Friday , 16 November 2018
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धर्म-शांति की राजनीति में फंसे मावली के दावेदार

बने फुटबाल टिकट कटने की आशंका पर मावली के स्थानीय दावेदारों ने किया बाहरी का विरोध
चपलोत को पहले ही मिल चुका है कटारिया से संकेत, पर भारी पड़ रहे धर्मनारायण
मांगीलाल जोशी ने बाहरी के विरोध के बारे में लिखकर देने से किया मना
उदयपुर। जिले की मावली विधानसभा से भाजपा के टिकट को लेकर विवाद होना शुरू हो गया है। मावली से स्थानीय दावेदार तो टिकट मांग ही रहे है, इसी बीच मेवाड़ के नेता ने वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विधायक शांतिलाल चपलोत को पुन: टिकट देकर मंच में फूट डालने का प्रयास किया। दूसरी ओर मावली से वर्ष 2008 में चुनाव हार चुके और पुन: दावेदारी कर रहे धर्मनारायण जोशी का नाम उपर आने की जानकारी पर एक बार फिर से स्थानीय नेताओं में हड़कंप मच गया और मावली के 11 दावेदारों ने शहर में एक बैठक कर प्रदेश नेतृत्व को एक पत्र लिखा है, जिसमें साफ किया कि मावली से टिकट किसी स्थानीय को ही दिया जाए। इस पर मावली में एक बार से फिर से स्थानीय और बाहरी का मुद्दा गर्मा गया है।
सूत्रों के अनुसार मावली विधानसभा से इस बार भाजपा से ही टिकट के दावेदारों की लम्बी फेरहिस्त है और एक के बाद करते हुए करीब एक दर्जन से अधिक दावेदार टिकट की मांग कर रहे है। इधर इस बार भैरोसिंह शेखावत मंच भी सक्रिय हो गया है और वह भी टिकट देने की मांग कर रहा है। टिकट देने से पहले ही भैरोसिंह शेखावत मंच द्वारा उदयपुर शहर से प्रत्याशी खड़ा कर धुर विरोधी कटारिया को चुनौती देने के निर्णय के बाद से ही मावली में राजनीतिक हलचल शुरू हो गई। सूत्रों के अनुसार गुलाबचंद कटारिया चाहते है किसी भी परिस्थिति में भैरोसिंंह शेखावत मंच का हश्र भी ‘कमल मित्र मण्डलÓ की तरह ही हो जाए, इसी कारण एक नए राजनीतिक ‘वजीरÓ को मैदान में उतारा गया है।
हाल में ही रणकपुर में रायशुमारी में भैरोसिंह शेखावत मंच के अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने भी मावली से अपनी दावेदारी रखी थी। इसके बाद से ही चपलोत मावली में सक्रिय हो गए। बताया जा रहा है कि चपलोत को मेवाड़ के शेर ने टिकट देने का आश्वासन दिया था और चपलोत पूरी ताकत से जुटे हुए है। इधर मावली से वर्ष 2008 में भाजपा से टिकट मिलने के बाद चुनाव हारे धर्मनारायण जोशी भी पुन: टिकट के लिए जोर लगा रहे है और इसके लिए वे अपने ‘आकाÓ राज्यसभा सांसद ओम माथुर से लगातार सम्पर्क में है। ओम माथुर राजनीतिक रूप से बड़ा कद रखते है और वे प्रदेश नेतृत्व पर धर्मनारायण जोशी को टिकट देने का दबाव बना रहे है।
इधर मेवाड़ के शेर ने इस बारे में चपलोत को जानकारी दी कि जोशी का नाम सबसे उपर है तो चपलोत में हलचल मच गई और आखिरी बार टिकट की उम्मीद कर बैठे शांतिलाल चपलोत ने इस बारे में मावली के सभी दावेदारों को बताया। इस पर सभी दावेदारों में हड़कंप मच गया और गुरूवार को मावली के करीब 11 दावेदार उदयपुर आए और सेक्टर 3 में गिरिश शर्मा के कार्यालय पर बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मावली से दावेदार शांतिलाल चपलोत, राजेश चपलोत, शंकरलाल पालीवाल, चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, कुलदीपसिंह और अन्य के बीच में बात हुई। इसमें काफी देर तक चर्चा करने के बाद सभी ने निर्णय लिया कि इस बार मावली से स्थानीय के मुद्दे को गर्माना चाहिए और सभी ने इस पर सहमति दे दी, यहां तक बताया जा रहा है कि स्थानीय प्रत्याशी के रूप में सभी शंातिलाल चपलोत पर एक हो गए।
इधर स्थानीय मुद्दे को गर्माने के लिए सभी ने मांगीलाल जोशी को फोन किया और वहां पर बुलाया। मांगीलाल जोशी के पहुंचने पर सभी जोशी को यह लिखकर देने के लिए कहा कि मावली में किसी स्थानीय को ही टिकट दिया जाए। इसके बाद मामला बिगड़ गया।
मांगीलाल जोशी ने स्पष्ट रूप से लिखकर देने से इंकार कर दिया। मांगीलाल जोशी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ‘मैं तुम्हारी पार्टी का सदस्य ही नहीं हूँ, पार्टी आज निकालती तो निकाले। मैने जनता सेना से करार कर लिया है।Ó जोशी ने कहा कि ‘मैं इस बारे में किसी को कुछ भी लिखकर नहीं दूंगा कि बाहरी को टिकट नहीं दिया जाए। भाजपा चाहे किसी को भी टिकट दे, सिवाए दल्लीचंद डांगी को छोड़कर मेरा किसी से विरोध नहीं है। यदि दल्लीचंद डांगी को पुन: प्रत्याशी बनाया तो वहां पर भी प्रत्याशी खड़ा किया जाएगा।Ó बार-बार दावेदारों ने दबाव बनाया परन्तु मांगीलाल जोशी ने लिखकर देने से इंकार कर दिया। इधर इस संबंध में भाजपा नेताओं से चर्चा की तो उन्होंने बैठक के बारे जानकारी होने से इंकार कर दिया।
आखिर में प्रदेश नेतृत्व को ये लिखा पत्र
इधर दावेदारों की बैठक के बाद एक पत्र वसुन्धरा राजे को लिखा गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि वर्ष 2008 में भी मावली से धर्मनारायण जोशी को टिकट दिया गया था और वे हार गए थे, जिससे पार्टी की बदनामी हुई थी। 10 वर्ष से धर्मनारायण जोशी मावली में सक्रिय नहीं है और गुटबाजी फैला रहे है। जिससे स्थानीय भाजपा नेताओं में खासा आक्रोश है। मावली के सभी दावेदार चाहते है कि मावली से केवल और केवल किसी स्थानीय दावेदार को ही टिकट दिया जाए। किसी स्थानीय दावेदार को ही टिकट दिया जाता है तो सभी एक होकर काम करेंगे और यदि बाहरी को टिकट दिया जाता है तो इसका विरोध किया जाएगा।

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