Saturday , 21 September 2019
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‘अतिरिक्त जवानों की तैनाती सुरक्षा उपाय’

श्रीनगर (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर में पहले हजारों अतिरिक्त जवानों की तैनाती और फिर अमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरे के मद्देनजर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को घाटी से जल्द निकलने संबंधी सिक्यॉरिटी अडवाइजरी से वहां तमाम तरह की अफवाहें फैल रही हैं। घाटी में तरह-तरह की झूठी सूचनाएं फैल रही हैं, जिसका सक्षम अधिकारियों द्वारा खंडन हो रहा है। खुद गवर्नर सत्यपाल मलिक ने पिछले 24 घंटों में 2 बार कश्मीरियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। शनिवार को राजभवन ने स्पष्ट किया कि जवानों की तैनाती पूरी तरह सुरक्षा उद्देश्य से की गई है, संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव जैसी कोई बात नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नैशनल कॉन्फ्रेंस के एक प्रतिनिधिमंडल को शनिवार को बताया कि राज्य को संवैधानिक प्रावधानों में किसी भी बदलाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भरोसा दिया कि अतिरिक्त अद्र्धसैनिक बलों की तैनाती विशुद्ध रूप से सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम है। बता दें कि घाटी में हालिया गतिविधियों को कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधानों आर्टिकल 35-ए और आर्टिकल 370 को खत्म करने की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजभवन की ओर से यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अगुआई में प्रतिनिधिमंडल को बताया कि सुरक्षा स्थिति इस तरह से पैदा हुई है जिस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता थी। राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया, अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमलों के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को विश्वसनीय जानकारी मिली थी। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से (शेष पेज 8 पर)

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