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ट्रिपल तलाक पर कांग्रेस का यू-टर्न

कहा- ‘सत्ता में आए तो खत्म करेंगे कानून’
नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही सियासी वादों और ऐलानों का दौर भी शुरू हो चुका है। कांग्रेस पार्टी ने गुरूवार को ऐलान किया कि अगर वह सत्ता में आई तो तीन तलाक कानून को खत्म कर दिया जाएगा। यह कानून मोदी सरकार का एक और हथियार है, जिसका इस्तेमाल वे मुस्लिम पुरूषों को जेल में डालने के लिए और थानों में खड़े करने के लिए करते हैं। मुस्लिम महिलाओं ने इसका पुरजोर विरोध किया है और कांग्रेस भी इस कानून का विरोध करती है। यह महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं करेगा बल्कि उनके और मुस्लिम पुरूषों के बीच विभाजन पैदा करेगा।
ये बातें महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कही। वह दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। असम के सिल्चर से सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि सिटिजनशीप देने के नाम पर असम को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। हम ऐसे किसी भी कानून का समर्थन नहीं करते हैं, जो संविधान के खिलाफ है।
सम्मेलन को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह देश किसी एक जाति, धर्म, प्रदेश और भाषा का नहीं है। यह देश हिन्दुस्तान के हर एक व्यक्ति का है। हमारे अल्पसंख्यकों ने हर कदम पर देश को बनाने का काम किया है। यह देश हम सबका है। पांच साल पहले कहा जाता था कि नरेंद्र मोदी जी की 56 इंच की छाती है, (शेष पेज 8 पर)कांग्रेस मुख्यालय में पहली मीटिंगराहुल से 6 सीट दूर सिंधिया के पास बैठीं प्रियंकानई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस की रणनीति पर मंथन के लिए गुरूवार को दिल्ली स्थित मुख्यालय में एक बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के अलग-अलग प्रदेशों के चुनाव प्रभारियों समेत लगभग सभी बड़े दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। हाल ही में सक्रिय राजनीति की शुरूआत करने वाली पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने भी बैठक में हिस्सा लिया है। इस बैठक में उन पर खासा फोकस है।
राहुल से छह सीट दूर प्रियंका : बैठक में प्रियंका अपने भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से छह सीट दूर बैठी थीं। उनके साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बैठे थे। प्रियंका के राजनीति में आने को कांग्रेस के तमाम नेता लोकसभा चुनाव के लिहाज से तुरूप का इक्का मान रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका है जब प्रियंका को जिम्मेदारी मिलने के बाद वे राहुल के साथ किसी आधिकारिक बैठक में हिस्सा ले रही हैं। करीब 30 सालों से कभी-कभी सियासी मंचों पर दिख रहीं प्रियंका को पहली बार पार्टी में कोई पद मिला है।
(शेष पेज 8 पर)

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