Tuesday , 18 September 2018
Top Headlines:
Home » Business » बैंक जमकर बांट रहे क्रेडिट कार्ड, धुंआधार हो रही शॉपिंग

बैंक जमकर बांट रहे क्रेडिट कार्ड, धुंआधार हो रही शॉपिंग

credit_cardमुंबई। क्रेडिट कार्ड पर बकाया रकम का आंकड़ा 2008 के दौर के लेवल को भी पार कर गया है, 2008 में डिफॉल्ट्स अपने उच्चत्तम स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, बैंकर इससे बेफिक्र दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार स्थिति अलग है क्योंकि बैंक रिस्क से बच रहे हैं। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, मई के अंत में क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग 42,100 करोड़ रूपए पर थे।
दूसरी ओर, 2008 के संकट के वक्त यह आंकड़ा 27,000 करोड़ रुपये था। न केवल क्रेडिट कार्ड के आंकड़े, बल्कि इनके जरिए खर्च भी बढ़ रहा है, जो मजबूत ग्रोथ का संकेत है। इसके अलावा क्रेडिट इंफर्मेशन ब्यूरो ने बैंकों को कस्टमर क्रेडिट बिहेवियर से रूबरू कराने में लंबा वक्त तय किया है।
इससे बैंकों को कॉन्सन्ट्रेशन रिस्क से बचने में मदद मिलती है, साथ ही एक ही कस्टमर को अलग-अलग बैंकों से कई कार्ड्स मिलने की जानकारी भी मिलती है। एक्सिस बैंक के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर राजीव आनंद ने कहा, क्रेडिट कार्ड ब्यूरो होने से कस्टमर क्रेडिट बिहेवियर में सुधार आया है। अब ज्यादा नई पीढ़ी के लोग ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्रेडिट ग्रोथ का रेट भी मजबूत है। क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग में बढ़ोतरी अलर्ट का नहीं, बल्कि ग्रोथ का संकेत है। जुलाई 2008 में 2.67 करोड़ के पीक को छूने के बाद अगस्त 2010 में सिस्टम में मौजूद क्रेडिट कार्ड्स की संख्या गिरकर 1.75 करोड़ पर आ गई, लेकिन अब यह आंकड़ा दोबारा 2008 के लेवल पर पहुंच रहा है। मार्च 2015 में जहां सिस्टम में मौजूद क्रेडिट कार्ड्स की संख्या 2.11 करोड़ थी, वहीं मई 2016 में यह बढ़कर 2.50 करोड़ हो गया। एचडीएफसी बैंक के कंट्री हेड पराग राव ने कहा, भारत में कार्ड्स सेगमेंट में ग्रोथ से कस्टमर्स की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और परचेजिंग पावर का पता चलता है। आज कस्टमर्स के साथ मजबूत रिलेशनशिप के सपोर्ट के साथ बिग डेटा और एनालिटिक्स से हमें अपनी ऑफरिंग्स को कार्ड्स सेगमेंट्स तक में कस्टमाइज करने की ताकत मिल रही है।
क्रेडिट ब्यूरो सिबिल के एमडी सतीश पिल्लई ने कहा कि गुजरे वक्त से उलट बैंक एक ही शख्स को कई कार्ड्स देने से बच रहे हैं, ऐसे में इस कॉन्सन्ट्रेशन रिस्क से बचने में उन्हें मदद मिल रही है। सिबिल की रिसर्च से पता चलता है कि नए क्रेडिट कार्ड अकाउंट्स बढ़े हैं। 2015 में क्रेडिट कार्ड्स की ग्रोथ 34 फीसदी थी, जो 2011 में 16 फीसदी थी। स्टडी में कहा गया है कि नए क्रेडिट कार्ड अकाउंट्स में ग्रोथ के साथ आउटस्टैंडिंग अमाउंट्स का भी बढऩा तय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.