Tuesday , 18 September 2018
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खनन व्यापारी जीएसटी वसूली पर लाए स्टे

  • अप्रधान खनिजों पर रॉयल्टी कलेक्शन पर भी ले रहे 18 प्रतिशत जीएसटी
  • लीज होल्डर्स ने अदालत में किया विरोध, बोले-ठेके से हटाएं जीएसटी की दोहरी वसूली

उदयपुर। प्रदेश के खनन उद्योग पर जीएसटी की पड़ रही दोहरी मार से बचने के लिए अप्रधान खनिज के माइंस ऑनर्स अब हाईकोर्ट से जीएसटी वसूली पर स्टे ला रहे हैं। अब तक कई मामलों में स्टे आ चुका है। इससे घबराई सरकार ने भी जीएसटी कौंसिल की बैठक में हुए निर्णय की अनुपालना के लिए उच्च स्तर की बैठक बुलाकर विचार किया है।
अप्रधान खनिज की खदानों से निकलने वाले उत्पादन पर पहले ही लीज होल्डर्स जीएसटी चुका रहे हैं। यह उत्पादन ईआरसीसी रॉयल्टी कलेक्शन के तहत दुबारा जीएसटी चुकाने पर ही छोड़ा जाता है। इस तरह दो बार जीएसटी चुकाने से उत्पादन काफी महंगा भी हो चला है। खनन उद्योग पर इस दोहरी मार से माइंसे चला पाना कठिन हो रहा है। खान निदेशालय सूत्रों के अनुसार अब तक एक दर्जन से अधिक मामलों में लीज होल्डर्स हाईकोर्ट की शरण जा चुके हैं। यह सिलसिला बढ़ता जा रहा है। लगातार स्टे के नए मामले मिलने से वित्त विभाग ने भी इस पर विचार के लिए तीन दिन पूर्व बैठक बुलाई।प्रदेश में हजारों खदानें हैं
प्रदेश में अप्रधान खनिजों की हजारों खदानें हैं। कुल 34 हजार खदानों में अधिकांश हिस्सा अप्रधान खनिज की खदानों का है। इनमें छोटी से लेकर बड़ी खदानें शामिल हैं।जीएसटी हम देंगे, ईआरसीसी से हटाओ
लीज होल्डर्स पहले ही सरकार को यह प्रस्ताव दे चुके थे कि वे उत्पादन खनन पर रॉयल्टी का 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाने के लिए तैयार हैं लेकिन रॉयल्टी कलेक्शन से यह जीएसटी वसूली हटाई जाए। यह प्रस्ताव सरकार ने भेजा तो जीएसटी कौंसिल के भी नए निर्णय हुए, जिसमें ईआरसीसी से जीएसटी वसूली हटाने पर सहमति बनी। अब इस निर्णय की पालना किस तरह की जाए, इस पर विचार के लिए हाल ही उच्चस्तरीय बैठक की जा चुकी है।

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