Monday , 19 November 2018
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पहली स्वदेशी ऐंटी न्यूक्लियर किट तैयार

भारत को बड़ी कामयाबी
नई दिल्ली। देश की सुरक्षा में लगे अर्धसैनिक और पुलिस बलों की सेफ्टी के लिए परमाणु चिकित्सा और सहयोगी विज्ञान संस्थान (ढ्ढहृरू्रस्) ने एक बड़ी खोज पूरी कर ली है। संस्थान द्वारा पहली स्वदेशी ऐंटी न्यूक्लियर मेडिकल किट तैयार कर ली गई है। इसका इस्तेमाल परमाणु हमले के दौरान जवानों के उपचार और उनके बचाव के लिए किया जा सकता है। इससे परमाणु युद्ध या रेडियोधर्मी रिसाव की वजह से गंभीर रूप के घायल लोगों को उपचार दिया जा सकेगा। यह किट पूर्ण रूप से ‘मेड इन इंडियाÓ भी है।
किट को बनाने के लिए आईएनएमएएस पिछले 20 साल से कड़ी मेहनत कर रहा था। इस किट में करीब 25 सामग्री हैं, जिनका अलग-अलग इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें रेडिएशन के असर को कम करनेवाले रेडियो प्रटेक्टर, बैन्डेज, गोलियां, मलहम आदि शामिल हैं। आईएनएमएएस के डायरेक्टर ए के सिंह ने बताया कि स्वदेशी रूप से इस किट का बनना भारत को काफी फायदा देगा। अब तक भारत इस किट को रणनीतिक रूप से उन्नत राष्ट्रों जैसे रूस और अमेरिका से खरीदता था, जिसके लिए भारी कीमत चुकानी होती थी। किट में क्या-क्या शामिलकिट में हल्के नीले रंग की गोलियां हैं, जो रेडियो सेसियम (सीएस-137) और रेडियो थैलियम आदि के असर को लगभग खत्म कर देती हैं। ये खतरनाक तत्व किसी भी परमाणु बम का हिस्सा होते हैं जो मानव शरीर की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। इसमें एक एसिड का इन्जेक्शन भी है जो यूरेनियम को शरीर में फैलने से रोकता है। कुछ द्रव भी हैं जो नसों में इन्जेक्ट किया जाता है, इसका काम शरीर से अतिरिक्त चीजों को बाहर निकाल देना होता है।
आईएनएमएएस के मुताबिक, फिलहाल ये किट सिर्फ अर्धसैनिक बल और पुलिस वालों के लिए बनाई गई हैं जिनको ऐसी रेडिएशन का सबसे ज्यादा खतरा है। इनका इस्तेमाल किसी परमाणु, कैमिकल हमले के दौरान या उसके बाद चलाए जाने वाले बचाव अभियान के दौरान ही किया जाएगा। संस्थान द्वारा बताया गया है कि कई अर्धसैनिक बल उनके साथ समझौता करने पर विचार कर रहे हैं ताकि निर्बाध खरीद हो सके।

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