Thursday , 17 January 2019
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कर्ज माफी की पहली 1300 करोड़ की मार खनन पर

खान विभाग बोला कहां से लाएंगे इतनी रेवेन्यू

राजस्थान में बजरी पर प्रतिबंध
नोटबंदी के बाद बाजार ठण्डापहले टार्गेट 5800 करोड़, फिर 200 करोड़ और बढ़ाए20 दिन पूर्व खान विभाग को नई गहलोत सरकार ने 5800 करोड़ रुपए का नए वित्तीय वर्ष का टार्गेट दिया लेकिन मंत्री की बैठक के दौरान इसे 200 करोड़ रुपए और बढ़ाकर 6 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक कर दिया गया।
इस अप्रत्याशित रूप से बढ़ाए टार्गेट से अफसरों की नींदें उड़ गई हैं।हिंदुस्तान जिंक बढ़ा सकता
है 100 करोड़ का टार्गेटइस वर्ष हिंदुस्तान जिंक ने अपने टार्गेट पार्ट में सरकार को 2500 करोड़ रुपए का राजस्व देने की योजना बनाई थी लेकिन नए टार्गेट के बाद बताया जा रहा है कि वह 100 करोड़ रुपए और यानि केवल 2600 करोड़ रुपए का राजस्व ही चुकाने का वादा कर रहा है। इतनी बड़ी कंपनी से भी महज 100 करोड़ रुपए बढऩे और बचा टार्गेट अन्य कहां से पूरा किया जाए, इस उधेड़बुन का रास्ता खोजने में विभाग चिंतित है।900 से 1 हजार करोड़ माइनर सेअप्रधान खनिजों पर राज्य सरकार का सीधा हक होने से मंत्रालय और विभाग का मानना है कि वह प्रति वर्ष अप्रधान खनिजों की खदानों से 900 से 1 हजार करोड़ रुपए तक का राजस्व अर्जन करता है लेकिन इसमें भी टार्गेट बढ़ाया जाए तो कितना। इसका जवाब नहीं मिल पा रहा है। जबकि प्रधान खनिजों में केन्द्रीय कानूनों और नियमों के तहत खदानें नीलाम करनी होती हैं। शेष बचा राजस्व सीमेंट सेक्टर से मिल पाता है। इसका भी ठोस एक्शन प्लान बनाने की सोची जा रही है।नगर संवाददाता & उदयपुर
किसानों का 18 हजार करोड़ रुपए का कर्जा माफ करने का दाव लगाकर सत्ता में आई अशोक गहलोत सरकार अब कई दिनों से इस कर्जे का पैसा विभागों की कमाई से निकालने की माथापच्ची में फंसी हुई है। राज्य के वित्त विभाग ने विभागों में इस कर्जा माफी के पैसे को निकालने का टार्गेट बांट दिया है। इसकी पहली मार प्रदेश के खनन विभाग पर पड़ी है। सरकार ने एक झटके में नए वित्तीय वर्ष के लिए विभाग का टार्गेट 1300 करोड़ रूपए से बढ़ा दिया गया है।
इस टार्गेट से प्रदेश के अफसर बगले झांकते नजर आ रहे हैं और इसी उधेड़बुन में हैं कि आखिर यह पहाड़ जैसा टार्गेट प्रदेश में खनन के व्याप्त विपरीत हालात में कैसे पूरा करेंगे। इस मसले पर खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने जयपुर में आला अधिकारियों की बैठक ली और सीधे 1300 करोड़ रुपए का टार्गेट बढ़ाकर थमा दिया।खान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 4700 करोड़ रुपए का टार्गेट राजस्व अर्जन का रखा था। जबकि इस वर्ष बजरी खनन पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट से प्रतिबंधित रहा। बजरी खनन के पेटे होने वाली 250 करोड़ रुपए की आय भी इस बार सरकार को नहीं हो सकी। यही नहीं बजरी अवैध खनन के पेटे पूरी ताकत लगाकर पेनल्टी भी वसूल ली जाए तो माना जा रहा है कि 25 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं बढ़ पाएगी। पर इस बड़ी कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में फोर्स और स्टाफ भी चाहिए जो विभाग के पास है ही नहीं।

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