Monday , 22 October 2018
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‘आउटस्टेंडिंग प्रोफेसर’ की होगी लोकायुक्त जांच

  • सुखाडिय़ा विवि को बड़ा झटका
  • राज्य के इतिहास में विवि में लोकायुक्त से जांच का पहला मामला
  • राज्यपाल ने दिए आदेश
  • जोधपुर से रिलीव हुए बिना सुविवि ने करवा दी ज्वाइनिंग

उदयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कल्याण सिंह ने मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलोजी विभाग में प्रोफेसर के पद पर हुई भर्ती की जांच लोकायुक्त को सौंप दी है। उल्लेखनीय है कि विवि में हाल ही में बायोटेक्नोलोजी विभाग में प्रोफेसर पद पर डॉ. राजेश कुमार दूबे की नियुक्ति की गई है। इस नियुक्ति के सम्बन्ध में शिकायतें थीं कि दूबे का ए.पी.आई. स्कोर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मापदण्ड़ों से कम है साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा ‘आउटस्टेण्डिंग केटेगरीÓ में नियुक्ति के लिए भी कोई मापदण्ड स्थापित नहीं थे। यही नहीं इंटरव्यू से पहले ही नियुक्ति की विवि के गलियारों में चर्चा होने पर गणित के सीनियर प्रोफेसर व तीन वर्ष तक सुविवि बॉम के सदस्य रहे प्रो. घनश्यामसिंह राठौड़ ने गत 24 मई को कुलपति प्रो. जेपी शर्मा को पत्र देकर बायोटेक्नोलॉजी में प्रोफेसर पद पर की जा रही भर्ती में ‘आउट स्टेंडिंग प्रोफेसरÓ की भर्ती के नियम-कायदे बताते हुए तत्काल दखल देने की मांग की थी। इस पर विवि ने इसी दिन शाम को दो दिन बाद हो रहे इस पद के इंटरव्यू निरस्त करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इस बारे में सबसे पहले प्रात:काल ने 25 मई के अंक में समाचार ‘सुविवि : सीनियर प्रोफेसर की घुड़की के बाद टाल दिए बायोटेक प्रोफेसर के इंटरव्यूÓ प्रकाशित कर सबसे पहले इस मामले को उजागर किया था। बाद में इस पद पर प्रो. दूबे की भर्ती कर ली गई। इस बीच में बॉम की बैठक के मिनट्स से पता चला कि उसमें वीसी ने यह स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसे पद पर नियुक्ति के नियमानुसार पावर्स हैं। सुविवि ने बरसाई कृपा, बिना रिलीव हुए दे दी ज्वाइनिंगबहरहाल, पूर्व में दूबे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में स्थापित एचआरडीसी में निदेशक पद पर थे। जहां से इन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र के अभाव, बिना इस्तीफे व रीलीव हुए बगैर सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में कार्यग्रहण का गोल्डन चांस दे दिया गया। यह चांस किसने दिया व क्यों दिया। दस्तावेजों को क्यों नहीं बारीकी से जांचा गया, यह भी जांच का विषय है। भर्ती में हुई तमाम अनियमित्ताओं के संबंध में सुविवि के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा से भी स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया मगर समस्त परिस्थितियों में प्रकरण को राज्यपाल ने अत्यन्त गंभीर प्रकृति का मानते हुए जांच लोकायुक्त से करवाने का निर्णय लिया। राज्य के विश्वविद्यालयों के किसी भी मामले में लोकायुक्त से जांच करवाने का संभवत: यह पहला मामला है। राज्यपाल ने लोकायुक्त से अपेक्षा कि है वे इस नियुक्ति प्रक्रिया में हुई अनियमित्तताओं की विस्तार से जांच करें तथा नियुक्ति के संबंध में यूजीसी के नियमों के तहत व विश्वविद्यालय के अधिनियम में उल्लेखित प्रावधानों को गहराई से देखें।

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