Tuesday , 21 November 2017
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11 साल बाद मिलेगा आश्रितों को मुआवजा

राज्य सरकार की अपील हाईकोर्ट की डबल बैंच में भी खारिज

rupeeउदयपुर। सोम कमला आम्बा बांध में वर्ष 2006 में नौका पलटने से सात यात्रियों की मौत के मामले में राज्य सरकार द्वारा की गई अपील को राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने नामंजूर करते हुए एकल बैंच के आदेश की पुष्टि करते हुए फैसले को बहाल रखा। अब 11 साल बाद राज्य सरकार सातों मृतकों के आश्रितों को मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करेगी।
प्रकरण के अनुसार वर्ष 2006 में सोम कमला आम्बा में नाव उलटने से आठ यात्रियों की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में सात यात्रियों के आश्रितों द्वारा राज्य सरकार एवं अन्य विभागों के खिलाफ स्थाई लोक अदालत में परिवाद पेश किया था, जिस पर स्थाई लोक अदालत ने 29 जनवरी 2011 को राज्य सरकार के खिलाफ आदेश पारित कर मृतकों के आश्रितों को हर्जाने के रूप में 32 लाख रूपए मय ब्याज देने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय की एकलपीठ में अपील की थी। एकलपीठ द्वारा अपील पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थाई लोक अदालत के आदेश की पुष्टि करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ आदेश पारित किया कि 32 लाख मय ब्याज के अतिरिक्त 25-25 हजार रूपए प्रत्येक मृतक के आश्रितों को अपील के खर्चे के देने के आदेश दिए थे। इस पर राज्य सरकार ने राजस्थान की खंडपीठ में इस फैसले के खिलाफ अपील की। खंडपीठ के न्यायाधिपति गोविंद माथुर व विनित कुमार माथुर ने अपील को स्वीकार करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय के एकलपीठ के 7 दिसम्बर 2016 के राज्य सरकार के खिलाफ दिए आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार अवैध नौका संचालन को रोकने में असफल रही है। बिना लाईफ जैकेट के नौका परिवहन में बरती गई लापरवाही के लिए सरकार को दोषी माना। सरकार यदि कार्यवाही करती तो शायद यह दुर्घटना नहीं होती। एकलपीठ के 7 दिसम्बर 2016 के आदेश की पुष्टि की गई और राज्य सरकार को दो माह में उक्त राशि मय ब्याज मृतकों के आश्रितों को देने के आदेश दिए। यह है मामला
राठौड़ा सराड़ा निवासी हीरालाल पुत्र छगनलाल जैन व अन्य ने राज्य सरकार व अन्य विभागों के खिलाफ स्थाई लोक अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता पराग अग्रवाल के जरिये परिवाद पेश किया था जिसमें बताया कि 12 जून 2006 को सोम कमला आम्बा के बेक वाटर से नाव में होकर संगमेश्वर महादेव में परसादी के लिए 15 जनें नाव में सवार होकर जा रहे थे, नाव असंतुलित हो पलट गई, जिससे आठ लोगों की डूबने से मौत हो गई थी। परिवाद में बताया कि नौका संचालन अवैध रूप से किया जा रहा था और उसमें क्षमता से अधिक सवारियों को बिठा रखा था। सवारियों को लाईफ जैकेट भी नहीं पहना रखा था। बांध बनने से पूर्व संगमेश्वर महादेव जाने के लिए सड़क मार्ग था, लेकिन बांध बन जाने के कारण सड़क डूब में चली गई और मंदिर टापू बन गया। सरकार ने मंदिर में जाने के लिए दर्शनार्थियों के लिए न तो पुल बनाया और न ही नौका संचालन का लाईसेंस किसी कम्पनी को दिया गया। दुर्घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया गया।

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