Thursday , 24 May 2018
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बिना विधिक प्रक्रिया के पेश चालान को अदालत ने लौटाया

दस लाख की धोखाधड़ी व चोरी का मामला

courtउदयपुर। विधि अनुसार कार्यवाही नहीं कर बिना अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी कराए आरोपियों को दस लाख की धोखाधड़ी के मामले में फरार बताते हुए पेश चालान को बिना विधिक अनुसार कार्यवाही किए पेश करने पर अदालत ने पुनः लौटा दिया और विधि अनुसार कार्यवाही कर पुनः अदालत में पेश करने के आदेश दिए। जिला पुलिस अधीक्षक को तत्कालीन गोवर्धन विलास थानाधिकारी से मामले में स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।
प्रकरण के अनुसार केसरविला अम्बामाता निवासी रतन सिंह पुत्र मोहन सिंह मेहता ने ए ब्लॉक सेक्टर-14 निवासी दिनेशचंद्र पुत्र किशनलाल तातेड़, उसके बेटे रविश कुमार तातेड़, पुत्री सज्जन नगर निवासी स्वीटी पुत्री दिनेश पत्नी विनोद सिंघवी एवं पायल पुत्री दिनेश पत्नी अंकित बापना के खिलाफ गोवर्धन विलास थाने में भादसं की धारा 452, 379, 120-बी के तहत मामला दर्ज कराया। दर्ज रिपोर्ट में बताया कि दिनेश और उसके बेटे रविश से सेक्टर-14 स्थित मकान का निचला भाग 17 अप्रेल 2015 से 17 अप्रेल 2017 तक दो वर्ष के लिए 10 लाख रूपए में रहन पर लिया था और इस रहननामे पर इन दोनों पुत्रियों ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए थे। बिना रहन चुकाए मकान पर लगाए ताले तोड़ दिए। जेवर, कीमती परिधान कुर्सियां और दस हजार रूपए नकद चुरा लिए। इस मामले में गोवर्धन विलास पुलिस ने अनुसंधान कर आरोपी रविश तातेड़ व दिनेश तातेड़ के खिलाफ 37 पुलिस एक्ट का वारंट जारी किए जाने हेतु प्रार्थना पत्र लम्बित है। इस अभियोग पत्र में थानाधिकारी ने यह अंकित किया कि आरोपी कानूनी प्रक्रिया व गिरफ्तारी से बचने के लिए सकुनल से रूहपोश है और अभियोग पत्र में तत्कालीन थानाधिकारी ने धारा 299 सीआरपीसी के तहत पेश कर दिया, जबकि न्यायालय द्वारा आरोपी को मफरूर घोषित नहीं किया हुआ है। न्यायालय द्वारा पुनः गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश एफआईआर में अनुसंधान अधिकारी को 15 दिसम्बर 2016 को दिए गए थे। थानाधिकारी ने चार्जशीट में मिथ्याकथन अंकित करते हुए आरोपी को सकुनत से रूहपोश बताते हुए नतीजा प्रस्तुत कर दिया, जबकि न्यायालय में धारा 27 पुलिस एक्ट के वारंट जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र भी लम्बित है। अतः नतीजा धारा 299 सीआरपीसी के तहत स्वीकार नहीं कर पुलिस थाना गोवर्धन विलास को पुनः लौटा दिया। साथ ही जिला पुलिस अधीक्षक को संबंधित तत्कालीन थानाधिकारी गोवर्धन विलास से मामले में स्पष्टीकरण दे। न्यायालय द्वारा आरोपी को मफरूर घोषित नहीं किया गया तो उसके द्वारा इस प्रकार फरार होने के चार्जशीट धारा 299 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत संबंधित लिंक न्यायालय में पेश कर दी गई। विशिष्ट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीसीपीएनडीटी एक्ट कैसेज के पीठासीन अधिकारी ने चार्जशीट पुनः गोवर्धन विलास थाने को लौटाते हुए विधि अनुसार कार्यवाही करने के पश्चात चालान न्यायालय में प्र्रस्तुत करने के आदेश दिए।

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