Wednesday , 20 November 2019
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देवदूत बनकर आए वायुसेना के जवान

तवी नदी पर रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी
सुरक्षित बचाकर लाए गए मछुआरे बिहार के सीवान से थे। उन्होंने एयरफोर्स के जवानों को धन्यवाद दिया। बता दें कि तवी नदी में अचानक जल स्तर बढऩे से प्रलयकारी लहरों में 4 मछुआरे फंस गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, वह मछुआरे एक निर्माणधीन पुल के नीचे फंसे थे। फंसे हुए मछुआरों के लिए भारतीय सेना के जवान देवदूत बनकर आए और हेलीकॉप्टर की मदद से रस्सी द्वारा खींचकर उन्हें बचा लिया।

बाढ़ में देवदूत बने जवान

जम्मू (एजेंसी)। पानी का स्तर बढऩे से जम्मू के तवी नदी में दो घंटे तक फंसे 4 मछुआरों को वायुसेना के गरूड़ कमांडो ने हेलिकॉप्टर एमआई 17 के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन कर बचा लिया गया। इस लाइव ऑपरेशन को देखकर सभी की सांसें अटकी हुई थी क्योंकि जरा सी भी चूक बड़े हादसे को न्यौता देने के लिए तैयार थी। मछुआरों के सफल ऑपरेशन के बाद हर कोई वायुसेना के जवानों को सलाम कर रहा है जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दो जिंदगियां बचा लीं।
इस डेयरडेविल रेस्क्यू ऑपरेशन का जिम्मा वायुसेना के 4 जवानों के कंधे पर था। ग्रुप कैप्टन संदीप सिंह मिशन की अगुआई कर रहे थे। उन्होंने बताया, मैं अपनी पूरी टीम को इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद कहूंगा। हमें 12 बजे के करीब जानकारी मिली कि तवी नदी में पानी का स्तर बढऩे से कुछ लोग फंस गए थे। जब हम वहां पहुंचे तो हमने पाया कि फंसे हुए लोग सीढ़ी की सहायता से चढ़कर आने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में हमने गरूड़ कमांडो की मदद ली जिन्हें रैपलिंग रस्सी की सहायता से नीचे भेजा गया और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित हेलिकॉप्टर तक लाया गया। गरूड़ कमांडो बेस्ट ट्रेंड कमांडो होते हैं।’खुद की जान रिस्क में डालकर लोगों को बचाना ही हमारी ड्यूटीÓ
संदीप ने कहा, यह पूरी तरह डेयरडेविल ऑपरेशन था। हमारा मिशन उन जिंदगियों को बचाना था। मेरी पूरी टीम इसे सफल बनाने में भागीदार है। विंग कमांडर खरे हेलिकॉप्टर उड़ा रहे थे जबकि गरूड़ कमांडो खारवाड़ ने लोगों को रेस्क्यू किया। उन्होंने कहा कि उन्हें संतुष्टि महसूस हो रही है कि यह ऑपरेशन सफल रहा। संदीप ने कहा, यह हमारी ड्यूटी होती है कि हमें खुद को रिस्क में डालकर लोगों को बचाना होता है। गरूड़ कमांडो ने मछुआरों को किया रेस्क्यू
मछुआरों को रस्सियों से बांधकर सुरक्षित बचाने वाले गरूड़ कमांडो खारवाड़ ने बताया, मेरी प्राथमिकता उन्हें बचाना थी। पायलट को शुक्रिया, उनके समर्पण के बिना यह संभव था। यह ऑपरेशन दिखने में मुश्किल था लेकिन उतना नहीं क्योंकि मेरी पूरी टीम पायलट समेत सबसे मुझे सपॉर्ट किया। खारवाड़ ने बताया, मुझे अपनी कोई चिंता नहीं थी। मैं पूरी तरह अपने कैप्टन और पायलट पर निर्भर था। हमारे लिए सबसे पहले फंसे हुए लोग हैं। उन्हीं की मदद के लिए हमें रखा गया है।

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