Tuesday , 18 December 2018
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प्र.म. मोदी ने लालकिले पर फहराया तिरंगा

आजाद हिंद फौज स्थापना के 75 साल पूरे
‘एक परिवार के लिए कई सपूतों को भुलाया’
नई दिल्ली। अब तक स्वतंत्रता दिवस के दिन यानि 15 अगस्त को ही प्रधानमंत्री लालकिले पर ध्वजारोहण करते रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब 21 अक्टूबर को भी लाल किले से प्रधानमंत्री ने तिरंगा फहराया। सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली ‘आजाद हिंद सरकारÓ की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर लाल किले में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया और ध्वजारोहण किया गया।
बता दें कि 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में प्रांतीय आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आजाद हिंद फौज के सिपाही लाती राम और सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्य भी शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा, आज मैं उन माता पिता को नमन करता हूं जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसा सपूत देश को दिया। मैं नतमस्तक हूं उस सैनिकों और परिवारों के आगे जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में खुद को न्यौछावर कर दिया। इस मौके पर प्र.म. ने नेताजी के बहाने पूर्व की कांग्रेस सरकारों को कठघरे में खड़ा किया। प्र.म. ने कहा कि इस देश में एक परिवार को बड़ा साबित करने के लिए भारत मां के कई सपूतों को भुलाया गया। प्र.म. मोदी ने नेताजी के योगदान को याद करते हुए कहा, ये दुखद है कि एक परिवार को बड़ा बताने के लिए, देश के अनेक सपूतों…फिर वो वो चाहे सरदार पटेल हों, बाबा साहेब आंबेडकर हों, या फिर नेताजी… राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान को भुलाने की कोशिश की गई। प्र.म. ने कहा कि ये उनके लिए सौभाग्य की बात है कि देश के लिए सुभाष बाबू ने जो किया, उसे देश के सामने रखने का, उनके बताये कदमों पर चलने का मौका उन्हें 7मिल रहा हैं, ये उनके लिए सौभाग्य की बात है।
प्र.म. ने नेताजी की उस चिी का किया जिक्रप्र.म. मोदी ने लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, आजाद हिंद सरकार केवल नाम नहीं था। नेताजी के नेतृत्व में इस सरकार ने हर क्षेत्र में नई योजना बनाई थी। इस सरकार का अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी, अपना डाक टिकट था, गुप्तचर सेवा थी। कम संसाधन में ऐसे शासक के खिलाफ लोगों को एकजुट किया जिसका सूरज नहीं ढलता था। वीरता के शीर्ष पर पहुंचने की नींव नेताजी के बचपन में ही पड़ गई थी। मोदी ने सुभाष चंद्र बोस की उस चिी का जिक्र किया जो उन्होंने किशोर अवस्था में अपनी मां को लिखी थी। मोदी ने कहा, सुभाष बाबू ने मां को चिी लिखी। उन्होंने 1912 के आसपास चिी लिखी थी। उस समय ही उनमें गुलाम भारत को लेकर वेदना थी। उस समय वह सिर्फ 15-16 साल के थे। उन्होंने मां से पत्र में सवाल पूछा था कि मां क्या हमारा देश दिनों दिन और अधिक पतन में गिरता जाएगा। क्या इस दुखिया भारत माता का एक भी पुत्र ऐसा नहीं है जो पूरी तरह अपने स्वार्थ की तिलांजली देकर अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दे। बोलो मां हम कब तक सोते रहेंगे ? ‘एक परिवार के लिए नेताजी, पटेल को भुलाने की कोशिशÓ प्र.म. मोदी ने कहा, इसी लाल किले पर आजाद हिंद फौज के सेनानी शाहनवाज खान ने कहा था कि सुभाष चंद्र बोस ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भारत होने का एहसास उनके मन में जगाया। ऐसी क्या परिस्थितियां जीं जो शाहनवाज खान को यह बात कहनी पड़ी। कैंब्रिज के अपने दिनों को याद करते हुए सुभाष चंद्र ने लिखा है कि हमें सिखाया जाता था कि यूरोप ग्रेट ब्रिटेन का रूप है, इसलिए यूरोप को ब्रिटेन के चश्मे से देखने की आदत है। आजादी के बाद भी लोगों ने इंग्लैंड के चश्मे से देखा। हमारी व्यवस्था, हमारी परंपरा, हमारी संस्कृति, हमारी पाठ्य पुस्तकों को इसका नुकसान उठाना पड़ा। प्र.म. ने कहा कि स्वतंत्रता के पहले दशकों में अगर पटेल और बोस का नेतृत्व मिलता तो स्थितियां अलग होतीं। मोदी ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा, यहां एक परिवार को बड़ा बनाने के लिए देश के अनेक सपूतों सरदार पटेल, बाबासाहब अंबेडकर हों, नेताजी के योगदान को भुलाने की कोशिश की थी। मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नाम पर राष्ट्रीय सम्मान देने की घोषणा की है।

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