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पहली बार कोई यान चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा

नई दिल्ली (एजेंसी)। चंद्रयान-2 दुनिया का पहला ऐसा यान होगा, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इससे पहले चीन के यान ने दक्षिणी ध्रुव से कुछ दूरी पर लैंडिंग की थी। अब तक यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए अनजान बना हुआ है। चांद के बाकी हिस्से की तुलना में ज्यादा छाया होने की वजह से इस क्षेत्र में बर्फ के रूप में पानी होने की संभावना ज्यादा है। अगर चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की खोज कर पाता है, तो यहां इंसानों के रूकने लायक व्यवस्था करने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। यहां बेस कैम्प बनाए जा सकेंगे। साथ ही अंतरिक्ष में नई खोज का रास्ता खुलेगा।चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव : ऐसी जगह जहां बड़े क्रेटर्स हैं और सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पातींचांद के दक्षिणी धु्रव पर अगर कोई अंतरिक्ष यात्री खड़ा होगा तो उसे सूर्य क्षितिज रेखा पर दिखाई देगा। वह चांद की सतह से लगता हुआ और चमकता नजर आएगा। सूर्य की किरणें दक्षिणी ध्रुव पर तिरछी पड़ती हैं। इस कारण यहां तापमान कम होता है।
स्पेस इंडिया के ट्रेनिंग इंचार्ज तरूण शर्मा बताते हैं कि चांद का जो हिस्सा सूरज के सामने आता है, वहां का तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। इसी तरह चांद के जिस हिस्से पर सूरज की रोशनी नहीं आती, वहां तापमान 130 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। लिहाजा, चांद पर हर दिन (पृथ्वी के 14 दिन) तापमान बढ़ता-चढ़ता रहता है, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होता। यही कारण है कि वहां पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है।चंद्रयान-2 की कामयाबी से अंतरिक्ष विज्ञान के लिए नए रास्ते खुलेंगे 1) पानी और खनिजों की खोज
चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मैग्नीशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिजों को खोजने का प्रयास करेगा। वह चांद के वातावरण और इसके इतिहास पर भी डेटा जुटाएगा। लेकिन इसका सबसे खास मिशन वहां पानी या उसके संकेतों की खोज होगी। अगर चंद्रयान-2 यहां पानी के सबूत खोज पाता है तो यह अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक बड़ा कदम होगा। दक्षिणी ध्रुव के क्रेटर्स में सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पातीं। इसके कारण इनमें जमा पानी अरबों सालों से एक जैसा हो सकता है। इसका अध्ययन कर शुरूआती सोलर सिस्टम के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
2) बेस कैम्प बनाने की संभावनाएं मजबूत होंगी
एस्ट्रोनॉमी एक्सपर्ट तरूण शर्मा बताते हैं कि चांद पर पानी न होने के चलते वहां अभी अंतरिक्ष यात्री ज्यादा दिन नहीं रह सकते। चंद्रयान-2 अगर यहां बर्फ खोज पाता है, तो यह समस्या खत्म हो जाएगी। बर्फ से पीने के पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था हो सकेगी। तरूण कहते हैं कि पानी और ऑक्सीजन की व्यवस्था होगी तो चांद पर बेस कैम्प बनाए जा सकेंगे, जहां चांद से जुड़े शोधकार्य के साथ-साथ अंतरिक्ष से जुड़े अन्य मिशन की तैयारियां भी की जा सकेंगी। भारत की कामयाबी से वहां बेस कैम्प बनाने की संभावनाएं बढ़ेंगी3) चंद्रमा अंतरिक्ष में नया लॉन्च पैड बन सकेगा
तरूण का कहना है कि अंतरिक्ष एजेंसियां मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए चांद को लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल कर पाएंगी। यहां के बर्फ से फ्यूल बनाकर पृथ्वी से अंतरिक्ष में ले जाने वाले मटेरियल को कम किया जा सकता है। इससे अंतरिक्ष मिशन का खर्च कम होगा। चांद से मंगल ग्रह पर पहुंचने में समय भी कम लगेगा। इसी तरह बाकी ग्रहों के लिए भी मिशन लॉन्च करने में आसानी होगी।
4) चांद पर ऊर्जा पैदा की जा सकेगी
दक्षिणी ध्रुव में एक हिस्सा ऐसा भी है, जो न तो ज्यादा ठंडा है और न ही अंधेरे में रहता है। यहां के शेकलटन क्रेटर्स के पास वाले हिस्सों में सूर्य लगातार 200 दिनों तक चमकता है। यहां पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को शोधकार्य में बड़ी मदद मिल सकती है। यहां वैज्ञानिक सूर्य की किरणों का उपयोग कर ऊर्जा की आपूर्ति कर सकते हैं, जो मशीनों और अन्य शोधकार्य के लिए जरूरी होगी।

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