Sunday , 20 October 2019
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नरसिंह पर 4 साल का प्रतिबंध

narsinghरियो डि जेनेरो। खेल मध्यस्थता अदालत (कैस) ने भारतीय पहलवान नरसिंह यादव पर डोपिंग मामले में शुक्रवार को चार वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया जिससे नरङ्क्षसह का रियो ओलंपिक में खेलने का सपना चकनाचूर हो गया।
नरङ्क्षसह को डोपिंग मामले में इस माह के शुरू में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के क्लीन चिट देने के फैसले को विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने कैस में चुनौती दी थी और कई घंटे की सुनवाई के बाद सर्वाेच्च खेल अदालत ने नरसिंह पर 4 साल का प्रतिबंध लगा दिया।
कैस ने इस मामले पर जारी अपने बयान में कहा, कैस का सुनवाई दल एथलीट की इस दलील को स्वीकार नहीं करता है कि वह केवल छवि खराब किये जाने और किसी साजिश के शिकार हैं, और ऐसे भी साक्ष्य नहीं मिले हैं कि इस पूरे मामले में उनकी कोई गलती नहीं थी और उन्होंने डोपिंग रोधी एजेंसी के नियमों को जानबूझकर नहीं तोड़ा है। ऐसे में सुनवाई दल उन पर चार वर्ष का प्रतिबंध लगाता है।
वाडा ने कैस में अपील करते हुये नाडा के फैसले पर सवाल उठाया था और चार साल का प्रतिबंध लगाने की अपील की थी। कैस ने वाडा की अपील को कायम रखते हुये नरसिंह पर 4 साल का प्रतिबंध ठोक दिया है जो फैसला सुनाये जाने के बाद से प्रभावी हो गया है। भारत के लिये नरसिंह पर प्रतिबंध लगने की खबर एक गहरा झटका है जो महाराष्ट्र के इस पहलवान से रियो में पदक की उम्मीद कर रहा था।
खेलों की सर्वाेच्च अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि नरङ्क्षसह के 25 जून 2016 के बाद से सभी प्रतियोगी परिणाम अयोग्य घोषित कर दिये जायें और इस दौरान के उनके पदक, अंक और पुरस्कार जब्त कर लिये जायें।
कैस ने साथ ही कहा, नरसिंह यादव को अयोग्य करार दिये जाने के साथ चार वर्ष का प्रतिबंध लगाया जा रहा है जो तुरंत प्रभावी हो गया है और इससे पहले एथलीट पर यदि कोई अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था तो उस अवधि को इस कुल प्रतिबंध की अवधि में शामिल किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि नरसिंह को गत 23 जुलाई को प्रतिबंधित पदार्थ मैथन ड्योनेन का सेवन करने के लिये पॉजिटिव पाया गया था और उन्हें अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया गया था। नरङ्क्षसह ने तब उनके खिलाफ साजिश रचे जाने और उनके खाने पीने में कुछ मिलाये जाने का आरोप लगाया था। नाडा के अनुशासन पैनल ने 2 अगस्त को नरसिंह की साजिश की इस दलील को स्वीकार कर लिया था और उन्हें सभी आरोपों से क्लीन चिट दे दी थी।
इसके बाद भारतीय कुश्ती महासंघ ने बताया था कि विश्व कुश्ती संस्था यूनाइटेड वल्र्ड रेसङ्क्षलग ने नरङ्क्षसह को रियो ओलंपिक में उतरने के लिये अपनी मंजूरी दे दी है जिसके बाद नरङ्क्षसह को रियो भेज दिया गया था।’मेरा सपना कू्ररता से तोड़ा गयाÓरियो डी जनेरियो। खेल पंचाट द्वारा लगाये गए चार साल के प्रतिबंध ने नरसिंह यादव को बुरी तरह तोड़ दिया है। नरसिंह ने कहा है कि इस फैसले ने उन्हें तहस-नहस कर दिया है। खेल पंचाट के फैसले के बाद रियो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का पहलवान नरसिंह यादव सपना टूट गया लेकिन शुक्रवार को उन्होंने कहा कि वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
पुरूष 74 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ी ने कहा, यह कहना कि खेल पंचाट के फैसले से मैं टूट चुका हूं, बहुत कम होगा। पिछले दो महीनों में मैंने बहुत कुछ झेला है लेकिन देश के गौरव हेतु खेलने की सोच ने मेरा हौंसला बनाए रखा। मेरे पहले बाउट से 12 घंटे पहले रियो ओलंपिक में खेलने और देश के लिए पदक जीतने का मेरा सपना कू्ररता से तोड़ से दिया गया। उन्होंने एक बयान में कहा, लेकिन अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मैं सबकुछ करूंगा। मेरे पास लडऩे की अब यही वजह है।Ó बयान में कहा गया कि नरसिंह ने अपने खाने में मिलावट का जो दावा किया था उसके संबंध में कुछ और सबूत मिलने पर फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दी जा सकती है।
नरसिंह ने कहा कि वह अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए हर प्रयास करेंगे। वहीं, मुंबई के जिस अखाड़े में नरसिंह अभ्यास करते थे वहां के उनके पहलवान दोस्त बहुत दुखी हैं। वाराणसी में नरसिंह की मां ने कहा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है, उनके बेटे को साजिश के तहत फंसाया गया है। वहीं, नरसिंह की बहन ने एएनआई के कैमरे पर रोते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वह नरसिंह का समर्थन कर उन पर लगे बैन को हटवाएं। बहन ने कहा कि उनका भाई अगर खेला तो जरूर गोल्ड जीतेगा।
खेल पंचाट के फैसले के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि नरसिंह इस वक्त बातचीत करने की हालत में नहीं है, वह लगातार रोए जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है, जिस पहले खिलाड़ी ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया उसे अचानक बैन कर दिया गया। चार साल के प्रतिबंध से निराश भारतीय ओलंपिक संघ ने कहा है कि इस पहलवान को उसके विरोधियों की बजाय अपने ही लोगों ने हरा दिया।नई दिल्ली। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने पहलवान नरङ्क्षसह पर लगे 4 वर्ष के प्रतिबंध को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये कहा है कि यह खिलाड़ी का व्यक्तिगत नहीं बल्कि संपूर्ण देश का नुकसान है।
आईओए के महासचिव राजीव मेहता ने इस निर्णय को निराशाजनक बताते हुये कहा, यह केवल नरङ्क्षसह का ही नुकसान नहीं है यह पूरे देश का नुकसान है। खेल अदालत का यह निर्णय काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने साथ ही कहा कि नरङ्क्षसह के मामले में अंदरूनी राजनीति का भी बड़ा हाथ रहा है। मेहता ने कहा, यदि इस पूरे मामले को देखें तो साफ हो जाएगा कि आखिरकार हुआ क्या है। अंदर के ही कुछ लोग जो उसे ओलंपिक से रोकना चाहते थे वे अपने काम में सफल हो गये हैं। लेकिन हम इस निर्णय के खिलाफ अपील करेंगे और उनके खिलाफ इस बैन की समयसीमा को कम कराने की कोशिश करेंगे।

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