जुलाई में 10 फीसद कम हुई मानसूनी बारिश

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नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि जुलाई में मानसूनी बारिश 10 फीसद कम हुई, लेकिन मौसम के शेष दो महीनों में मानसून के सामान्य रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि उत्तर और मध्य भारत के कुछ इलाकों में कम बारिश होने की वजह से जुलाई के महीने में बारिश 10 फीसद कम दर्ज हुई।
जून में सामान्य से 17 फीसद अधिक हुई थी बारिश
विभाग का पहले अनुमान था कि जुलाई में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की 103 फीसद बारिश होगी जो सामान्य की श्रेणी में आती है। जून में सामान्य से 17 फीसद अधिक बारिश हुई थी। अपने दीर्घावधि अनुमान में विभाग का कहना है कि अगस्त में दीर्घकालिक औसत की 97 फीसद बारिश होने की संभावना है। जबकि मौसम के शेष दो महीनों में कुल मिलाकर पूरे देश में दीर्घकालिक औसत की 104 फीसद बारिश होने की संभावना है।
पश्चिमोत्तर डिवीजन में 18 फीसद कम हुई बारिश
1961-2010 अवधि के लिए देश में दीर्घकालिक औसत बारिश 88 सेंटीमीटर है। दीर्घकालिक औसत की 96 से 104 फीसद बारिश सामान्य मानी जाती है। देश में आधिकारिक तौर पर मानसून का मौसम जून से सितंबर तक माना जाता है। मौसम विभाग के पश्चिमोत्तर डिवीजन में मानसूनी बारिश 18 फीसद कम रही। इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख आते हैं।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी कमी
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मानसूनी बारिश क्रमश: 49 और 61 फीसद कम रही। जबकि दिल्ली में 24 फीसद कम दर्ज की गई। मध्य भारत की डिवीजन में मानसूनी बारिश चार फीसद कम दर्ज की गई। इसमें गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और केंद्र शासित प्रदेश दादरा व नगर हवेली और दमन दीव आते हैं।
दक्षिणी प्रायद्वीप डिवीजन में अधिक बारिश
दक्षिणी प्रायद्वीप डिवीजन में सामान्य से 12 फीसद अधिक बारिश हुई। इस डिवीजन में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप व पुडुचेरी आते हैं। पूर्वी और पूर्वोत्तर डिवीजन में भी सामान्य से 12 फीसद अधिक बारिश दर्ज की गई। इस डिवीजन में बंगाल, बिहार, झारखंड, और पूर्वोत्तर राज्य आते हैं।


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