Friday , 19 April 2019
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प्लॉट दिलवाकर बिकवाया और सारे पैसे हड़प गया

ऐसे करते हैं सीधे इंसान से ठगी ब्याज माफियाओं से परेशान पिता पुत्री आत्महत्या मामले में एक गिरफ्तार
समाज एकजुट नहीं होता तो नहीं होती कार्रवाई, बच जाता आरोपी
नगर संवाददाता & उदयपुर
शहर की अंबामाता थाना पुलिस ने गत दिनों ब्याज माफियाओं से परेशान होकर पिता पुत्री द्वारा आत्महत्या करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पहले मृतक को एक प्लॉट दिलवाया और कुछ दिनों बाद बिकवा दिया। ये पैसे भी वह हड़प गया और जिसको प्लॉट बिकवाया था उससे फिर से किसी ओर को बिकवा दिया और वो पैसे भी हड़प गया और सारी जिम्मेदारी मृतक पर डाल दी। यदि समाज का संगठन ज्ञापन नहीं देता तो नहीं होती कार्यवाही।
जानकारी के अनुसार 10 मार्च को अंबामाता स्कीम निवासी ललित प्रकाश पालीवाल (63) और इनकी बेटी कृतिका (20) ने अपने घर में एक ही साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस दौरान ललित प्रकाश की एक बेटी और पत्नी मंदिर गई थी। घटना के बाद मृतक की पत्नी ने कुछ भूमाफियाओं और ब्याज माफियाओं पर परेशान करने का आरोप लगाया था, परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई थी। इसके बाद समाज के संगठन ने पुलिस अधीक्षक कैला्रश चन्द्र विश्रोई को ज्ञापन दिया और दबाव बनाकर मुकदमा दर्ज करवाया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रकरण की जांच की। थानाधिकारी आईपीएस प्रशिक्षु शैलेन्द्रसिंह ने प्रकरण की जांच करते हुए इस प्रकरण में तेजपाल पुत्र खीचुराम यादव निवासी हरिदास जी की मगरी को गिरफ्तार किया।
आरोपी से पूछताछ की तेा आरोपी ने जो कहानी बताई उसे सुनकर हैरत में रह गए कि किस तरह से एक सीधे और भोले-भाले व्यक्ति को अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग बेवफूक बनाते है और उसके नाम से पैसे लेकर खुद हड़प जाते है।
आरोपी तेजपाल को जब पता चला कि ललित प्रकाश पालीवाल रिटायर्ड हो चुके है और स्वभाव से सीधे है तो वह ललित प्रकाश के साथ रहने लगा। आरोपी तेजपाल ने ललित प्रकाश को निवेश करने के लिए उकसाया और भीलूराणा कच्ची बस्ती में 3 लाख 70 हजार रूपए में एक प्लॉट दिलवाया। इसके बाद आरोपी तेजपाल ने कुछ समय बाद ललित प्रकाश से इस प्लॉट को किसी बलवन्त यादव को 4.90 लाख में बिकवा दिया। इस दौरान 1.60 लाख रूपए नकद आए तो उसे तेजपाल ने अपने पास रख लिया। इसके साथ ही आरोपी तेजपाल ने ललित प्रकाश को शेष पैसों के जो चैक मिले थे, वो पैसे भी ललित प्रकाश के खाते से निकलवाकर स्वयं रख लिए और बाद में देने का आश्वासन दिया। आरोपी तेजपाल ने इस दौरान सारी लिखापढ़ी ललित प्रकाश से ही करवाई। प्लॉट खरीदने वाले बलवंत को वह प्लॉट पसंद नहीं आया तो बलवंत ने तेजपाल से सम्पर्क कर इस प्लॉट को बिकवाने के लिए कहा। इस पर तेजपाल ने इस प्लॉट को किसी शाहरूख नामक युवक को 4.10 लाख रूपए में बिकवा दिया। चूंकि इस प्लॉट पर ललित प्रकाश की लिखापढ़ी थी तो स्टॉम्प पर हस्ताक्षर और अन्य काम भी ललित प्रकाश से करवाकर कैश पैसे बलवंत को दिलवाने के बजाए अपने पास रख लिए और स्वयं के खाते के चैक भी ले लिए। इस तरह से शाहरूख ने जो प्लॉट खरीदा और 4.10 लाख रूपए दिए वह सारे पैसे तेजपाल हड़प गया। बलवंत ने जब पैसों की मांग की तो पहले तो उसे टरकाते रहे और बाद में बलवन्त ने मौका देखकर ललित प्रकाश से उसके खाते का एक चैक दिलवा दिया। इधर जब बवलंत ने जब चैक बैंक में डाला तो चैक अनादरित हो गया। इसके बाद बलवंत ललित प्रकाश से पैसों की मांग करने लगा तो तेजपाल बीच में आ जाता और कुछ दिनों बाद देने का आश्वासन देने लगा। बलवंत को जब काफी समय तक पैसे नहीं मिले तो उसने थाने में परिवाद कर दिया, जिसकी जांच जारी है। तेजपाल के इस धोखाधड़ी से ललित प्रकाश परेशान चल रहे थे। पुलिस तेजपाल को ओर पूछताछ के लिए सोमवार को न्यायालय में पेश कर रिमाण्ड पर लेगी और शेष अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका के बारे में जांच करेगी।

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