Tuesday , 18 June 2019
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दूसरे दिन भी अपनों की तलाश करते रहे परिजन

गुस्साए लोगों ने गेटमैन को बिल्डिंग से फेंका
अमृतसर ट्रेन हादसा
डीएमयू चालक गिरफ्तार
मजिस्ट्रेट करेंगे जांच 16 घंटे बाद घटनास्थल पहुंचे सीएम
अमृतसर। शुक्रवार शाम दशहरा कार्यक्रम के दौरान जोड़ा फाटक के पास हुए रेल हादसे के लिए रेलवे पुलिस ने गैर इरादतन हत्या और हादसे की धाराओं के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस हादसे में 61 लोगों की मौत हो गई और करीब 150 लोग घायल हो गए थे। उधर पुलिस ने डीएमयू के चालक को हिरासत में ले लिया है। उसकी डीएमयू से ही हादसा हुआ था। उधर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अमृतसर पहुंच गए हैं। उन्होंने गुरू नानकदेव अस्पताल में जाकर घायलों को देखा और उनकी हालत के बारे में जानकारी ली। उधर लोगों ने हादसा स्थल जोड़ा फाटक पर प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने गेटमैन पर अपना गुस्सा निकालते हुए उसे बिल्डिंग से नीचे फेंक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेडऩे के लिए हल्का सा लाठीचार्ज किया।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह समय एक-दूसरे पर गलत बयानबाजी करने व जिम्मेदारी थोपने का समय नहीं है। रेलवे की जांच से अलग मामले की मजिस्ट्रेटी जांच होगी। चार हफ्ते में इसकी जांच रिपोर्ट देनी होगी। देरी से आने पर कहा कि वह कल इजराइल जा रहे थे। उन्होंने तत्काल इजराइल दौरा रद्द किया और वह एयरपोर्ट से वापस लौटे हैं। उनकी गैर हाजरी में प्रशासन और चंडीगढ़ से उनकी पूरी टीम काम कर रही थी। सिद्धू ने हादसे को कुदरत का कहर कहने जाने के बारे में पूछे जाने पर कैप्टन ने कहा कि कुछ लोग सिद्धू के बयान का गलत मतलब निकाल रहे हैं। उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश न किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 शवों को छोड़कर सभी शवों की पहचान हो गई है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को पहले ही मदद की घोषणा कर दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे घटना की जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, मेरा यहां तुुरंत आना या नहीं आना से ज्यादा प्रभावित लोगों को तुरंत राहत देने का था। सरकार रेलवे से अलग इस हादसे की मजिस्ट्रेट जांच जिला कमिश्नर से करवाएगी। मजिस्ट्रेट हादसे की हर पहलू से जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच से पहले इस मामले में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।
(शेष पेज 8 पर)मरते-मरते कई को जिंदगी दे गया ‘रावणÓअमृतसर। रेल हादसे में मारे गए लोगों में रावण का रोल निभाने वाले दलबीर सिंह भी हैं, जो अपनी भूमिका खत्म कर घर लौट रहे थे, उन्हें क्या पता था कि उनकी मौत राम के बाणों से नहीं रावण के रूप में आ रही तेज रफ्तार ट्रेन से हो जाएगी। उन्हें अपने 8 महीने के बेटे से मिलने की जल्दी थी, मां और पत्नी भी उनका इंतजार कर रही थीं। ट्रैक के पास पहुंचने पर उन्होंने देखा कि लोग पुतला दहन देखने में मशगूल हैं और एक ट्रेन तेज रफ्तार से आ रही है, दलबीर आवाज देकर लोगों को हटाने में लग गए। उन्होंने कई को ट्रैक से हटा भी दिया लेकिन खुद ट्रेन की चपेट में आ गए।
घर पर पसरा मातम
दलबीर की मौत की खबर सुनते ही घर में मातम पसर गया, बूढ़ी मां और पत्नी को समझ में नहीं आ रहा है कि अब उनका गुजारा कैसे होगा, घर में रिश्तेदारों और सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है लेकिन 8 महीने के मासूम को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हुआ क्या है। लोग उसे पुचकार रहे हैं, दुलार रहे हैं और फिर आंखों में आंसू लिए यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इसके सिर से पिता का साया छीनने के जिम्मेदार कौन लोग हैं और उन्हें क्या सजा मिलेगी।
24 साल के थे दलबीर
दलबीर की उम्र 24 साल थी। 8 महीने पहले ही उनके बेटे का जन्म हुआ था। वह पत्नी, विधवा मां और बेटे के साथ रहते थे। इस बार वह मुहल्ले की रामलीला में रावण का अभिनय कर रहे थे। किसी को इसका इल्म नहीं था कि रावण वध के साथ ही उनके जीवन का भी अंत हो जाएगा।
मां ने सरकार से मांगी बहू के लिए नौकरी
दलबीर की मां ने सरकार से मांग की है कि उनकी बहू को नौकरी दी जाए, उन्होंने कहा कि उसकी गोद में 8 महीने का बच्चा है उसका लालन-पालन कैसे होगा, सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।’किस बात की जांच? हमारी गलती नहींÓनई दिल्ली। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने अमृतसर ट्रेन हादसे की किसी भी तरह की जांच से इनकार किया है। घटना में गेटमैन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि जिस जगह पर हादसा हुआ है, वह रेल फाटक से 300 मीटर दूर है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस घटना में रेलवे की कोई जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार का जिम्मा है और लोगों को रेलवे ट्रैक पर जमा नहीं होना चाहिए था, जबकि हादसे के वक्त लोग ट्रैक पर थे।’रफ्तार से ही चलती हैं ट्रेनेंÓ
मनोज सिन्हा ने कहा कि इस मामले में किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए, यह काफी दुखद घटना है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि रेलवे को इस कार्यक्रम की कोई सूचना नहीं है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या ड्राइवर ट्रेन की रफ्तार धीमी कर सकता था तो उन्होंने कहा कि पहले ही ड्राइवरों को बता दिया जाता है कि उन्हें ट्रेन की रफ्तार कहां कम करनी है। सिन्हा ने कहा कि घटना के वक्त सांझ हो चुकी थी और वहां की पटरी भी घुमावदार थी, ड्राइवर को आगे भी नहीं दिखाई पड़ रहा होगा। ट्रेन की रफ्तार के बारे में उन्होंने कहा कि ट्रेनें तो स्पीड से ही चलती हैं।
‘किस बात की इनक्वायरी ?Ó
इस मामले में पत्रकारों ने जब गेटमैन के खिलाफ कार्रवाई की बात पूछी तो उन्होंने कहा कि जिस जगह पर रावण का पुतला जलाया जा रहा था वहां से रेल फाटक 300 मीटर दूर है। इस मामले में जब रेल मंत्रालय की तरफ से जांच की बात पूछी गई तो मंत्री ने साफ-साफ कहा, किस बात की इनक्वायरी हम कराएं…। जब उनसे पूछा गया कि क्या ड्राइवर किसी भी तरह ट्रेन नहीं रोक सकता था। इस पर मंत्री ने कहा कि पटरी से 70 मीटर दूर कार्यक्रम हो रहा था, इसके अलावा वहां हलका मोड़ भी था, तो ड्राइवर को कैसे दिखाई देता? ‘ये हादसा नहीं जनसंहार है, इस्तीफा दें सिद्धूÓ
अमृतसर। अमृतसर ट्रेन हादसे को लेकर रार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और रेलवे ने एक-दूसरे के सिर आरोप मढऩा शुरू कर दिया है। इस बीच, शनिवार को घटनास्थल का दौरा करने के बाद शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने इस घटना को नरसंहार करार दिया। घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा तक मांगा है। बादल ने कहा कि यह लापरवाही अक्षम्य है। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह जनसंहार है। वहीं रेलवे ने इस घटना में अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया है। बादल ने कहा, सबसे बड़ी गलती रावण दहन के आयोजनकर्ताओं की है। उन्होंने बड़ी गलती की है। मैंने वह सीडी सुनी है जिसमें कार्यक्रम के दौरान डॉ. नवजोत कौर सिद्धू बोल रही हैं कि देखो रेलवे लाइन पर 5 हजार लोग खड़े हैं और उन पर से 500 गाडिय़ां गुजर जाए तो वे इसकी परवाह नहीं करते हैं। यह लापरवाही ही तो है।

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