कोरोना वैक्सीन की रेस में सबसे आगे ये तीन नाम

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नई दिल्ली (एजेंसी)। कोविड-19 की वैक्सीन बनाने के लिए दर्जनों देशों के बीच रेस लगी है। 160 से भी ज्यादा वैक्सीन का डेवलपमेंट हुआ है जिनमें से 141 प्री-क्लिनिकल स्टेज में हैं। दुनियाभर में सिर्फ तीन वैक्सीन कैंडिडेट्स ऐसे हैं जो फेज 3 ट्रायल में हैं। ये हैं- ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी-अस्त्राजेनेका, मॉडर्ना इंक और साइनोफार्म की डेवलप की हुई वैक्सीन। फिलहाल इन सभी का बड़े पैमाने पर इंसानों पर ट्रायल जारी है। कुल मिलाकर 24 कोविड-19 वैक्सीन ऐसी हैं जिनका क्लिनिकल ट्रायल हो रहा है। एक बार यह ट्रायल पूरा हो जाए तो फिर कंपनियां रेगुलेटर से अप्रूवल लेकर वैक्सीन मैनुफैक्चरिंग शुरू कर सकती हैं।
1. ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी-अस्त्राजेनेका वैक्सीन
ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी अस्त्राजेनेका ने यह वैक्सीन डेवलप की है। इसे ‘कोविशील्डÓ नाम दिया गया है।
क्या सफलता : ‘नेचरÓ जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, बंदरों पर यह वैक्सीन पूरी तरह असरदार साबित हुई। उनमें कोविड-19 के प्रति इम्यूनिटी डेवलप हुई।
आगे का रास्ता क्या : इंसानों पर फेज 1 और 2 ट्रायल पूरा हो चुका है। भारत, ब्राजील समेत दुनिया के कई देशों में फेज 3 ट्रायल जारी है।
कब तक आएगी : नवंबर तक ट्रायल पूरा होने की उम्मीद है। नतीजे अच्छे रहे तो रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद वैक्सीन का लार्ज-स्केल प्रॉडक्शन शुरू होने में अगले साल की शुरूआत तक का वक्त लग सकता है।
किसने कर दी है बुक : दुनियाभर के देशों ने ऑक्सफर्ड की वैक्सीन खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। यूनाइटेड किंगडम ने 100 मिलियन डोज की डील की है। ब्राजील सरकार ने भी 127 मिलियन डॉलर में 30 मिलियन डोज खरीदने का सौदा किया है। यूरोपियन यूनियन के कई देश अभी सौदेबाजी की प्रक्रिया में हैं।
दाम : भारत में इस वैक्सीन को बना रही सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ आदर पूनावाला के मुताबिक, वैक्सीन की लागत 1,000 रूपये से कम रह सकती है। ऑक्सफर्ड ने कहा है कि यूके में यह वैक्सीन कम दाम में मिलेगी।
2. मॉडर्ना की वैक्सीन
इस अमेरिकन कंपनी की वैक्सीन मैसेंजर आरएनए तकनीक पर आधारित है।
क्या सफलता : बंदरों पर मॉडर्ना की वैक्सीन के नतीजे बेहद शानदार रहे हैं। एक ताकतवर इम्यून सिस्टम तो डेवलप हुआ ही, बंदरों के फेफड़ों और नाक में वायरस को रेप्लिकेट होने से भी रोका जा सका।
आगे का रास्ता क्या : वैक्सीन की सबसे बड़ी परीक्षा चल रही है। 87 जगहों पर 30 हजार लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो चुका है।
कब तक आएगी : साइंटिस्ट्स के मुताबिक, सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल की शुरूआत तक।
किसने कर दी है बुक : अमेरिकी सरकार ने करीब 500 मिलियन डॉलर की डील की है। मॉडर्ना ने स्पेन की लैब के अलावा स्विस फार्मा कंपनी से भी टाईअप किया है। इजरायल की सरकार ने भी मॉडर्ना की वैक्सीन में दिलचस्पी दिखाई है। दोनों के बीच डील हो चुकी है।
दाम : मॉडर्ना ने 50 से 60 डॉलर के बीच वैक्सीन के दाम तय करने की सोची है। यानी 3,700 से 4,500 रूपये के बीच। लेकिन यह कीमत केवल अमेरिका और अन्य हाई इनकम वाले देशों के लिए है। विकासशील देशों में वैक्सीन सस्ते में मिल सकती है।
3. साइनोफार्म (चीन)
चीन वैक्सीन डेवलपमेंट की रेस में लगभग हर जगह मौजूद है। चाइना नैशनल फार्मास्यूटिकल ग्रुप यानी साइनोफार्म की वैक्सीन ट्रायल के ऐडवांस्ड स्टेज में है।
क्या सफलता : 2,000 से ज्यादा लोगों पर टेस्ट में वैक्सीन के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा चीन ने किया है।
आगे का रास्ता क्या : ब्राजील और यूएई में बड़ा ट्रायल चल रहा है। चीन के सरकारी अस्पतालों में इसका इंजेक्शन मुफ्त में दिया जा रहा है जो कोई भी इच्छानुसार लगवा सकता है।
कब तक आएगी : प्रॉडक्शन शुरू हो चुका है। चीन को पूरा भरोसा है कि फाइनल ट्रायल में भी वैक्सीन सफल रहेगी।
किसने कर दी है बुक : अमेरिकी कंपनी मर्क के साथ वैक्सीन की डोज बनाने की डील हुई है। वैक्सीन खरीदने में खाड़ी समेत लैटिन अमेरिका के कई देश रूचि ले रहे हैं।
दाम : चीन की तरफ से इसे लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है।


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