Tuesday , 18 June 2019
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कच्चे फैल्सपार की परिवहन रोक के खिलाफ जयपुर-जोधपुर हाईकोर्ट में 13 याचिकाएं दायर

लोकसभा चुनाव देखते हुए सरकार ने 15 दिन पहले लगाई थी रोक
बढऩे लगे विवाद
प्रदेश के खान मालिकों को रास नहीं आया आदेश
सरकार ने दायर की कैविएट
नगर संवाददाता . उदयपुर। 15 दिन पहले राज्य सरकार की क्वाट्र्स-फैल्सपार मिनरल के कच्चे माल के प्रदेश से बाहर परिवहन पर लगाई रोक अब खान मालिकों को रास नहीं आई है। सरकार ने एक तरफ यह निर्णय कर कई लघु उद्योगों को फायदा देने की रणनीति बनाई थी लेकिन इससे उल्टे खान मालिकों को भारी नुकसान होने लगा है। इस आदेश को निरस्त कराने के लिए प्रदेश के जयपुर और जोधपुर रीजन के खान मालिकों ने हाईकोर्ट में 13 याचिकाएं दायर कर दी हैं।
गहलोत सरकार ने अपने इस निर्णय को प्रदेश की बड़ी सौगात बताते हुए वाहवाही तो लूटी लेकिन खान मालिकों को होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इसका इस नीति में कोई स्थान नहीं है। गुजरात के टाइल्स उद्योग में फैल्सपार के साथ निकलने वाले सोडा का कच्चा उत्पादन भी जाता था। वहां सोडा पांच से छह प्रतिशत कच्चे माल में उपलब्ध होने पर उसे गुजरात की उच्च तकनीक आधारित प्लांट में अलग कर उसे बाजार में बेच दिया जाता था। लेकिन सरकार के नए आदेश के बाद फैल्सपार को दानों, चिप्स और गिट्टी के रूप में प्रदेश से बाहर परिवहन नहीं किया जा सकता है। सरकार ने यह प्रतिबंध 4 अक्टूबर 2021 तक के लिए जारी किया है। खदान मालिकों की पीड़ा है कि अब यदि सोडा को भी पीसकर गुजरात भेजा जाएगा तो वहां उसके दाम ही नहीं मिलते हैं और उसे व्यापारी खरीदते भी नहीं हैं। जबकि स्थानीय बॉलमिलों में इसे व्यापारी वेस्ट मैटेरियल की हैसियत से लेकर औने-पौने दामों पर खरीदते हैं। दोनों ही सूरत में खान मालिकों को कम प्रतिशत वाले सोडा माल का भारी नुकसान होने लगा है। इस वजह से खदानों पर इस सोडा कच्चे उत्पादन का ढेर भी लगने लगा है। यह परेशानी उपजने पर जयपुर और जोधपुर रेंज के खान मालिकों ने हाईकोर्ट में सरकार के आदेश को खारिज कराने के लिए अलग-अलग 13 याचिकाएं दायर कर दी हैं। इस दिशा में राजसमंद के खान मालिक भी हाईकोर्ट जाने का मानस बना रहे हैं।कांग्रेस नेताओं से नहीं मिली राहत
सरकारी आदेश से पीडि़त खदान मालिकों का दल विधानसभा अध्यक्ष डा. सीपी जोशी से भी मिला और इस आदेश को हटवाने की गुहार की लेकिन इन खदान संचालकों को कोई राहत नहीं मिल सकी है। जबकि खान विभाग को भी इस आदेश को निरस्त करने की इन खदान संचालकों ने मांग रख दी है पर उनकी वहां भी सुनवाई नहीं हो रही है।
जयपुर और जोधपुर हाईकोर्ट में लगी कैविएट
सरकार ने इस आदेश के बाद फटाफट जयपुर और जोधपुर हाईकोर्ट में विभाग के अधिकारियों को केस का प्रभारी नियुक्त कर कैविएट दायर करवा दी है ताकि कोई अन्य व्यक्ति या खदान मालिक आदि प्रभावित पक्ष हाईकोर्ट से सरकार के आदेश के खिलाफ स्टे न ले आए। कांग्रेस सरकार लोकसभा चुनाव में अपने इस निर्णय पर कोई विवाद नहीं चाहती है। यही कारण है कि कैविएट की हाईकोर्ट से सार्वजनिक सूचनाएं प्रकाशित होते ही खदान मालिकों में सक्रियता और बढ़ गई।यह आदेश बना विवाद : खान विभाग (जीआर द्वितीय) में सरकार के संयुक्त सचिव डा. बीडी कुमावत ने 10 मार्च को आदेश जारी कर कहा था कि राजस्थान माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स 2017 के तहत राज्य सरकार प्रदेश के लघु और घरेलू उद्योगों को संरक्षित रखने के लिए व्यापक जनहित में फैल्सपार को दानों, चिप्स और गिट्टी के रूप में प्रदेश से बाहर परिवहन नहीं करने का निर्णय करती है। यह प्रतिबंध 4 अक्टूबर 2021 तक के लिए प्रभावी रहेगा। इस आदेश के बाद खनन स्तर पर विवाद उपजा और मामले हाईकोर्ट तक पहुंचे।कई जिलों में पड़ा असर
सरकार के उपरोक्त निर्णय से खदानों पर सोडा का वेस्ट मटेरियल एकत्र होने, बाजार में माल का उठाव नहीं होने का नुकसान कई जिलों में होने लगा है। खास तौर पर राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर, नागौर, जयपुर, जोधपुर बेल्ट में व्यापारी परेशान हो गए हैं। लेकिन इनकी परेशानी का गहलोत सरकार ने उचित हल नहीं निकाला है।

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