Monday , 26 August 2019
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देश में पहली बार बायोफ्यूल से उड़ा विमान

विमानन के लिए बनेगी कार्ययोजना 2035

नई दिल्ली। सरकार विमानन क्षेत्र में सुधारों को लेकर जल्द ही ‘कार्ययोजना 2035’ तैयार कर रही है जिसके तहत विमान ईंधन के रूप में जैव ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देने की रूपरेखा भी होगी।
नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने सोमवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जैव ईंधन से उडऩे वाली देश की पहली परीक्षण उड़ान का स्वागत करने के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा, 2035 तक दुनिया में विमानन क्षेत्र में क्या बदलाव संभव हैं उसको लेकर सरकार एक कार्ययोजना बना रही है।

इसमें पारंपरिक विमान ईंधन में जैव ईंधन मिलाने के साथ ही अन्य विभिन्न प्रकार के जरूरी बदलावों को लेकर योजना होगी।
उन्होंने कहा कि देश का विमानन क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है और ऐसे में विमान ईंधन की खपत बढऩे से देश का आयात खर्च बढ़ रहा है तो दूसरी ओर प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इसलिए विमान ईंधन को स्वच्छ ईंधन से बदलना
जरूरी है।
किफायती विमान सेवा स्पाइसजेट ने इस परीक्षण उड़ान का आयोजन किया था। हालांकि यह व्यायवासिक उड़ान नहीं थी। विमान देहरादून से उड़ान भरकर 45 मिनट बाद दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा। इसमें 23 यात्री तथा चालक दल के सदस्य शामिल थे। यात्रियों में एयरलाइन के विशेषज्ञ, नागर विमानन महानिदेशालय के अधिकारी तथा विशेषज्ञ और जैव विमान ईंधन बनाने की तकनीक विकसित करने वाले भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी), देहरादून के निदेशक अंजन रे शामिल थे। (शेष पेज 8 पर)
इस परीक्षण उड़ान के लिए बोम्बार्डियर के क्यू400 विमानों का इस्तेमाल किया गया था। इसके एक इंजन में पारंपरिक विमान ईंधन और दायें इंजन में 25 प्रतिशत जैव ईंधन मिश्रित विमान ईंधन था। कुल 430 लीटर जैविक ईंधन मिलाया गया था जिसे आईआईपी की प्रयोगशाला में तैयार किया गया था। इससे पहले रविवार को देहरादून के आकाश में ही विमान ने 25 मिनट तक जैव विमान ईंधन के साथ उड़ान भरी थी।
देहरादून के जॉलीग्रांट हवाई अड्डे पर सोमवार को इस विमान को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि इस समय देश में 600 विमान वाणिज्यिक उड़ान भर रहे हैं तथा विमान सेवा कंपनियों ने एक हजार और विमानों के लिए ऑर्डर दिया हुआ है। देश में जैव ईंधन के लिए इको सिस्टम बनाने की जरूरत होगी और विमानन क्षेत्र भी इसका अंग होगा। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों पर इस्तेमाल होने वाले विभिन्न प्रकार के वाहनों को चलाने के लिए भी जैव ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आज का दिन स्वर्णाक्षरों में लिखा जायेगा। उन्होंने कहा कि देश का कच्चा तेल आयात आठ लाख करोड़ रूपये है। हर साल 30 हजार करोड़ रूपये के विमान ईंधन का इस्तेमाल होता है और यदि इसमें 10 हजार करोड़ रूपये का भी जैव विमान ईंधन इस्तेमाल किया जा सके तो इससे न सिर्फ देश का आयात खर्च कम होगा बल्कि जैव ईंधन के लिए अखाद्य तिलहनों के बीज एकत्र करने और उनसे तेल निकालने के रोजगार से आदिवासी क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
एक प्रश्न के उत्तर में गडकरी ने कहा कि जैव विमान ईंधन के वाणिज्यिक उत्पादन में अभी समय लगेगा। अभी आईआईपी ने जट्रोफा के बीजों से यह ईंधन तैयार किया है। जट्रोफा की उपज प्रति हेक्टेयर काफी कम है जिसे बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही जैव ईंधन के लिए नीति बनाने और जैव विमान ईंधन के लिए मानक तैयार करने की जरूरत होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही नीति का मसौदा मंत्रिमंडल के समझ मंजूरी के लिए रखा जायेगा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि आज की पहल बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। अब जैव विमान ईंधन के उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की जरूरत है।
स्पाइसजेट के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि यह परियोजना सबके लिए लाभदायक है। इससे विमान ईंधन की लगात 15-20 प्रतिशत कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होगा। साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी कम होगा।

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