बाबरी विध्वंस का फैसला – 2300 पन्नों का फैसला

बाबरी विध्वंस का फैसला - 2300 पन्नों का फैसला
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1993 में हुआ था कोर्ट का गठन – बता दें कि बाबरी मस्जिद के गिरने के 7 दिन बाद ही केस सीबीआई को सौंप दिया गया था। इस मामले की अलग-अलग जिलों में सुनवाई हुई, जिसके बाद इलाहबाद हाईकोर्ट ने 1993 में सुनवाई के लिए लखनऊ में विशेष अदालत का गठन किया था। तब सीबीआई ने अपनी संयुक्त चार्जशीट फइल की। इस चार्जशीट में ही बाल ठाकरे, नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह, चम्पत राय जैसे 49 नाम जोड़े गए। इनमें से 17 लोगों की मौत हो गई है, जिसके चलते 32 आरोपी ही बचे थे।


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