Tuesday , 18 December 2018
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अस्पताल ही नहीं तो कैसे होगा इलाज ?

आयुष्मान भारत योजना पर सवाल पर राहुल ने दिया जवाब
उदयपुर । कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने केन्द्र की आयुष्मान भारत योजना पर सवाल करते हुए कहा है कि देश भर में अस्पताल ही नहीं हैं, फिर जनता का इलाज कैसे होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुणात्मक और ढांचागत सुधार करना होगा।
गांधी उदयपुर के आरसीए सभागार में शनिवार को बुद्धिजीवियों एवं कार्पोरेट से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत 50 करोड़ लोगों के स्वास्थ्य के लिए 20 हजार करोड़ रुपए के प्रावधान के संबंध में पूछे गए सवाल पर राहुल ने कहा कि इस योजना के पर्याप्त अस्पताल और चिकित्सक ही नहीं हैं। योजना से पहले देश में पर्याप्त अस्पताल खोलने के साथ चिकित्सकों को कमी को दूर करना चाहिए। स्वास्थ्य क्षेत्र में ढांचागत विकास को बढ़ाना होगा। जनता के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए जितना प्रावधान बजट में होना चाहिए, भाजपा सरकार ने नहीं किया। जितना पैसा पब्लिक हेल्थ केयर में जाना चाहिए, उतना जाता नहीं है। इसका ठेका अनिल अंबानी जैसे लोगों को दिया गया। अगर यूजर को किसी से इंश्योरेंस लेना है, तो अनिल अंबानी से ही लेना पड़ेगा। उन्होंने राजस्थान में पिछली गहलोत सरकार में निशुल्क दवाइयां देने की योजनाएं लागू करने की
सराहना की।किसानों के कर्जे माफ नहीं, मोदी-माल्या ले भागे हजारों करोडग़ांधी ने कहा कि तीन-चार वर्षो में मोदी सरकार ने देश के पन्द्रह-बीस उद्योगपतियों का साढ़े तीन लाख करोड़ का कर्जा माफ किया है। जबकि देश का किसान कर्जे माफी के लिए आंदोलन कर रहा है। किसान आत्महत्या कर रहा है लेकिन सरकार सुन नहीं रही। सरकार से रिलायंस कम्पनी के मालिक अनिल अम्बानी की कम्पनी ने 45 हजार करोड़ का फायदा उठाया तो नीरव मोदी 35 हजार करोड़, विजय माल्या दस हजार करोड़ रुपए लेकर देश से भाग गए।
मोदी ने अंबानी को राज्यों में सौंपा कृषि बीमा का काम
राहुल ने आरोप जड़ा कि कृषि क्षेत्र में भी फसल बीमा का ठेका एक ही कम्पनी को देने से किसानों को विकल्प नहीं मिलता। अनिल अंबानी को 6 राज्यों में अलग-अलग जिले सौंप दिए गए हैं। अब लोगों के पास कोई विकल्प नहीं बचा। यही काम शिक्षा और स्वास्थ्य में भी होने जा रहा है। अगर हमें 21वीं सदी में जाना है तो हमें हेल्थकेयर और शिक्षा के लिए 21वीं सदी के संस्थान बनाने ही होंगे।
शिक्षकों की घबराहट दूर करेंगे
संवाद में डूंगरपुर में संविदा व्याख्याता नियुक्त सुषमा चौबीसा सवाल करते हुए रो पड़ी और पीड़ा जहिर की कि 2008 से नियुक्त होने के बावजूद वेतन 7950 रुपए मिलता है। कुछ शिक्षक वेतन समानीकरण की लड़ाई लड़ते मर गए तो बचे लोगों के बुरे हाल हैं। इस महंगाई में इतने में गुजारा कैसे करें। इस पर राहुल ने जवाब दिया कि राजस्थान के साथ ही छत्तीसगढ़, गुजरात में भी लाखों शिक्षक यही सवाल कर रहे हैं। हमारी सरकार आने पर शिक्षकों की घबराहट दूर कर दी जाएगी। राहुल ने सहानुभूति जताकर सुषमा को गले लगाया।
भारतीय सरकारी शिक्षा संस्थान सबसे बेहतर
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हिंदुस्तान के सबसे बेहतर शिक्षा संस्थान सरकारी हैं, प्राइवेट नहीं. क्योंकि ये फायदे के पीछे नहीं भागते, बल्कि ये सेवा करना चाहते हैं।

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