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‘भारत बंद’ से पहले झुकी सरकार

एससी-एसटी कानून को कड़ा करेगी

नई दिल्ली। सरकार ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से कमजोर हुए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार (निवारण) कानून को पुराने स्वरूप में लाने के लिए इसमें जरूरी बदलाव करने का निर्णय लिया है और इससे संबंधित विधेयक को बुधवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी।
केन्द्रीय मंत्री एवं लोक जन शक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि विधेयक 2-3 दिन में संसद में पेश कर दिया जायेगा।
पासवान के अनुसार बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कानून के प्रावधानों को और कड़ा किया जायेगा। शुरूआत में कानून में 22 प्रावधान थे बाद में इसमें 25 और प्रावधान जोड़े गये थे और अगर जरूरत पड़ी तो प्रावधानों को और कड़ा किया जायेगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून के तहत उचित जांच के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद दलित हितों की रक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को देश भर में दलित संगठनों ने काफी बड़ा आंदोलन भी किया था। आंदोलन इतना उग्र था कि सरकार को इस मामले में अध्यादेश लाने का मन भी बनाना पड़ा।
दलित संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह 9 अगस्त को फिर आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर जाएंगे। पिछले हफ्ते सरकार की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने भी दलितों की मांग मानने के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गोयल को एनजीटी के चेयरमैन पद से हटाने की मांग भी कर रहे हैं। जस्टिस जज उन दो जजों में से एक हैं, जिन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीडऩ रोकथाम अधिनियम के संबंध में आदेश दिया था।
एलजेपी ने भी अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों के तहत एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर भाजपा को अल्टिमेटम दे दिया है। एलजेपी ने कहा है कि भाजपा को समर्थन मुद्दों पर आधारित है। पार्टी ने दलितों के उत्पीडऩ के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान करने तथा 9 अगस्त तक एनजीटी के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की है। जनता दल (यूनाईटेड) ने दलित ऐक्ट के कड़े प्रावधानों को अध्यादेश के जरिए बहाल करने की एलजीपी की मांग का समर्थन किया है।
आयोजक 131 सांसदों और 1000 से ज्यादा विधायकों को पत्र लिखकर कहेंगे कि वह आरक्षित सीटों का ही प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनका अपने समुदाय के प्रति दायित्व भी है। 9 अगस्त को बुलाए गए बंद के लिए 20 मांगें सामने रखी गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी ऐक्ट में किए गए बदलावों को निरस्त करने के लिए ऑर्डिनेंस लाया जाए।

One comment

  1. true decision
    Indian independent cantry

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