Tuesday , 18 December 2018
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जर्मन तकनीक से हृदय के सफल ऑपरेशन

गीतांजली हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जन ने किया सफल इलाज

उदयपुर। जर्मनी की नवीनतम लिपजिग तकनीक से मिनिमल इन्वेसिव कार्डियक सर्जरी यानि मात्र 2 इंच का चीरा लगा, कर दिए हृदय के दो बड़े ऑपरेशन सफल। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के कार्डियक थोरेसिक व वेसक्यूलर सर्जन डॉ संजय गांधी ने इसे दक्षिणी राजस्थान का प्रथम सफल ऑपरेशन बताया है। और कहा कि वर्तमान में इस तकनीक से विश्व के चुनिंदा चिकित्सा केंद्रों में ही हृदय के ऑपरेशन किए जा रहे है। इस लिहाज से गीतांजली हॉस्पिटल ने भी इनमें अपना नाम दर्ज किया है।

क्या था मामला?
डॉ गांधी ने बताया कि डूंगरपुर निवासी सुशीला देवी पांचाल (उम्र 42 वर्ष) के हृदय में छेद था। वहीं दूसरी रोगी सिरोही निवासी मफी देवी (उम्र 30 वर्ष) के वॉल्व में लीकेज की बीमारी थी। जिस कारण दोनों रोगियों को ओपन हार्ट सर्जरी की सलाह दी गई। परंतु दोनों का इलाज मिनिमल इन्वेसिव कार्डियक सर्जरी द्वारा किया गया।क्या था ऑपरेशन ?इस जर्मन तकनीक जिसे लिपजिग (स्म्प्चर््प्ळ) तकनीक कहते है, द्वारा इलाज हेतु ऑपरेशन से एक दिन पहले डॉ गांधी ने पूरी टीम जिनमें ओटी स्टाफ, ओटी टेक्निशियन्स एवं कार्डियक एनेस्थेटिस्ट शामिल है, के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया। क्योंकि इस प्रक्रिया की तकनीकी जटिलताओं के कारण योजना बनानी जरुरी है। इस ऑपरेशन में सीने के साइड में 2 इंच का एक छोटा चीरा लगाया गया। और ट्रांसईसोफेगल ईकोकार्डियोग्राफी मशीन की मदद से हृदय के अंदर कैनुला (ट्यूब) डाली गई जिससे रोगी को हार्ट-लंग मशीन पर लिया गया। इस ऑपरेशन में पहले रोगी के हृदय के छेद को बंद किया गया।

वहीं दूसरे रोगी के 2.7 सेंटीमीटर का वॉल्व प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रक्रिया में लगभग 4-6 घंटें का समय लगा।इस तकनीक से रोगी को क्या फायदे है?
डॉ गांधी ने बताया कि चूंकि इस नवीनतम तकनीक द्वारा अति सूक्ष्म चीरे से सर्जरी की जाती है जिससे रोगी बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाता है। यह चीरा बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता है। साथ ही पोस्ट ऑपरेटिव दर्द, रक्तस्त्राव एवं संक्रमण का खतरा भी काफी कम होता है। और छोटे चीरे के कारण रोगी जल्दी स्वस्थ हो पाता है। हॉस्पिटल में ज्यादा दिन तक भर्ती भी नहीं रहना पड़ता है। और रोगी अपने रोज के काम भी शीघ्र करना प्रारंभ देता है और आराम से चल-फिर पाता है। इस सर्जरी में बहुत कम टांके लिए जाते है जिससे कॉस्मेटिक लाभ भी होता है। रोगी मफी देवी का इलाज राजस्थान सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत नि:शुल्क हुआ।

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