Tuesday , 12 November 2019
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नेहरू सेना को न रोकते तो पीओके भी हमारा होता : शाह

70 सालों की टीस खत्म हुई
कश्मीर के विभाजन पर संसद की मुहर पक्ष में 370 विपक्ष में 70
नई दिल्ली (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर राज्य को 2 केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटे जाने संबंधी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद लोकसभा की भी मंजूरी मिल गई। बिल के पक्ष में 370 और विपक्ष में 70 वोट पड़े। बीते दिन वोटिंग के बाद उच्च सदन से इस बिल को मंजूरी मिल गई थी जिसके पक्ष में 125 और विपक्ष में 61 वोट पड़े थे। लोकसभा में जम्मू कश्मीर में विशेष अधिकार देने वाला धारा 370 को खत्म करने का संकल्प भी पारित हुआ । साथ ही जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक को लोकसभा में वापस ले लिया गया ।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून का रूप ले लेगा। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव भी पास हो गया। बिल पर घंटों चली चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को भरोसा दिया कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने पर उसे फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सकता है। बिल के तहत जम्मू-कश्मीर से अलग हो लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बनेगा, लेकिन वहां विधानसभा नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर भी अब केंद्रशासित प्रदेश होगा लेकिन उसके पास विधानसभा भी होगी। बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हर सवाल और संदेह का विस्तार से जवाब दिया।
गृह मंत्री अमित शाह ने ‘भारत माता की जयÓ, ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा हैÓ के नारों बीच जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा का जवाब देना शुरू किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया।
’70 सालों की टीस खत्म हुईÓ
70 सालों की टीस खत्म होने का आनंद व्यक्त नहीं किया जा सकता। हम कभी क्यों नहीं बोलते कि यूपी, पंजाब या तमिलनाडु भारत का अभिन्न अंग है, यह इसलिए था कि 370 ने जनमानस में एक संशय था। आज यह कलंक मिट गया। कहा जाता है कि आर्टिकल 370 भारत को कश्मीर से जोड़ता है। धारा 370 भारत को कश्मीर से नहीं जोड़ती है बल्कि जोडऩे से रोकती है और आज यह रूकावट हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।
‘हालात सामान्य होते ही दे सकते हैं पूर्ण राज्य का दर्जाÓ
वोट बैंक के लिए 370 को हटाने का विरोध हो रहा है। आज 370 हट जाएगा और इतिहास में यह दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। विपक्ष के कई सदस्यों ने कहा है कि यह यूटी हमेशा के लिए रहेगा क्या, क्यों बनाया? मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जहां तक यूटी का सवाल है तो परिस्थिति सामान्य होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने में सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
‘पीओके पर हमारा दावा पहले की तरह ही मजबूतÓ
कहा जा रहा है कि पीओके को दे दिया, नरेंद्र मोदी की सरकार पीओके को कभी दे ही नहीं सकती। पीओके पर हमारा दावा उतना ही मजबूत है, जितना पहले था।….बिल में पीओके और अक्साई चीन दोनों का जिक्र है।
‘जब सेना जीत रही थी तब नेहरू ने एकतरफा संघर्षविराम क्यों किया ?Ó
मनीष तिवारी ने इतिहास का जिक्र किया लेकिन एक सीमा पर आकर वह रूक गए। मैं पूछना चाहता हूं कि जब 1948 में हमारी सेना विजयी हो रही थी, सेना पाकिस्तानी कबीलों के कब्जा किए गए हिस्से को जीत रही थी तो एकतरफा संघर्षविराम किसने किया? नेहरूजी ने किया था और उसी वजह से आज पीओके है। सेना को नहीं रोका होता तो पीओके आज भी हमारे साथ होता।
‘इतिहास नरेंद्र मोदी को सालों याद रखेगाÓ
अधीर रंजनजी ने संयुक्त राष्ट्र का जिक्र किया। लेकिन यूएन में लेकर कौन गया। रेडियो पर संघर्षविराम का एकतरफा ऐलान किया गया। मामले को यूएन में नेहरूजी ही ले गए। आज की घटना का जब भी जिक्र होगा तो इतिहास नरेंद्र मोदी को सालों-सालों तक याद करेगा।
‘अलगाववाद के पीछे था आर्टिकल 370Ó
370 जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध था। उसे हटाना इसलिए जरूरी था कि यह संसद के अधिकार को कम करता है।
पाकिस्तान अलगाववाद की भावना भड़का रहा है तो 370 की वजह से। वहां के लोगों में अलगाववाद होता है। वहां की विधानसभा की मंजूरी के बिना देश का कोई कानून वहां लागू नहीं होता।
‘370 हटाना जरूरी था, 371 को नहीं छेड़ेंगेÓ
370 के अलावा 371 और दूसरे आर्टिकल भी विशेष और अस्थायी उपबंध करते हैं लेकिन उनमें कुछ गलत नहीं है तो उन्हें क्यों बदलें। 370 और 371 की तुलना नहीं हो सकती। इसलिए नॉर्थ-ईस्ट या अन्य राज्यों को आश्वस्त करता हूं कि सरकार की कोई मंशा 371 को हटाने की नहीं है। इसी रास्ते पर 2 बार 370 पर संशोधन हो चुका है, तब यह रास्ता ठीक था और आज क्यों खराब है? वजह वोट बैंक राजनीति है।
‘चर्चा करते-करते थक गए, 3 पीढिय़ां बदल गईंÓ
इंटरनेट बंद होने पर- 1989 से 1995 तक अक्सर कफ्र्यू लगा रहता था, फोन तो छोडि़ए खाने के लिए भी कुछ नहीं मिलता था। 70 साल तक इस मुद्दे पर चर्चा करते-करते थक गए, 3 पीढिय़ां आ गईं। किससे चर्चा करें? जो पाकिस्तान से प्रेरणा लेते हैं, उनसे चर्चा करें? हम हुर्रियत से चर्चा नहीं करेंगे। हम कश्मीरियों से चर्चा करेंगे, वे हमारे हैं, हम चर्चा से नहीं भागेंगे। घाटी की जनता से जितनी ज्यादा हो सकेगी हम चर्चा करेंगे और उन्हें अपने कामों से आश्वस्त करा देंगे कि वे हमारे लिए खास हैं। हम प्यार से बात कर उनके विकास के लिए सब करेंगे, वे 100 कहेंगे तो हम 110 देंगे। पिछली सरकार में हमने वहां के लिए सवा लाख करोड़ दिया था, जिसमें 80 हजार करोड़ खर्च भी हो चुके हैं।
‘कश्मीर में आतंकवाद की वजह बेरोजगारी नहींÓ
बेकारी के कारण आतंकवाद बढ़ा? मैं इससे सहमत नहीं हूं। बेरोजगारी कई जगहों पर हैं लेकिन वहां आतंकवाद क्यों नहीं उभरा। कश्मीर में यह पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है, बेरोजगारी की वजह से नहीं।
(शेष पेज 8 पर)लोकसभा में गरजे गृह मंत्रीनई दिल्ली (एजेंसी)। आर्टिकल 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो टुकड़ों में बांटकर उन्हें केंद्र शासित प्रदेश करने के मोदी सरकार के फैसले पर मंगलवार को लोकसभा में संग्राम छिड़ा। चर्चा के दौरान बढ़ती गहमा-गहमी के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने यहां तक कह दिया कि कश्मीर के लिए जान दे देंगे। संसद के इस निचले सदन में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा की मांग करते हुए गृह मंत्री अमित शाह को विपक्ष के कड़े तेवर का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के सवाल और शाह के जवाब ठ्ठ अधीर रंजन : जब शिमला समझौता, लाहौर समझौता हुआ और माइक पॉम्पियो से हमारे विदेश मंत्री ने कहा कि यह द्विपक्षीय मुद्दा है तो यह अचानक आंतरिक मसला कैसे हो गया?
शाह : यह मामला 1948 में यूएन में पहुंचाया गया था। फिर भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी ने जो शिमला समझौता किया था, उसका जिक्र किया। उन्होंने एक तरह से इस सदन की क्षमता पर सवाल उठाया है कि यह सदन इस बिल पर चर्चा कर सकता है कि नहीं? जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसकी स्पष्टता भारत और जम्मू-कश्मीर के संविधान में है। जम्मू-कश्मीर के संविधान में भी इसका स्पष्ट जिक्र है।
ठ्ठ कांग्रेस : क्या पाक अधिकृत कश्मीर की बात नहीं करेंगे?
शाह : जब जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं तो पीओके समाहित है। जान दे देंगे हम इसके लिए। हमारे संविधान और जम्मू-कश्मीर के संविधान, दोनों ने जो जम्मू-कश्मीर की सीमाएं तय की हैं, उनमें पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन समाहित है।लोकसभा में लगे ‘…वो कश्मीर हमारा हैÓ के नारे
नई दिल्ली (एजेंसी)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने की प्रतिबद्धता जताते हुये लोकसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष के सदस्यों ने ”जिस कश्मीर में बलिदान हुये मुखर्जी वो कश्मीर हमारा हैÓÓ के नारे लगाये। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 पर चर्चा पूरी होने के ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही सदन में आये सत्ता पक्ष के सदस्यों ने खड़े होकर ”मोदी, मोदीÓÓ, ”वंदे मातरम्ÓÓ और ”भारत माता की जयÓÓ के नारे लगाने शुरू कर दिये। दो मिनट तक नारेबाजी होती रही। इस बीच ”जिस कश्मीर में बलिदान हुये मुखर्जी वो कश्मीर हमारा हैÓÓ के नारे भी सुनाई दिये। कांग्रेस के सदस्यों ने अध्यक्ष से सदन में व्यवस्था (शेष पेज 8 पर)

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