Thursday , 18 October 2018
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गौरव यात्रा के साथ सरकारी कार्यक्रमों पर लगाई रोक

जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को झटका देते हुये मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा के साथ किसी भी प्रकार के सरकारी कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति जी आर मूलचंदानी ने बुधवार को यह फैसला देते हुये गौरव यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के सरकारी कार्यक्रम पर पाबंदी लगा दी है।
न्यायालय ने अधिवक्ता विभूति भूषण शर्मा और सवाई ङ्क्षसह द्वारा गौरव यात्रा के दौरान सरकारी धन के दुरूपयोग और कार्यक्रमों की आड़ में सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी लगाने तथा सरकारी कर्मचारियों को लगाने पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया।
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदाजोग और जी आर मूलचंदानी की खंडपीठ ने पहले ही सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिकाकर्ताओं ने यात्रा के दौरान सरकारी धन के दुरूपयोग का आरोप लगाते हुये कहा था कि मामला न्यायालय में आने के बावजूद सरकारी धन का दुरूपयोग जारी है। अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी के नाम पर सरकारी कर्मचारियों को लगाया जा रहा है।
याचिकाकर्ता सवाईङ्क्षसह की ओर से अधिवक्ता जी एस बापना ने कहा कि गौरव यात्रा के दौरान जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की ड्युटी मुख्यमंत्री की आमसभा को कवरेज करने के लिये लगायी जा रही है।मुख्यमंत्री की यात्रा का मुद्दा सदन में उठा
जयपुर। चौदहवीं विधानसभा के आखरी सत्र के पहले दिन ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा का मुद्दा छाया रहा ।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने खड़े होकर मुख्यमंत्री की गौरव यात्रा का विरोध करना शुरू कर दिया। बेनीवाल के गौरव यात्रा का जिक्र करते ही संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड और सरकारी सचेतक मदन राठौड सहित कई सदस्यों ने इसका विरोध किया।
इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने बेनीवाल को शांति बनाये रखने और बैठने के निर्देश दिये। मेघवाल ने कहा कि आज सदन का पहला दिन है और वह किसी सदस्य के खिलाफ कोई कार्यवाही करना नहीं चाहते । उन्होंने बेनीवाल की टिप्पणियों को कार्यवाही में अंकित नहीं करने के भी निर्देश दिये। मेघवाल द्वारा लगातार बैठने के निर्देश देने के बाद बेनीवाल सीट पर बैठ गये और उसके बाद सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चली।

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