Saturday , 20 October 2018
Top Headlines:
Home » India » पाक को कर्ज देने पर आईएमएफ को दी चेतावनी

पाक को कर्ज देने पर आईएमएफ को दी चेतावनी

अमेरिका ने भारत का बढ़ाया सामरिक साझेदार का दर्जा
नई दिल्ली। एक तरफ अमेरिका भारत को सामरिक साझेदार के दर्जों में इजाफा करते हुए बढ़ते भरोसे का इजहार कर रहा, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है। भारत पर बढ़ते भरोसे का ही परिणाम है कि अमेरिका ने सोमवार को भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण-1 (एसटीए- 1) देश का दर्जा देकर उसके लिए हाई-टेक प्रॉडक्ट्स की बिक्री के लिए निर्यात नियंत्रण में रियायत दे दी। भारत एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है, जिसे इस सूची में शामिल किया गया है। 2016 में भारत को अमेरिका के ‘प्रमुख रक्षा सहयोगीÓ के रूप में मान्यता मिलने के बाद उसे एसटीए-1 का दर्जा हासिल हुआ है। वहीं, अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को पाकिस्तान को राहत पैकेज देने को लेकर आगाह किया।
36 देशों के संघ में शामिल हुआ भारत
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विलबर रॉस ने कहा, हमने भारत को सामरिक व्यापार प्राधिकरण एसटीए- 1 का दर्जा प्रदान किया है। निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत की स्थिति में यह ‘एक महत्वपूर्ण बदलावÓ है। यूएस चैंबर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित भारत-प्रशांत बिजनस फोरम के पहले आयोजन में रॉस ने कहा कि एसटीए- 1 दर्जा भारत-अमेरिका के सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को ‘मान्यताÓ देता है। यह दर्जा वाणिज्य नियंत्रण सूची (सीसीएल) में निर्दिष्ट वस्तुओं के निर्यात, पुन: निर्यात और हस्तांतरण की अनुमति देता है। वर्तमान में इस सूची में 36 देश हैं जिनमें ज्यादातर नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) में शामिल देश हैं। भारत इसमें शामिल होने वाला एकमात्र दक्षिण एशियाई देश है। अन्य एशियाई देशों में जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं।
भारत को क्या फायदा?
यह दर्जा हासिल होने से भारत अमेरिका से अत्याधुनिक और संवेदनशील प्रौद्योगिकी खरीद पाएगा। इससे द्विपक्षीय सुरक्षा व्यापार रिश्ते को विस्तार मिलेगा, जिसके परिणास्वरूप भारत में अमेरिका से होने वाले निर्यात में वृद्धि होगी।
अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विलबर रॉस ने कहा कि एसटीए- 1 से भारत को सुरक्षा एवं दूसरी हाई-टेक प्रॉडक्ट्स का और बड़ा सप्लाइ चेन हासिल होगा जिससे विभिन्न अमेरिकी तंत्रों के साथ उसकी गतिवधियां बढ़ेंगी, दोनों देशों के सिस्टम के बीच पारस्परिकता की वृद्धि होगी और लाइसेंसों की स्वीकृति में समय और संसाधनों की बचत होगी।
भारत के साथ रिश्ते में बढ़ा भरोसा
अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरणा ने कहा कि इससे यह तो जाहिर होता ही है कि दोनों देश एक-दूसरे के साथ रिश्ते में कितना भरोसा रखते हैं, इसके साथ ही एक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा साझेदार के रूप में भारत की क्षमताओं का भी प्रदर्शन होता है। सरना ने कहा, यह न केवल रिश्ते पर विश्वास का प्रतीक है, बल्कि एक अर्थव्यवस्था और सामरिक साझेदार के रूप में भारत की क्षमता का भी इजहार है क्योंकि अमेरिका ने माना है कि भारत के पास बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था है जिससे भारत को और ज्यादा संवेदनशील सुरक्षा तकनीक और दोहरे इस्तेमाल की प्रौद्योगिकियां हासिल होंगी। वह भी किसी तरह के प्रसार की जोखिम के बिना। उन्होंने आगे कहा, यह भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक रिश्तों की स्वीकृति है। भारत को बड़े सुरक्षा साझेदार का दर्जा देना एक तार्किक कदम है।
पाक के सामने भरोसे का संकट
दूसरी तरफ, अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगातार निचले स्तर पर आ रही है। इसी क्रम में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) को पाकिस्तान को किसी संभावित राहत पैकेज के प्रति आगाह किया है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने सीएनबीसी से साक्षात्कार में कहा, कोई गलती नहीं करें। आईएमएफ जो करेगा उस पर हमारी निगाह है। मीडिया में इस तरह की खबरें आई हैं कि पाकिस्तान आईएमएफ से 12 अरब डॉलर का भारी भरकम पैकेज चाहता है। पॉम्पियो से इसी बारे में पूछा गया था। इस बीच आईएमएफ ने स्पष्ट किया है कि उसे अभी तक पाकिस्तान से इस तरह का आग्रह नहीं मिला है। आईएमएफ, वल्र्ड बैंक और चीन के कर्जों पर डिफॉल्टर होने से बचने के लिए पाकिस्तान को अगले कुछ माह में 3 अरब डॉलर की जरूरत है।
एफएटीएफ के भी संदिग्धों की सूची में पाक
इससे पहले, फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) भी पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट यानी संदिग्धों की सूची में डाल चुका है। आतंकी संगठनों को हो रही आर्थिक फंडिंग को रोकने में कामयाब न रहने की वजह से पाकिस्तान के खिलाफ यह ऐक्शन लिया गया है। पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के एक्सपर्ट्स का कहना है कि संदिग्धों की सूची में आने के बाद आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन पाकिस्तान की रेटिंग गिरा सकते हैं। रेटिंग गिरने की वजह से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लोन भी ऊंचे ब्याज दर पर मिलेगा और दुनिया में उसकी विश्वसनीयता में भी गिरावट आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.