Wednesday , 26 February 2020
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जंगल में यह शख्स 12 सालों से कार में ही काट रहा है वनवास

chandrshekhar_gauraचंद्रशेखर गौड़ा का सामना हाथियों से हुआ और तेंदुओं द्वारा तीन बार उनका पीछा किया गया। उनके पास एक पुरानी प्रीमियर पद्यमिनी (अपने पहले अवतार में फएिट) है लेकिन जब उन पर हमला हुआ तब वह कार के अंदर नहीं थे। हालांकि अब यह कार अपनी जगह से हिलती ही नहीं, यह अब उनका घर है। 43 साल के चंद्रशेखर गौड़ा पिछले 12 सालों से दक्षिण कर्नाटक के जंगल में अकेले रह रहे हैं। वे भूला दिए गए लेकिन उनकी याद तब आई जब जब एक कन्नड़ चैनल ने हाल ही में उन पर कहानी प्रसारित की जो कि वनवासी जीवन जी हाल ही में एक जीने के लिए बांस की टोकरियों बुनाई, एक जंग खा रही कार में रहता है, जो एक वनवासी की कहानी प्रसारित की जो कि जंग खा रही कार में रहते हैं और आजीवकिा के लिए बांस की टोकरी बुनते हैं। टेलीग्राफ के मुताबिक दक्षणि कन्नड़ जिले के मुख्यालय के मंगलौर के उपायुक्त ए.बी. इब्राहिम ने कहा यह एक आदमी की दुख भरी कहानी है जिसने खुद को सिस्टम से दूर कर लिया है और वह लडऩा नहीं चाहता।इसलिए जंगल में बना लिया घर
तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि गौड़ा को आज आधुनिक जीवन में वनवास पर जाना पड़ा। यह कहानी सालों पुरानी है। गौड़ा पेशे से ड्राइवर थे और 10वीं कक्षा तक पढ़ें हुए थे। उनका एक घर और बेंगलुरू से 320 किलोमीटर दूर दक्षिण कन्नड़ के एक शहर सुलिया में खेत था। 1999 में उन्होंने सुलिया में नेल्लोर केमराज को-ऑपरेटिव बैंक से दो लोन लिए थे लेकिन वह पैसा चुका नहीं पाए। अक्टूबर 2002 में बैंक ने राश िकी वसूल के लिए उनका घर और 2.29 एकड़ जमीन नीलाम कर दी लेकिन 50,400 रूपए बकाया रहे। 21 जून, 2003 को बैंक पुलिस की मदद से उनकी संपत्त िसे गौड़ा को बेदखल कर दिया। गौड़ा कुंवारे थे और कुछ समय के लिए अपनी बहन के घर में शिफ्ट हो गए। उसके बाद उन्होंने जितनी भी बचत की थी उससे एक पुरानी कार खरीदी और पश्चिम घाट के जंगल में चले गए। जंगल के अंदर एक जगह मिली जहां पर पास में एक आदिवासी बस्ती थी। उन्होंने वहां कार पार्क की और वहीं बस गए। उपायुक्त इब्राहिम ने कहा कि गौड़ा इसी तरीके से 12 साल से ज्यादा समय तक रहें। वे अपना जंगल में यह घर तभी छोड़ते हैं जब उसने सुलिया शहर में अपने हाथ से बनाई प्रत्येक बांस की टोकरियों को 40 रूपए में बेचना होता है। यह काम वह लगभग हर सप्ताह करते हैं। शहर पहुंचने के लिए वह पहले 10 किलोमीटर पहले पैदल चलते हैं, बस पकड़ते हैं और फरि 11 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। उनके मुताबिक गौड़ा का इसके अलावा किसी से संपर्क नहीं है।अधकिारियों की एक न सुनी
इब्राहिम ने अपने राजस्व विभाग के अधिकारियों की टीम को गौड़ा से मिलने भेजा और उन्हें शहर वापस लौटने के लिए समझाने की कोशिश की। लेकिन गौड़ा ने इनकार कर दिया। गौड़ा के बारे में पुलिस को एक प्राइवेट चैनल के रिपोर्टर से पता चला था। इब्राहिम के मुताबिक गौड़ा की कार भले ही जंग खा रही हो लेकिन उसके कार के दस्तावेज सलामत हैं जिसमें गाड़ी का इंश्योरेंस कवर, रोड टैक्स और यहां तक कि ड्राइविंग लाइसेंस भी शामिल है। मिलने पर गौड़ा ने बताया था कि जंगल में तेंदुओं ने तीन बार उनका पीछा किया और वह अकसर जंगली हाथयिों का सामना करता है। इब्राहिम ने गौड़ा को मनोचिकित्सा के लिए वेनलॉक डिस्ट्रीक्ट हॉस्पिटल भी भेजा था लेकिन उसने वह अपने जंगल में वापस आ गया। उनसे जब पूछा गया कि क्या वह सिस्टम से नाराज है तो उन्होंने कहा हां। अभी तो गौड़ा अपनी जंगल के इस घर में चला गया है और पद्यमिनी में ही रह रहा है।

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