Friday , 18 October 2019
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चंद्रयान के सफल प्रक्षेपण पर भावुक हुए इसरो चीफ

रूंधे गले से कहा- 7 दिन से घर नहीं गई टीम
नई दिल्ली (एजेंसी)। इसरो अध्यक्ष डॉ. के. सिवन ने चंद्रयान 2 के सफल प्रक्षेपण पर संबंधित सभी टीमों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि विज्ञान एवं तकनीक के लिहाज से भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। लॉन्चिंग की सफलता से गदगद इसरो चीफ ने रूंधे गले से सभी टीमों की प्रशंसा की और कहा, आपने जिस तरह अपना घर-बार छोड़कर, अपने हित-अहित को नजरअंदाज कर रात-दिन एक कर दिया, उसके लिए मैं आपको दिल से सलाम करता हूं। उन्होंने कहा, आप पिछले सात दिनों से अपने परिवारों को भूलकर, अपने हितों का त्याग कर लगे हुए थे और स्नैग को पूरी तरह ठीक कर दिया।
‘बहुत जल्दी सुधारी तकनीकी खामीÓ
इसरो चीफ ने टीम का इसलिए विशेष आभार जताया क्योंकि लॉन्चिंग की पहली तय तारीख 15 जुलाई को प्रक्षेपण के आखिरी घंटे में आई तकनीकी खामी को महज 5 दिनों में सुलझा लिया गया। डॉ. सिवन ने कहा, पता नहीं अचानक चंद्रयान में तकनीकी खामी कैसे आ गई। लेकिन, इतने विशाल कार्य को इतना जल्दी पूरा कर देने में टीम इसरो ने जो जज्बा दिखाया, उसे सलाम करता हूं। उन्होंने इसरो के इंजिनियरों, टेक्निशियनों, टेक्निकल स्टाफ समेत तमाम टीमों का अभिवादन किया और शुक्रिया कहा। हालांकि, यह भी कहा कि अभी काम खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, हमारा काम पूरा नहीं हुआ है। हमें मिशन टीम को चंद्रयान 2 मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव की ओर लाने में मेहनत करनी होगी।
’15’ बढ़ी जीएसएलवी मार्क 3 की प्रदर्शन क्षमताÓ
इसरो प्रमुख ने एक बड़ी जानकारी दी कि चंद्रयान 2 को प्रक्षेपित करने वाले जीएसएलवी मार्क 3 की प्रदर्शन क्षमता पहले के मुकाबले 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दी गई है। उन्होंने इसके लिए भी टीम इसरो का धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान जैसी तकनीक भारत में पहली बार डिवेलप की गई। उन्होंने कहा, सैटलाइट टीम को मुबारक कि उन्होंने सही वक्त पर लॉन्च पैड पर ला दिया। उन्होंने कहा कि अब करीब डेढ़ महीने बाद वह 15 मिनट बहुत महत्वपूर्ण होगा जब लैंडर विक्रम चांद की सतह पर उतरेगा।
‘भारत ही नहीं, विज्ञान के लिए बड़ा दिनÓ
इसरो चीफ ने कहा कि आज का दिन न केवल इसरो, न केवल भारत बल्कि विज्ञान और तकनीकी के लिहाज से भी गौरवपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विशेष तकनीकी क्षेत्र में भारत का झंडा आगे भी बुलंद रखना है और इसे और नई ऊंचाई पर पहुंचाना है।

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