Tuesday , 18 June 2019
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आलोक वर्मा सीबीआई डायरेक्टर बहाल

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बांधे हाथ
नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर को बहाल कर दिया है, लेकिन साथ ही कहा है कि वह कोई नीतिगत फैसला तब तक नहीं ले सकेंगे, जब तक कि उनके मामले पर कमिटी फैसला नहीं ले लेती। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का फैसला किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि आलोक वर्मा कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेंगे और उनके मामले में कमिटी फैसला लेगी। कमिटी नए सिरे से आलोक वर्मा के केस को देखेगी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि प्र.म., चीफ जस्टिस और विरोधी दल के नेता वाली हाई पावर कमिटी आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करेगी। जब तक कमिटी फैसला नहीं लेती तब तक सीबीआई डायरेक्टर कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर मंगलवार को फैसला सुनाया, जिसमें सीबीआई डायरेक्टर ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को मामले की सुनवाई के बाद इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा के अलावा एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से अर्जी दाखिल कर मामले की एसआईटी जांच की मांग की थी। साथ ही सरकार द्वारा छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया था जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीवीसी से जवाब दाखिल करने को कहा था।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि हम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह सरकार के लिए सबक है। आज आप कुछ लोगों पर दबाव बनाने के लिए इन एजेंसियों का इस्तेमाल करते हैं, कल कोई और करेगा, ऐसे में लोकतंत्र का क्या होगा?
वहीं वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इसे संतुलित फैसला करार दिया। सरकार ने यह फैसला सीवीसी की सिफारिश पर एक संस्था के तौर पर सीबीआई की साख बचाने के लिए लिया था। कोर्ट के फैसले को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा, एक संस्था के तौर पर सीबीआई की साख बरकरार रहे और दो अधिकारी जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं उनकी निष्पक्ष जांच हो इसके लिए दोनों ही अधिकारियों को छुट्टी पर भेजा गया। सीबीआई में भ्रष्टाचार की घटनाओं पर जांच का अधिकार सीवीसी का होता है।

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