प्रभु राम वनवास के लिए इन 17 स्थानों से गुजरे थे, बनेगा कॉरिडोर

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नई दिल्ली (एजेंसी)। श्रीराम की नगरी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन संपन्न हो गया। इस विशेष और एतिहासिक पल का लोगों को सालों से इंतजार था। बहरहाल, रामकथा से मोटे तौर पर हर कोई वाकिफ है। परंतु क्या आप जानते हैं कि 14 वर्ष के लिए वनवास जाते समय भगवान राम किस रास्ते से होकर गुजरे थे?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद राम वन गमन पथ पर भी सरकारों ने ध्यान दिया है। केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक ने राम वन गमन पथ को विकसित करने का संकल्प जताया है। आइए जानते हैं कहां-कहां से होकर गुजरे थे प्रभु श्रीराम:
तमसा नदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर राम ने नाव से नदी पार की।
शृंगवेरपुर तीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किमी दूर यह स्थल निषादराज का गृह राज्य था। यहीं पर उन्होंने केवट से गंगा पार कराने को कहा था। शृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।
कुरई : सिंगरौर में गंगा पार कर भगवान श्रीराम कुरई में रूके।
प्रयागराज : कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयागराज पहुंचे थे।
चित्रकूट : इसके बाद राम चित्रकूट पहुंचे, जहां राम को अयोध्या ले जाने के लिए भरत आए थे।
सतना : यहां अत्रि ऋषि का आश्रम था।
दंडकारण्य : चित्रकूट से निकलकर भगवान श्रीराम दंडकारण्य पहुंचे। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकारण्य था।
पंचवटी नासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षेत्र में है, जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी।
सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी।
पर्णशाला : पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्मम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को पनसाला भी कहते हैं।
तुंगभद्रा : तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर भगवान श्रीराम, सीताजी की खोज में गए थे।
शबरी का आश्रम : रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो केरल में स्थित है।
ऋष्यमूक पर्वत: मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए राम ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की व बाली का वध किया।
कोडीकरई : यहां राम की सेना ने पड़ाव डाला और रामेश्वरम की ओर कूच किया।
रामेश्वरम : श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।
धनुषकोडी : श्रीराम रामेश्वरम के आगे धनुषकोडी पहुंचे। यहीं से उन्होंने रामसेतु बनाया।
नुवारा एलिया पर्वत : श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाडिय़ों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है।


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