Thursday , 21 June 2018
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बिना बहस-बिना चर्चा 312 करोड़ का बजट 20 सैकण्ड में पारित

  • कई बार शब्दों को लेकर नाराज हुए महापौर
  • कई पार्षदों से हुई बहस

उदयपुर। शहर के विकास को लेकर नगर निगम में पेश आगामी वित्त वर्ष का 312 करोड़ का बजट मात्र 20 सैकण्ड में ही पास हो गया। इस दौरान निगम में प्रतिपक्ष के नाम पर मौजूद तीन से चार पार्षद तमाशबीन बने रहे। बजट को पास करने के बाद जब अन्य मुद्दों पर बहस हुई तो भाजपा बोर्ड के पार्षदों ने ही महापौर पर जमकर हमला बोला और कई ऐसे सवालों के जवाब भी मांगे, जिससे महापौर कई बार नाराज हुए। इस दौरान शब्दों के माहिर पार्षदों ने आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग को भी अपनी बातों से उलझा दिया।
निगम के पटल पर 312 करोड़ का बजट रखते ही महापौर चन्द्रसिंह कोठारी ने कुछ मदों को पढ़ा और इसके बाद सभी सदस्यो के सामने देखा तो निगम में मौजूद भाजपा के सदस्यों ने मात्र 20 सैंकण्ड में ही मेजे थपथापाकर इस बजट को पारित कर दिया। इस दौरान निगम में मौजूद प्रतिपक्ष तमाशबीन बने रहे। इसके बाद अन्य मुद्दों पर जमकर बहस हुई। इन मुद्दों पर निगम के भाजपा पार्षदों ने अपने ही बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाएं और एक के बाद एक करते हुए कई सवाल दागे। इस दौरान महापौर चन्द्रसिंह कोठारी ने भी सदस्यों द्वारा उपयोग लिए गए शब्दों पर आपत्ति जताई तो सदस्यों ने बहस की। इस दौरान कुछ प्रश्नों का उत्तर आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग ने देने का प्रयास किया तो शब्दों में माहिर कुछ सदस्यों ने आयुक्त को भी अपने शब्दों में उलझा दिया।झील में तय सीमा से ज्यादा है नावों को स्वीकृति
बैठक में आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग ने कहा कि झील में नौका संचालन की स्वीकृति तय सीमा से अधिक है। यह कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सामने आया था। सिहाग ने कहा कि ओर भी लोग स्वीकृति के लिए आ रहे है ऐसे में इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए। इस पर गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि झील में लोगों ने कई नावें चलाने की स्वीकृति ले रखी है, परन्तु आधी भी नहीं चलाते है। ऐसे में भौतिक सत्यापन कर जितनी चल रही है उन्हीं को स्वीकृति देकर जो नहीं चल रही है उसे स्वीकृति में से हटाया जाए।
सदन चलाने का अधिकार आयुक्त को नहीं
बैठक के दौरान ही एक प्रश्र कितने भूखण्डों को नोटिस दिए है का जवाब आयुक्त दे रहे थे तो सिंघवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेरा प्रश्र आपसे नहीं है महापौर से है। इसके साथ ही यह भी कहा कि नियम है कि आयुक्त को सदन चलाने का अधिकार नहीं होता है। इस पर महापौर कोठारी ने कहा कुछ को नोटिस दिए है।
जो अधिकारी काम नहीं करते, मार्च में ही हटा दिया जाएगा
बैठक के दौरान ही निर्माण के अधिकारियों का मामला आया। इस पर समिति अध्यक्ष सिंघवी ने कहा कि जो अधिकारी काम नहीं करते है उन्हें निगम से वेतन भी नहीं मिलना चाहिए, ऐसों को हटाया जाए। महापौर कोठारी ने कहा लिस्ट दे दो, जांच करवा ली जाएगी। इस पर सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि केवल निर्माण विभाग के अधिकारियों पर ही नहीं सभी विभागों के अधिकारियों पर भी कार्यवाही हो। महापौर कोठारी ने कहा कि ऐसे अधिकारियों की लिस्ट दी जाए इनकी जांच करवाकर मार्च माह में ही रिलीव कर दिया जाएगा।डेढ़ साल बाद भी उदयपुर रहेगा
बैठक में कांग्रेसी पार्षद राशीद खां द्वारा करोड़ों के काम डेढ़ वर्ष में कैसे पूरे होने का सवाल आया तो कटारिया ने कहा कि डेढ़ वर्ष बाद भी शहर रहेगा, चाहे पार्षद रहे या ना रहे। ऐसे में महापौर कोठारी ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए कांग्रेस के पार्षदों ने कुछ नहीं किया, भाजपा बोर्ड ने संगठन के माध्यम से कैंप लगवाकर फार्म भरवाए थे।
करोड़ों का म्यूजिकल फाउण्टेंन छोड़ों, लाईटों की व्यवस्था करवाओ
बैठक में पिछोला में म्यूजिकल फाउण्टेन लगाने का मामला आने पर निर्दलीय पार्षद नजमा मेवाफरोश ने कहा करोड़ों का फाउण्टेन छोड़ों वार्डों में लाईटें लगाने के लिए भी भीख मांगनी पड़ रही है। वार्ड वासी कह रहे है कि लाईट हम ले आते है आप तो केवल लगाने की व्यवस्था कर दो। सफाई व्यवस्था खराब है नई भर्ती करों या ठेके पर लगाओं, नहीं तो पार्षदों को झाडू पकड़ना होगा।
पिछोला में फव्वारा एक लगा या तीन इस पर उलझे
महापौर कोठारी ने कहा कि पिछोला में तीन फव्वारे लगे चुके है। शेष लग जाएंग तो सिंघवी ने कहा कि मात्र एक ही लगा है। इस पर एईएन सत्यनारायण के बारे में पूछा तो वह नहीं थे, एक्सईएन के बारे में पूछा तो भी कोई जवाब नहीं आया। बाद में स्थिति स्पष्ट हुई कि मात्र एक ही फव्वारा लगा है तो महापौर ने कहा कि फव्वारा लगाने वाले कंपनी को इंट्रेस्ट नहीं है इसी कारण दबाव बना रहे है।पहले आओ पहले पाओं पर मिलेगी सोलर प्लांट की सबसिडी
बैठक में घरेलू भवनों के लिए सोलर पावर प्लांट के लिए निगम द्वारा 10 प्रतिशत अनुदान एक केवी से बढ़ाकर 5 केवी करने के निर्णय पर कटारिया ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। एक निर्धारित बजट रखा जाना चाहिए, ताकि इस उस वर्ष में उस बजट तक जितने भी शहरवासी आएंगे उन्हे सबसिडी मिल जाएंगी। इस पर कटारिया के निर्देश पर एक करोड़ का बजट रखा गया।
ऐसा कोई वार्ड नहीं जिसमें करोड़ों का काम नहीं हुआ हो
बैठक में गुलाबचंद कटारिया ने एक लिस्ट को दिखाते हुए कहा कि ऐसा कोई वार्ड नहंी है, जिसमें करोड़ों के काम ना हुए हो। मैने स्वयं ने प्रत्येक पार्षद को 20-20 लाख रूपए के प्रस्ताव भिजवाने के लिए कहा था, जो नहीं भिजवा पाए क्या वो बोलने के अधिकारी है।
सफाई कर्मचारियों को दिए जाए सुरक्षा उपकरण
बैठक में रमेश चंदेल ने कई मुद्दों को उठाते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे है और नाला साफ करने वालों के पास तो कुछ भी नहीं है। इस पर स्वास्थ्य अधिकारी नरेन्द्र श्रीमाली ने कहा कि निगम के कर्मचारियो को निगम द्वारा सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे है और ठेकेदारों को पाबंद किया गया है।इन मुद्दों पर बनी सहमति 1) किसी भी प्र्रतिष्ठान, मकान या संस्था में आग लगने पर दमकल से दुर्घटना प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पहले निर्धारित शुल्क का 20 प्रतिशत और बीमा पास होने पर 80 प्रतिशत राशी वसूली जाए।
2) पिछोला झील में यश एम्यूजमेंट द्वारा नाव संचालन में फर्म द्वारा नौकाओं का गैस से संचालन करना बताया गया और 3 लाख 88 हजार 174 रूपए जमा करवाए गए। बाद में जांच में नौकाएं पैट्रोल पर चलने का सामने आने 12 लाख 83 हजार 973 रूपए का शुल्क माना गया। जिसमें 3 लाख रूपए पूर्व में जमा करवाने पर शेष 8 लाख 95 हजार 799 रूपए जमा करवाने पर सहमति दी गई।
3) नगर निगम में एक अतिरिक्त मुख्य अभियंता का पद स्वीकृत करने पर स्थानीय निकाय को पत्र लिखने पर प्रस्ताव लिया गया।
4) गोवर्धनसागर स्थित नव निर्मित पार्क में लेजर शो के लिए 3 करोड़ की स्वीकृति नहीं दी गई।
5) रूफ टोप वॉटर हार्वेस्टिंग पर निगम द्वार अनुदान देने पर सहमति दी गई।
6) शहर में विभिन्न विकास कार्यों के लिए एकल निविदा को स्वीकृति दी गई।
7) लखारा चौक मण्डी से पार्किंग तक तोड़े गए भवन को मुआवजा देने पर सहमति।
8) ई-ऑक्शन में जोड़ी जाने वाली शर्तों पर एक बार फिर से विचार।मैंने 1971 में प्लॉट लिया 2012 में निर्माण किया, ऐसे भूखण्डों से निगम को क्या आय हुई : कटारियाउदयपुर। नगर निगम की बैठक में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने शहर में खाली पड़े भूखण्डों से हो रही गंदगी और बीमारियों का मुद्दा आने पर कहा कि मैने वर्ष 1971 में एक हजार रूपए में भूखण्ड लिया था और इस पर वर्ष 2012 में निर्माण किया। तब तक इसकी किमत लाखों रूपए हो गई थी। इतने वर्ष तक मेरे उस भूखण्ड से निगम को एक रूपये की आय नहीं हुई थी। शहर में ऐसे करीब 10 हजार से अधिक भूखण्ड है। इस पर आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग ने कहा कि ऐसे कुछ भूखण्डों को नोटिस दिया गया है और निर्धारित समय में जवाब नहीं आने पर आवंटन निरस्त किया जाएगा। इस पर कटारिया ने कहा कि कोई लिस्ट है क्या आपके पास तो आयुक्त ने 40 भूखण्ड को नोटिस देना बताया। इधर इस मौके पर बोलते हुए पारस सिंघवी ने कहा कि वर्ष 2015 में बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया था कि खाली भूखण्डों पर बोर्ड लगाया जाएगा कि यह निगम की सम्पति है उसका क्या हुआ तो महापौर ने कहा कि यह कानूनन गलत है और ऐसा नहंी हो सकता है। पार्षद नानालाल वया ने कहा कि यूआईटी और निगम दोनों मिलकर लिस्ट बनाएं और कठोर कार्यवाही हो। बैठक में मौजूद सरोज अग्रवाल ने कहा कि मैने तीन वर्ष पूर्व शिकायत की थी और अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस पर सिंघवी ने फिर से कहा कि पूर्व यूआईटी चैयरमेन रूपकुमार खुराना ने तो ऐसे भूख्रण्डों पर बोर्ड भी लगवाए थे। पार्षद वेणीराम सालवी ने कहा कि यूआईटी को एक पत्र भेजे जाए कि ऐसे भूखण्ड जो वर्षों से खाली है व गंदगी व कचरे का ढ़ेर लगा है तो उन भूखण्डों की पैनाल्टी जमा नहीं होने तक उन्हें कनवर्ट ना करें। आखिर में महापौर चन्द्रसिंह कोठारी ने कहा कि इस मामले में कठोर कार्यवाही की जा रही है और शीघ्र ही कई भूखण्डों पर कार्यवाही होगी तो मामला सुधर जाएगा।

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