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डॉ. पालीवाल की नियुक्ति की वैधता को उच्च न्यायालय में चुनौती

एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पद पर नियुक्ति को क्वो वारंटो रिट से डॉ. जाखड़ ने दी चुनौती

उदयपुर। मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज के डीन डॉ. आनंद पालीवाल की एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर की नियुक्ति के खिलाफ डॉ. सुरेन्द्र कुमार जाखड़ ने राजस्थान उच्च न्यायालय में क्वो वारंटो रिट दायर की है। जिसमें न्यायालय ने नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
डॉ. जाखड़ की ओर से दायर की गई रिट में उन्होंने मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उदयपुर, मुख्य सचिव उच्च शिक्षा, रजिस्ट्रार सुखाडियाा विश्वविद्यालय व डॉ. आनंद पालीवाल को पक्ष बनाया है। इसमें बताया गया कि 2014 में डॉ. आनंद पालीवाल की एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति अवैध है क्योंकि 2012 की नियुक्ति 2010 के यूजीसी के नोटिफिकेशन के अनुसार हुई। इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम अध्यापन अनुभव अभ्यर्थी के शोध कार्यों को छोड़ कर कुल 8 वर्ष का पूर्ण होना अनिवार्य है। जबकि डॉ. आनंद पालीवाल के पीएचडी शोध कार्य को यूजीसी नियमानुसार अध्यापन अनुभव से हटा दिया जाए तो अनुभव कुल वांछित 8 वर्षों का नहीं हो रहा है और ना ही डॉ. आनंद पालीवाल प्रोफेसर के पद के लिए योग्य थे। क्योंकि उनका प्रोफेसर के पद के लिए आवश्यक 10 वर्ष का अध्यापन अनुभव भी पूरा नहीं था। इस रिट में डॉ. जाखड़ ने डॉ. आनंद पालीवाल की एसोसिएट प्रोफेसर तथा प्रोफेसर पद पर नियुक्ति की वैधता को न्यायालय में क्वो वारंटो रिट के माध्यम से चुनौती दी है।
न्यायालय ने पक्षों को नोटिस करते हुए जवाब-तलब किया है। डॉ. जाखड़ ने इस आधार पर क्वो वारंटो रिट की है कि 2018 में मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के विधि संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती में डॉ. आनंद पालीवाल डीन व फेकल्टी चेयरमैन की हैसियत से इंटरव्यू बोर्ड में बैठे तथा साक्षात्कार के लिए विषय विशेषज्ञों के पैनल बनाने वाली कमेटी के चेयरमैन भी डॉ. पालीवाल थे। जबकि डॉ. पालीवाल की एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर पद की वैधता का मामला पहले ही न्यायालय में रिट संख्या 5619/2014 में विचाराधीन है। डॉ. जाखड़ ने रिट में बताया कि डॉ. आनंद पालीवाल 8 व 10 वर्ष का अध्यापन अनुभव शोध कार्यों को छोड़कर पूर्ण नहीं कर रहे थे, इसके बावजूद भी उनकी नियुक्ति किया जाना अवैध थी। मौजूदा भर्ती प्रक्रिया के दौरान उन्हीं डॉ. पालीवाल को जिनकी योग्यता का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, उन्हें अहम पद पर भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना भी अवैध है। रिट में बताया गया कि इस प्रकार याचिकाकर्ता के मूल अधिकारों का हनन हुआ है क्योंकि एक अयोग्य व्यक्ति को चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया। डॉ. जाखड़ ने माननीय न्यायालय से रिट में मांग की है कि अयोग्य व्यक्ति को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए। डॉ. जाखड़ ने आरोप लगाया कि डॉ. आनंद पालीवाल की एसोसिएट व प्रोफेसर पद पर नियुक्ति यूजीसी व विवि के नियमों के प्रकाश में अवैध है। डॉ. जाखड़ ने रिट में उच्च न्यायालय से डॉ. आनंद पालीवाल की नियुक्ति को रद्द करने व अवैध करार देने की मांग की। उन्हें एसोसिएट तथा प्रोफेसर पद के लिए अयोग्य प्रत्याशी घोषित किया जाए।

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