Sunday , 20 October 2019
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बोल्ट का ‘मिशन ओलंपिक’ संपन्न

bolt_mission_olympicरियो डि जेनेरो। ओलंपिक के करिश्माई खिलाड़ी बन चुके यूसेन बोल्ट ने 21 वर्ष की उम्र में शुरू किये अपने सफर पर नौ वर्ष बाद नौ स्वर्णाें के साथ रियो में विराम लगा दिया, लेकिन इस दौरान इस महान एथलीट की विश्व रिकार्ड और स्वर्ण पदकों की चमक से जो इतिहास लिखा गया है उसे दशकों तक याद किया जाएगा।
धरती के सबसे तेज धावक, चैंपियन, रफ्तार के बादशाह न जाने ऐसे कितने ही विशेषण बोल्ट के लिये इन नौ वर्षाें में गढे गये हैं और अब उनकी उपलब्धियों को बयां करने के लिये शब्द ही कम पढ़ जाते हैं। एक बेहद खुशनुमा व्यक्ति, बेहद सफल एथलीट बोल्ट ने इतने लंबे अर्से में न तो अपने खेल को प्रभावित होने दिया और न ही दुनियाभर में फैले अपने प्रशंसकों को निराश किया।
बीङ्क्षजग ओलंपिक 2008 के बाद लंदन ओलंपिक 2012 में 100 मीटर, 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर रिले दौड़ में लगातार स्वर्णाें की हैट्रिक लगाने वाले बोल्ट ने अपने आखिरी रियो ओलंपिक में भी तीनों ही स्पर्धाओं में स्वर्ण जीते और अपने सपने’स्प्रिंट स्वीपÓको सच कर इन खेलों से विदाई ले ली। कोई भी एथलीट इस तरह खेलों से विदा लेने की केवल कल्पना ही कर सकता है, लेकिन बोल्ट ने सफलता की अलग ही कहानी लिखते हुये नौ वर्षों के ओलंपिक करियर में नौ स्वर्णों के साथ विदा लेकर इसे हकीकत बना दिया।

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