घेरा है। जो करीब 8 मील का है। इस किले में प्रवेश करने के लिए लगातार सात दरवाजे कुछ अन्तराल पर बनाए गए थे। ताकि कोई भी शत्रु किले के अंदर प्रवेश ना कर पाएं।यह 700 एकड़ में फैला हुआ है। यह धरती से 180 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ की शिखा पर बना हुआ है। यह किला 3 मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा है

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