Friday , 16 November 2018
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भारत को ईरान से तेल आयात की छूट देगा अमेरिका

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत के साथ-साथ सात अन्य देशों को ईरान से तेल आयात की छूट देने का फैसला कर लिया है। छूट प्राप्त करने वाले देशों में जापान और दक्षिण कोरिया शामिल भी होंगे। ट्रंप प्रशासन के एक सीनियर ऑफिसर ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर इसकी जानकारी ब्लूमबर्ग को दी। ईरान से तेल आयात पर नए सिरे से लग रही अमेरिकी पाबंदी 5 नवंबर से प्रभावी हो जाएगी।
अमेरिका न्यूक्लियर डील पर ईरान से नए सिरे से बातचीत करना चाहता है, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। बातचीत की मेज पर लाने का दबाव बनाने के लिए ही अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था हिलाने की जुगत कर रहा है। इसलिए, उसने दुनिया को 4 नवंबर के बाद से ईरान से तेल नहीं खरीदने की अपील की है। हालांकि, वह कुछ देशों से इस शर्त पर नरमी बरत रहा है कि वे धीरे-धीरे ईरानी तेल खरीद की मात्रा घटाते रहेंगे। भारत जैसे देशों की यह भी दलील है कि अगर ईरान का एकबारगी बहिष्कार कर दिया गया तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे तेल आयातकों की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा।
ईरानी तेल का सबसे बड़ा आयातक चीन छूट पाने की शर्तों पर अब भी अमेरिका से बातचीत कर रहा है। इस मामले से वाकिफ दो सूत्रों ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह खुलासा किया। इस तरह, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन के अलावा छूट प्राप्त करने वाले चार देश कौन से हैं, इसका खुलासा नहीं हो पाया है।
ट्रंप प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि वह ईरान पर लगाई गई पाबंदी को असरदायी साबित करे, ताकि ईरान को सबक सिखाने का उसका प्रयास बेकार न चला जाए। यही वजह है कि वह कुछ देशों के साथ नरमी से पेश आने पर मजबूर है, ताकि ऑइल मार्केट में पर्याप्त आपूर्ति होती रहे और तेल के दाम में बेतहाशा वृद्धि नहीं हो।
जब ऑइल मार्केट को पता चला कि कुछ देशों को तो अमेरिका से छूट मिलनी ही है, तो पिछले महीने ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव 15 प्रतिशत गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। साथ ही, तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के अन्य सदस्य देशों की ओर से तेल आपूर्ति बढ़ाने के आश्वासन ने भी ब्रेंट क्रूड के भाव को स्थिर किया।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि ईरान से कितनी मात्रा में तेल आयात की छूट दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने इतना जरूर कहा कि जिन देशों को भी ईरान से तेल आयात की छूट मिलेगी, वह अस्थाई ही होगी। उनसे अमेरिका की उम्मीद कायम रहेगी कि ईरान से तेल खरीदना धीरे-धीरे कम कर दें।

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