Friday , 19 October 2018
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पश्चिमी तट पर बनेगा दूसरा उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र


नयी दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की बढ़ती जरूरतों तथा आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित मौजूदा प्रक्षेपण केंद्र पर ज्यादा दबाव को देखते हुये देश के पश्चिमी तट पर एक नया प्रक्षेपण केंद्र बनाने की योजना है। 
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अभी दो लांच पैड हैं। वहां तीसरे लांच पैड का काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा पश्चिमी तट पर एक नये प्रक्षेपण केंद्र के लिए हमने कुछ स्थानों पर विचार किया है। नये प्रक्षेपण केंद्र के लिए स्थान तय करने का काम अंतिम चरण में है तथा जल्द इसके बारे में घोषणा की जायेगी। उन्होंने यह नहीं बताया कि नये प्रक्षेपण केंद्र के लिए अंतिम फैसला कब तक हो जायेगा। 
अधिकारी ने कहा कि इसरो द्वारा विकसित किये जा रहे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के पहले दो मिशन की लांङ्क्षचग श्रीहरिकोटा से ही की जायेगी और उसके बाद एसएसएलवी मिशन का प्रक्षेपण नये केंद्र से किया जायेगा। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि नया प्रक्षेपण केंद्र वर्ष 2020 तक तैयार हो जायेगा क्योंकि इसरो पहले ही कह चुका है कि छोटे प्रक्षेपण यान अगले साल मध्य तक विकसित कर लिये जायेंगे। 
उल्लेखनीय है कि पूर्वी तट पर स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से फिलहाल इसरो के सभी मिशनों को अंजाम दिया जाता है। इसरो का प्रक्षेपण अन्य एजेंसियों की तुलना में बेहद सस्ता होने के कारण अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां भी अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए यहाँ आने लगी हैं, लेकिन सीमित क्षमता के कारण इसरो अपने मिशनों की संख्या अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ा 
पा रहा है।
अधिकारी ने बताया कि पूर्वी तट पर दूसरा केंद्र स्थापित करने का विकल्प नहीं है क्योंकि यदि हम दक्षिण की ओर जाते हैं तो श्रीलंका 500 किलोमीटर के दायरे में आ जायेगा। इससे ध्रुवीय प्रक्षेपण के समय हमें प्रक्षेपण यान को सीधे भेजने की बजाय बीच में उसका मार्ग थोड़ा मोडऩा होगा जिससे प्रक्षेपण यान की भार वहन क्षमता कम हो जायेगी। इसलिए पश्चिमी तट पर विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रक्षेपण केंद्र ऐसी जगह होना चाहिये जहाँ आबादी अपेक्षाकृत कम हो, लेकिन साथ ही वहाँ संपर्क साधन भी अच्छे हों। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में घोषित मानव मिशन ‘गगनयानÓ के लिए श्रीहरिकोटा में ही तीसरा लांच पैड बनाया जा रहा है।
इसरो ने दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में पहला मानव मिशन भेजने की घोषणा की है। इसमें तीन अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। इसमें रिकवरी सिस्टम, रिकवरी लॉजिस्टिक, डीप स्पेस नेटवर्क, लांच पैड पर अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा आदि की तकनीक विकसित हो चुकी है। ऑर्बिटल मॉड्यूल और क्रू इस्केप सिस्टम पर काम चल रहा है। हालाँकि, अभी अंतरिक्ष यात्रियों का चयन और उनके प्रशिक्षण का काम बाकी है।

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