Wednesday , 26 February 2020
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फर्जी दस्तावेजों से 3 करोड़ के ऋण उठाए

frauders_arrestedउदयपुर/भीण्डर। जिले की भीण्डर थाना पुलिस ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर उदयपुर और चित्तौड़ में बैंकों की सात शाखाओं से लोगों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन दिलाकर करीब 3 करोड़ रूपए का गबन करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इस मामले में दो बैंक कर्मचारियों के साथ-साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा उदयपुर और चित्तौड़ में दिलाए गए लोन में से 50 ऐसी फाईलें है जो संदेह के दायरे में है। मामले में एक ओर मुख्य आरोपी फरार चल रहा है। जिसकी तलाश की जा रही है। दलालों के पास में उपखण्ड अधिकारी से लेकर अधिवक्ताओं और बैंक मैनेजरों तक की फर्जी सीलें और अन्य दस्तावेज बरामद हुए है। इन दोनों दलालों के खिलाफ करीब 16 मुकदमें इसी तरह से चल रहे है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार भीण्डर में स्थित आईसीआईसीआई बैंक के नए आए मैनेजर प्रेमचंद सोनी ने पुलिस को सूचना दी कि दो लोगों द्वारा कुछ दिनों पूर्व बैंक से 6 और 11 लाख रूपए का लोन ले चुके है और पिछले कुछ दिनों से लगातार कुछ अन्य लोगों के साथ बैंक में आ रहे है और इन लोगों के नाम से लोन का आवेदन कर रहे है। बैंक प्रबंधक ने इस बारे में जांच की तो सामने आया कि 6 और 11 लाख रूपए का लोन लेने वाले दोनों युवकों के दस्तावेज फर्जी है। जिस पर पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चन्द्रशील ठाकुर और डिप्टी वल्लभनगर घनश्याम शर्मा के निर्देशन में और थानाधिकारी हिमांशुसिंह के नेतृत्व में एएसआई लालशंकर, हैड कांस्टेबल उम्मेदाराम, कांस्टेबल रामप्रताप, राजूराम, हिंगलाजदान रघुवीर प्रसाद की एक टीम का गठन किया और मामले की जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपी काललाल पुत्र मांगीलाल सुथार निवासी आकोला कलां निकुंभ और नारायणलाल पुत्र मथुरा मेघवाल निवासी करेडिय़ा भदेसर ने 11 और 6 लाख रूपए का लोन प्राप्त करने के लिए जो दस्तावेज लगाए थे वह दस्तावेज फर्जी थे। इस पर पुलिस ने दबिश देकर आरोपी कालूलाल को गिरफ्तार किया तो आरोपी ने सारी बात स्वीकार कर ली। आरोपी कालूलाल ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक में केसीसी लोन हैड और डिप्टी मैनेजर औंकारलाल पुत्र कुनाराम जाट निवासी मण्डावसरा कुचामनसिटी नागौर और बैंक कर्मचारी अम्बालाल पुत्र भगवानलाल जाट निवासी कियाखेड़ा भीण्डर की सहायता से फर्जी दस्तावेज से लोन प्राप्त किया है। मामले में आरोपी नारायणलाल मेघवाल फरार चल रहा है। जांच में सामने आया कि आरोपी कालूलाल निकुंभ थाने का हिस्ट्रीशीटर है और इसके खिलाफ 10 इसी तरह के मामले चल रहे है। वहीं नारायणलाल के खिलाफ इसी तरह से 6 मामले चल रहे है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। मामले में बैंक से जुड़ा फतहनगर निवासी एक अधिवक्ता शैलेष पालीवाल भी संदेह के घेरे में है, जिसे 13 वर्ष तक की जांच करनी होती थी।
3 करोड़ से अधिक लोन घोटाला
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अब तक करीब 3 करोड़ रूपए से अधिक का लोन घोटाला किया है। जिसमें किसी ब्रांच से 50 लाख रूपए है तो किसी ब्रांच से 80 लाख रूपए तक है। बैंक के अधिकारी भी मिलीभगत के चलते लोन पास कर देते थे और गबन की राशी बढ़ती ही गई।प्रथम दृष्टया सामने आया कि आरोपियों द्वारा दिलवाए गए लोन में से करीब 50 लोन संदिग्ध है। जिसमें जिन लोगों के नाम पर जो जमीन दिखाई गई है वो उनके नाम पर है ही नहीं। जिसमें ज्यादातर चित्तौड़ की है। जिसमें एसबीआई बैंक मंगलवाड़, चिकारड़ा, बैंक ऑफ बड़ौदा बानसेन, कन्नौज और आवरी माता स्थित एक अन्य बैंक की ब्रांच से भी लोगों को लोन दिलाया था। इसमें भी करेडिय़ा से 14, आकोल खुर्द 2, आकोलागढ़ से 1, अरनेड़ से 1, ब्यावर से 2, आसावरा से 4, चरलिया से 1, झाड़ेली से 4, निकुंभ से 1, भीमलोद से 1, सोडावास से 3, पीपली गुजरान से 1, अमरपुरा भदेसर से 1 व्यक्ति को फर्जी लोन दिलाया है।योजनाओं के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से दिलाते थे लोन
थानाधिकारी हिमांशुसिंह ने बताया कि आरोपी गांवों में जाकर ऐसे लोगों को ढूंढते थे जिन्हें पैसों की आवश्कता होती थी। विभिन्न गांवों में ऐसे लोगों का चयन करने के बाद इन लोगों के दस्तावेजों को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर देते। जिसमें बैंक में गिरवी रखने के लिए जमीन का खसरा नम्बर किसी ओर का लिख देते थे। इन सभी की पुष्टि के लिए जो भी दस्तावेज चाहिए उपखण्ड स्तर से लेकर उदयपुर स्तर तक का उसकी सील आरोपियों के पास होती थी और हाथों-हाथ दस्तावेज बनाकर हस्ताक्षर करवा देते थे। इन दस्तावेजों पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से लोन पास करवाकर लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर करवा देते और बाद में अपना हिस्सा और बैंक अधिकारी का हिस्सा निकाल देते। जब बैंक किश्त नहीं आने पर दस्तावेजों की जांच करता तो सामने आता कि आरोपियों ने जो भी दस्तावेज दिए है वह फर्जी है। इस पर रिकवरी भी नहीं हो पाती कारण आरोपियों के पास रिकवरी के लिए जब्त करने लायक कुछ होता ही नही।घर वालों के नाम भी फर्जी लोन
थानाधिकारी हिमांशुसिंह ने बताया कि आरोपियों ने अपने घरवालों को भी नहीं छोड़ा। आरोपियों ने अपनी पत्नी, माता-पिता और भाईयों के नाम से भी फर्जी लोन उठा रखा है और एक भी रूपया नहीं चुकाया है।
और भी बैंक अधिकारी आएंगे लपेटे में
जांच अधिकारी हिमांशुसिंह ने बताया कि इस प्रकरण में ओर भी आरोपी पकड़ में आएंगे। पुलिस के अनुसार जिन सात बैंकों में लोन ठगी का मामला हुआ है। उसमें वहां के स्थानीय अधिकारी भी शामिल थे। इसी कारण उनकी गिरफ्तारी भी होगी और सख्त कार्यवाही की जाएगी।

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