Friday , 19 October 2018
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‘आधार’ को संवैधानिक मान्यता

इसने गरीबों को पहचान और ताकत दी : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है लेकिन बैंकखाता खोलने, मोबाइल सिम लेने तथा स्कूलों में नामांकन के लिए इसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी है।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए के सिकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की संविधान पीठ ने बुधवार को बहुमत के फैसले में आधार कानून को वैध ठहराया लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति सिकरी ने अपनी, मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायमूर्ति खानविलकर की ओर से बहुमत का फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि निजी कंपनियां आधार डाटा की मांग नहीं कर सकतीं। इसके साथ ही न्यायालय ने डाटा सुरक्षा को लेकर मजबूत प्रणाली विकसित करने की सरकार को हिदायत दी।
न्यायालय ने बैंक खाता खुलवाने, मोबाइल कनेक्शन हासिल करने और स्कूलों में नामांकन के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी लेकिन पैन कार्ड के वास्ते इसकी अनिवार्यता बरकरार रखी है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने असहमति का अपना अलग फैसला सुनाया जबकि न्यायमूर्ति भूषण ने अलग फैसला सुनाते हुए ज्यादातर मुद्दों पर बहुमत के फैसले से सहमति जतायी।
संविधान पीठ ने यह भी कहा कि सरकार अदालत की इजाजत के बिना बायोमीट्रिक डाटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किसी और एजेंसी से साझा नहीं कर सकती। उसने सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले।
न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा, Þयह जरूरी नहीं है कि हर चीज सर्वोत्तम (बेस्ट) हो, कुछ अलग (यूनिक) भी होना चाहिए। उन्होंने आधार कार्ड में डुप्लीकेसी की आशंका से इन्कार करते हुए कहा कि इसने गरीबों को पहचान और ताकत दी है।
न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा, आधार समाज के हाशिये के लोगों को अधिकार और पहचान देता है। आधार पहचान के अन्य प्रमाणों से भी अलग है, क्योंकि इसे डुप्लीकेट नहीं किया जा सकता है। साथ ही इसमें न्यूनतम जानकारी ही एकत्रित की जाती है। उन्होंने केंद्र सरकार से यथाशीघ्र मजबूत डाटा संरक्षण कानून लागू करने को भी कहा।
न्यायालय ने कहा कि निजी कंपनियां आधार नहीं मांग सकतीं। न्यायालय ने स्कूलों में नामांकन के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी है आधार कानून को मनी बिल की तरह पारित कराने के मुद्दे पर न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा कि इसे मनी बिल के तरह लाया जा सकता है लेकिन किसी विधेयक को मनी बिल की तरह पेश करने की अनुमति देने (शेष पेज 8 पर)फैसले की 10 खास बातें1 सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोबाइल नंबर, बैंक एकाउंट के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार अधिनियम की धारा 57 रद्द कर दी है। इसके बाद निजी कंपनियों के पास किसी भी व्यक्ति से उसका आधार मांगने का अधिकार नहीं होगा।
फैसले में यह स्पष्ट किया है कि स्कूल में एडमिशन के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं है। आधार नहीं होने की स्थिति में स्कूल बच्चे को एडमिशन देने से इनकार नहीं कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार कार्ड पर हमला संविधान के खिलाफ है। इसकी डुप्लिकेसी का कोई खतरा नहीं है। आधार सुरक्षित है। जस्टिस सीकरी ने कहा कि एक व्यक्ति यदि दूसरी बार आधार के लिए आवेदन करता है तो बायोमेट्रिक सिस्टम उसे पकड़ लेगा। यह हर नागरिक को एक यूनीक पहचान देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार योजना के सत्यापन के लिए पर्याप्त रक्षा प्रणाली है। व्यक्तिगत ऑथेंटिकेशन के बिना किसी के डाटा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि जितनी जल्दी संभव हो आंकड़ों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाया जाए।
गरीब तबकों को ताकत देता है आधार : अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार समाज के गरीब तबके के लोगों को ताकत और पहचान देता है. कोर्ट ने कहा कि आधार संवैधानिक रूप से वैध है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार इनकम टैक्स रिटर्न और पैन लिंकिंग के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक यूजीसी, नीट और सीबीएसई परीक्षाओं के लिए आधार अनिवार्य नहीं है। बॉयोमीट्रिक डेटा अदालत की अनुमति के बिना किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की सभी लाभकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है।
अदालत ने कहा कि आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमिट्रिक आंकड़े एकत्र किये हैं।

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