Friday , 19 October 2018
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‘गिरफ्तारी राजनीतिक असहमति नहीं’

  • शहरी नक्सलियों को तगड़ा झटका
  • सुप्रीम कोर्ट ने नजरबंदी बरकरार रखी, एसआईटी से किया इंकार
  • ‘आरोपी नहीं चुनेंगे, कौन जांच करे’

सुप्रीम कोर्ट ने 2-1 के बहुमत से दिए फैसले में ऐक्टिविस्ट्स की इस दलील को खारिज किया कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक असहमतियों की वजह से की गई थी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ ही जस्टिस खानविलकर ने कहा कि ये गिरफ्तारियां राजनीतिक असहमति की वजह से नहीं हुई हैं, बल्कि पहली नजर में ऐसे साक्ष्य हैं जिनसे प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के साथ उनके संबंधों का पता चलता है।

नई दिल्ली भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में नक्सल कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तारी और फिर नजरबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए ऐक्टिविस्ट् को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ये गिरफ्तारियां राजनीतिक असहमति की वजह से नहीं हुई हैं। कोर्ट ने एसआईटी जांच की मांग खारिज करते हुए ऐक्टिविस्ट्स की हिरासत 4 हफ्ते और बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पुणे पुलिस को आगे जांच जारी रखने को भी कहा है।
बता दें कि पांच ऐक्टविस्ट्स वरवरा राव, अरूण फरेरा, वरनान गोन्साल्विज, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को पहले गिरफ्तार और फिर नजरबंद रखा गया है। अब इनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। इन ऐक्टिविस्ट्स की तत्काल रिहाई और उनकी गिरफ्तारी मामले में एसआईटी जांच की मांग के लिए इतिहासकार रोमिला थापर एवं अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

ट्रायल कोर्ट जाने का विकल्प जस्टिस खानविलकर ने कहा कि आरोपी को यह चुनने का अधिकार नहीं है कि मामले की जांच कौन सी जांच एजेंसी करे। उन्होंने एसआईटी से साफ इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार किए गए ऐक्टिविस्ट चाहें तो राहत के लिए ट्रायल कोर्ट जा सकते हैं। इससे पहले ऐक्टिविस्ट्स की तरफ से दाखिल अर्जी में इस मामले को मनगढ़ंत बताते हुए एसआईटी जांच की मांग की गई थी।
इस मामले में जानी-मानी इतिहासकार रोमिला थापर और कुछ अन्य लोगों ने इनकी रिहाई के लिए याचिका दायर की थी। बता दें कि 20 सितंबर को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल 31 दिसंबर को ‘एल्गार परिषदÓ के सम्मेलन के बाद राज्य के भीमा-कोरेगांव में हिंसा की घटना के बाद दर्ज एक एफआईआर के संबंध में महाराष्ट्र पुलिस ने इन्हें 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। शाह ने राहुल के अंदाज में ही किया पलटवार’मूर्खता के लिए एक जगह है कांग्रेसÓनई दिल्ली। भीमा-कोरेगांव हिंसा से जुड़े 5 वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा है कि अब वक्त आ गया है कि वह शहरी नक्सली मामले पर अपना रूख साफ करे।
शाह ने एक महीने पहले राहुल गांधी के ट्वीट को उन्हीं के अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि मूर्खता की एकमात्र जगह है जिसे कांग्रेस कहते हैं। उसने भारत के ‘टुकड़े टुकड़े गैंगÓ, माओवादियों, नकली कार्यकर्ताओं और भ्रष्ट लोगों का समर्थन किया। देश की शीर्ष अदालत का फैसला आते ही भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, जिन लोगों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व को राजनीतिकरण करते हुए कमतर करने की कोशिश की, सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले से वो पर्दाफाश हो गए हैं। यह सही समय है कि कांग्रेस को शहरी नक्सलवाद मामले पर अपना रूख साफ करना चाहिए।
कोर्ट के फैसले के बाद शाह ने ताबड़तोड़ 3 ट्वीट किए। अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत लोकतंत्र बहस की स्वस्थ परंपरा, चर्चा और असहमति जताने के कारण है। हालांकि देश के खिलाफ साजिश करना और अपने नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की भावना इसमें शामिल नहीं है। (शेष पेज 8 पर)

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