Sunday , 25 August 2019
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ताज अरावली रिसोर्ट के अमरजोक नदी में बनाए 40 फीट रास्ते को देख यूआईटी ने कर दी भूमि की 90-ए

नगर संवाददाता . उदयपुर & शहर के पास बूझड़ा में अमरजोक नदी पेटे की जमीन पर मुंबई के मैसर्स ईशान क्लब एण्ड रिसोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के ताज अरावली रिसोर्ट के लिए बनाए 40 फीट रास्ते को आधार मान जमीन का नियमन कर देने का यूआईटी का बड़ा मामला उजागर हुआ है। इस रिसोर्ट की एक जमीन की हाल ही यूआईटी ने 90-ए (पुनर्ग्रहण की कार्रवाई) कर दी है जबकि इस कार्रवाई के लिए दो बार लगे आवेदन पूर्व सचिव रामनिवास मेहता ने वर्ष 2017 में यह कहकर खारिज कर दिया था कि रिसोर्ट तक जाने वाला रास्ता 40 फीट नहीं है और यह रास्ता अमरजोक नदी के पेटे की जमीन से जा रहा है, इस कारण भूमि की 90-ए की कार्रवाई नहीं की जा सकती है। मैसर्स ईशान क्लब के मुंबई में अंधेरी वेस्ट, लोखंडवाला काम्प्लेक्स निवासी निदेशक राजीव आनंद और उनकी पत्नी चारू आनंद ने निए नियमन के लिए यूआईटी को बार बार आवेदन किए थे। नए नियमन मामले में आपत्तियां होने पर यूआईटी ने 90-ए की कार्रवाई रिपोर्ट तथा रिसोर्ट की पूर्व में नियमित जमीन, दोनों को संयुक्त करने की कार्रवाई पर नगरीय विकास विभाग के संयुक्त शासन सचिव प्रथम को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांग लिया है। यूआईटी द्वारा हाल ही नियमित की गई जमीन पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि पूर्व में सचिव ने नदी में रास्ता होना बताकर आवेदन निरस्त कर दिए थे तो फिर अब यूआईटी ने बिना नया रास्ता उपलब्ध हुए पुराने रास्ते के ही आधार पर जमीन नियमित कैसे कर दी। पूर्व सचिव मेहता ने आवेदन खारिज करने के दौरान कहा था कि रिसोर्ट प्रबंधन नदी के खाते से बाहर की निरापद भूमि से मार्गधिकार प्राप्त करके फिर से प्लान पेश करे, तब जाकर नियमन की कार्रवाई हो सकेगी। लेकिन ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। कुछ महीने पहले पुराने रास्ते के आधार पर ही रिसोर्ट प्रबंधन ने तीसरी बार फाइल लगा दी और यूआईटी ने उसका हाल ही नियमन कर दिया।पूर्व सचिव मेहता ने नदी भूमि बता खारिज किया था आवेदन
ताज अरावली रिसोर्ट ने बूझड़ा गांव की आराजी संख्या 158/1, 159, 2311/160, 161 कुल किता 04 रकबा 2.0700 हैक्टेयर भूमि के नियमन की पहली बार फाइल लगने पर सचिव ने 11 अगस्त 2016 को सूचना पत्र भेजकर इस आराजी में रिसोर्ट तक पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं होने पर इसका आवेदन खारिज कर दिया था। लेकिन बाद में रिसोर्ट प्रबंधन ने संभागीय आयुक्त की अदालत में एक वाद दायर कर सेटलमेंट से पहले इस जमीन पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्शाए पुराने रास्ते का वाद जीतकर इसे राजस्व रिकॉर्ड में अंकन करवाकर जमीन का नियमन कराने की दूसरी बार फाइल लगाई। इस दूसरी बार किए आवेदन पर 14 जुलाई 2017 को पूर्व सचिव रामनिवास मेहता ने आदेश जारी कर फिर फाइल खारिज कर दी।नदी की जमीन पर रास्ते का नहीं कर सकते नियमनदूसरी बार आवेदन पर पूर्व सचिव मेहता ने अपने आदेश में कहा कि खसरा संख्या 106, 108, 198 पिछोला झील को भरने वाली बूझड़ा की अमरजोक नदी के सहारे बताकर रास्ता उपलब्ध होने का आवेदन में रिसोर्ट प्रबंधन ने उल्लेख किया है पर राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 16 और उच्च न्यायालय की जनहित याचिका अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान राज्य के पारित निर्णय के अनुसार नदी, नालों में अथवा उनके बहाव क्षेत्र में किसी प्रकार का अवरोध पैदा नहीं किया जा सकता है। जब तक नदी नहीं बहती है तो भूमि का उपयोग लोग आने-जाने का भी करते हैं। जल संसाधन विभाग से यूआईटी ने अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा तो विभाग ने 5 फरवरी 2016 को यूआईटी को दी रिपोर्ट में बताया कि आराजी नंबर 106, 198, 199 राजस्व रिकार्ड के अनुसार गैर मुमकिन नदी होकर नदी का भाग है। नदी का बहाव नहीं होने पर ग्रामीण इससे आते-जाते हैं। सचिव ने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट की जनहित याचिका आदेश के तहत नदी के बहाव क्षेत्र को बाधित नहीं किया जा सकता है। जबकि राजस्थान नगरीय क्षेत्र (कृषि भूमि का गैर-कृषिक प्रयोजन के लिए) आयोग की अनुज्ञा और आवंटन नियम 2002, नियम 3 के उप नियम 12 के अनुसार भी यह प्रतिबंधित है। इसलिए खसरा नंबर 106 अमरजोक नदी का होने से इसके पेटे में से विधिक, तकनीकी और सुरक्षा की दृष्टि से बारह मासी रास्ता देना संभव नहीं है। नदी के ऊपर बने पुल के पश्चिम में रिसोर्ट प्रबंधन अपनी जमीन तक आने जाने के लिए कम से कम 40 फीट चौड़ाई में पहुंच मार्ग नदी के खाते से बाहर की निरापद भूमि से प्राप्त कर फिर से आवेदन कर प्लान पेश करे। अपनी इस टिप्पणी के साथ ही मेहता ने दूसरी बार लगा आवेदन भी खारिज कर दिया था।

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