Sunday , 19 May 2019
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बालाकोट का सच आया सामने

कैंप में थे 263 आतंकी 4 मिसाइलों ने किया सफाया
नई दिल्ली (एजेंसी)। बालाकोट में मारे गए आतंकियों की संख्या पर विपक्ष सवाल उठा रहा है लेकिन टाइम्स नाउ को विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि वायुसेना के हमले से कुछ दिनों पहले यहां प्रशिक्षण के लिए 263 आतंकवादी जुटे थे। आईएएफ ने जैश के इन ठिकानों पर हमले के लिए पांच दिनों तक निगरानी की थी और चार मिसाइलों से इन आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया।
रिपोर्ट के मुताबिक जैश के इस प्रशिक्षण केंद्र पर 18 सीनियर कमांडर भी मौजूद थे। दौरा-ए खास (उन्नत प्रशिक्षण) के लिए 91 आतंकी, दौरा -ए-आम (सामान्य प्रशिक्षण) के लिए 83, दौरा ए मुतालह के लिए 30 तथा 25 आतंकियों को फिदायीन की ट्रेनिंग दी जा रही थी। इसके अलावा कैंप में काम करने वाले नाई और कुकिंग सहित 18 लोग स्टाफ के लोग शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने चार मिसाइलों के जरिए इन आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था और इसमें वो सफल भी रही थी।
वायु सेना ने बालाकोट में जैश की जिन इमारतों को निशाना बनाया, वहां 8 से 9 इमारतें थीं। वायु सेना ने यहां खाली इमारतों को छोड़ते हुए चार इमारतों को निशाना बनाया। यहां एकत्र आतंकवादी और उसके प्रशिक्षक अलग-अलग इमारतों में ठहरे थे और वायु सेना को इस बात की पुख्ता जानकारी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक बालाकोट में आतंकवादी और उनके ट्रेनर मौजूद थे। उनके नाम थे मुफ्ती उमर, मौलाना जावेद, मौलाना असलम, मौलाना अजमल, मौलाना जुबेर, मौलाना अब्दुल गफूर कश्मीरी, मौलाना कुदरूतुल्ला, मौलाना कासिम और मौलाना जुनैद। इनमें से चार अंतिम नामों को पहले से लापता और मृत बताया जाता है। इस जानकारी से साफ है कि जैश के इस प्रशिक्षण केंद्र पर बड़ी संख्या में आतंकियों को तैयार किया जा रहा था।
बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा के अवंतीपोरा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमला किया गया जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। आम लोग हों या खास भारत सरकार से निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रहे थे। भारतीय वायु सेना के 12 मिराज-2000 विमान पीओके और बालाकोट में 26 फरवरी को तड़के दाखिल हुए और वहां स्थित जैश के आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले कर इन्हें ध्वस्त कर दिया।

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