Wednesday , 11 December 2019
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पहली बार पूरे प्रदेश में ईवीएम से ही होंगे पंचायत चुनाव

1 लाख 10 हजार ईवीएम सुरक्षा घेरे में 12 दिसंबर को पहुंचेगी
जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। पंचायत चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में कराएं जाएंगे हालांकि 12 दिसंबर तक सभी जिलों में ईवीएम पहुंच जाएगी। प्रदेश में पहला मौका होगा जब सभी जगह ईवीएम से पंचायत चुनाव होंगे। इससे पहले वर्ष 2015 में सिर्फ 16 जिलों में ही ईवीएम से पंचायत चुनाव हुए थे।
शेष जिलों में बैलेट पेपर से मतदान कराया गया था। राज्य सरकार की वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 लाख 10 हजार ईवीएम ओडिशा, बिहार और महाराष्ट्र से मांगी है। इनके ट्रांसपोर्ट पर 15 करोड़ रूपए का खर्चा होगा।
उधर राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी कलेक्टरों को दिशा -निर्देश जारी कर दिए है कि पंचायत चुनाव के लिए पुनर्गठन से जुड़ी वर्किंग पूरी कर लें ताकि चुनाव सम्पन्न कराने में आयोग को परेशानी नहीं आएं। सभी से रिपोर्ट ली जा रही है। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनाव के चरणों में जिलों का चयन होगा।
पिछली बार तीन चरणों में पंचायत चुनाव हुए थे जबकि पुनर्गठन के बाद चार चरणों में चुनाव सम्पन्न कराए जा सकते है। इसके लिए अतिरिक्त फोर्स की व्यवस्था के लिए निर्वाचन आयोग और पुलिस अफसरों के बीच बैठक हो चुकी है। उधर आचार संहिता दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लग सकती है।
निकाय चुनाव में सफलता मिलने के बाद सरकार भी पंचायत चुनाव समय पर कराने के मूड में
निकाय चुनाव में कांग्रेस सरकार को बड़ी सफलता हाथ लगने के बाद गहलोत सरकार भी अब राज्य निर्वाचन आयोग को सहयोग कर रही है। इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग राज्य सरकार को पत्र लिखकर चुनाव कराने के संबंध में बैठक करना चाह रहा था लेकिन एक महीने से रेस्पॉन्स नहीं मिल रहा था। पिछले दिनों ही राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार के अफसरों पर नाराजगी जाहिर करते हुए चेताया था ईवीएम की व्यवस्था नहीं हुई तो कागज पर मतदान करा लिया जाएगा क्योंकि जनवरी – फरवरी में चुनाव कराना आयोग की संवैधानिक बाध्यता है।
उधर निकाय चुनाव के नतीजे जैसे ही कांग्रेस के पक्ष में आए तो राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग को हर वर्किंग पर सहयोग करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के आला नेताओं का मानना है कि निकाय चुनाव में देरी कराना उचित नहीं रहेगा। पंचायत चुनाव में भी कांग्रेस के पक्ष में माहौल रहेगा तो सत्ता और संगठन दोनो को और मजबूती मिलेगी।

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