Tuesday , 12 November 2019
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अमित शाह के बिल के बाद संसद में तूफान

आर्टिकल 370 के खात्मे का बिल राज्यसभा में पेश, शाह के बयान पर विपक्ष का जमकर हंगामा
हाइलाइट्स
संविधान से अनुच्छेद 370 के खंड 1 को छोड़कर सभी खंड रद्द करने का संकल्प बिल राज्यसभा में पेश हुआ
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिल पेश करते हुए जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की
अमित शाह के बिल पेश करने के दौरान विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया, गुलाम नबी आजाद ने धरना दिया
नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर को लेकर पिछले दिनों से जारी असमंजस के बादल छांटते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने आर्टिकल 370 का संकल्प बिल राज्यसभा में पेश कर दिया है। बिल पेश करते ही विपक्ष दलों कांग्रेस और पीडीपी ने जमकर हंगामा किया। एक पीडीपी सांसद ने कुर्ता तक फाड़ दिया। शाह ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के सिवा इस अनुच्छेद के सारे खंडों को रद्द करने की सिफारिश की। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया। इसके अलावा लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करते हुए केंद्र शासित प्रदेश बनाया। राज्य सभा सभापति एम वैंकेया नायडू ने सदन में मार्शल बुलाने का आदेश दिया। इसी के साथ सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई है।

अमित शाह ने कहा, ‘संविधान में अनुच्छेद 370 अस्थाई थी, इसका मतलब ही यह था कि इसे किसी न किसी दिन हटाया जाना था लेकिन अभी तक किसी में राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी, लोग वोट बैंक की राजनीति करते थे लेकिन हमें वोट बैंक की परवाह नहीं है।’

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘यह पहली बार नहीं है, कांग्रेस ने 1952 और 1962 में इसी तरह से अनुच्छेद 370 को संशोधित किया गया। इसलिए विरोध करने के बजाए चर्चा कीजिए और आपकी जो भी गलतफहमियां हैं उन्हें दूर करें। मैं आपके सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं।’

रामगोपाल यादव के सवाल का जवाब देते हुए राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह, ‘मुझे बड़ा अच्छा लगता कि सारे सदस्य सरकार से जान लेते कि हम किस पद्धति से ऐसा करने जा रहे हैं। आर्टिकल 370 के आर्टिकल के अंदर ही इसका प्रावधान है। इसमें राष्ट्रपति के पास ऐसा प्रावधान है जिसके जरिए इसमें कुछ धाराओं को हटाया जा सकता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ, इस सदन में इससे पहले कांग्रेस खुद भी ऐसा कर चुकी है।’

“जिस दिन से राष्ट्रपति द्वारा इस गैजेट नोटिफिकेशन को स्वीकार किया जाएगा, उस दिन से संविधान के अनुच्छेद 370 (1) के अलावा और कोई भी खंड लागू नहीं होंगे।”
-आर्टिकल 370 पर अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री

राज्यसभा में बीजेपी सासंद भूपेंद्र यादव ने कहा, ‘जम्मू कश्मीर की भारत में ऐकता का सपना देश के अहम नेताओं का सपना है। लोहिया जी का सपना है, जय प्रकाश नारायण का था। हमने आज इन सभी नेताओं के सपने को साकार करने का काम किया है।’

भूपेंद्र यादव ने आगे कहा, ‘इस देश में कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि इस देश की एकता के लिए, जम्मू कश्मीर की एकता के लिए कभी कोई काम नहीं किया। ऐसे में अगर गृह मंत्री ऐसा कोई प्रस्ताव लेकर आए हैं तो हमें उसका स्वागत करना चाहिए।’

‘लद्दाख बिना विधायकों वाला केंद्र शासित प्रदेश बनेगा’
बिल पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह कदम सीमा पार आतंकवाद के लगातार खतरे को देखते हुए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग लंबे समय से उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग कर रहे थे और यह निर्णय स्थानीय जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लिया गया है। इसी के साथ जम्मू कश्मीर विधायकों वाला केन्द्र शासित प्रदेश बनेगा, वहीं लद्दाख को बिना विधायकों के केन्द्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा।

गुलाम नबी आजाद ने दिया धरना
शाह के बयान के दौरान संसद में विपक्षी दलों ने जमकर कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने इस बिल के बारे में पहले से नहीं बताया था। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सदन में बैठकर धरना दे रहे हैं। राज्यसभा सभापति वैंकेया नायडू के अनुसार पीडीपी के सांसदों को बाहर भेजा। उन्होंने सदन में संविधान को फाड़ने की कोशिश की।

राज्यसभा में जैसे ही गृह मंत्री अमित शाह बोलने के लिए खड़े हुए विपक्ष ने हंगामा शुरू किया। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में युद्ध जैसे हालात क्यों हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद क्यों हैं। अमित शाह ने कहा, ‘अगर गुलाम नबी आजाद को लगता है कि यह असंवैधानिक है तो लोकतांत्रित तंत्र के मुताबिक चर्चा करें। मैं चर्चा करने के लिए तैयार हूं।’

अमित शाह ने कहा- विपक्ष के साथ हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार
जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल पेश करने से पहले राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने सबसे पहले जम्मू-कश्मीर पर चर्चा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में तीन-तीन पूर्व सीएम को नजरबंद किया गया है। राज्य में क्या हो रहा है, सबसे पहले इसपर चर्चा होनी चाहिए। इस सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह सब मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं और विपक्ष सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं।

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