Sunday , 24 September 2017
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फर्जी कंपनियां बनाकर 300 करोड़ का विस्फोटक गायब करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार

उदयपुर। शहर के प्रतापनगर थाना पुलिस ने 300 करोड़ रूपए मूल्य के अमोनियम नाईट्रेट को अपने नौकरों और कर्मचारियों के नाम से फर्जी कंपनियां बनाकर गायब करने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस अमोनियम नाईट्रेट के अवैध रूप से परिवहन करने को लेकर कई समय से लगातार दबिश दे रही थी, जब पुलिस को पता चला कि आरोपी इंदौर में है तो पुलिस ने दबिश देकर वहां से गिरफ्तार किया। आरोपी ने पूरे देश में अपना नेटवर्क बिछा रखा है और एजेन्टों के माध्यम से विस्फोटक की सप्लाई करता है। गत वर्ष सुखेर व प्रतापनगर थाना पुलिस दो ट्रकों से 288 किलो विस्फोटक बरामद कर पांच आरोपियों को अब तक गिरफ्तार कर चुकी है।
जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने बताया कि गत वर्ष सुखेर थाना पुलिस ने 15 फरवरी व प्रतापनगर थाना पुलिस ने 10 मार्च को दो ट्रकों से 50-50 किलो वजनी 576 कट्टे अमोनियम नाईट्रेट की तस्करी करते पकड़ा था। इस मामले की जांच की तो यह एक बड़ा मामला होना सामने आया। पुलिस ने एक-एक कर आरोपियों को पकड़ा और पूछताछ करते हुए परत-दर परत आगे बढ़ी तो मामला दो ट्रकों के अमोनियम नाईट्रेट से बदलकर 1500 ट्रक अमोनियम नाईट्रेट में बदल गया। जिनका कहीं पर भी कोई रिकार्ड नहीं मिला। इस पर पुलिस धीरे-धीरे आरोपियो को गिरफ्तार करते हुए करीब 300 करोड़ रूपए से अधिक के अमोनियम नाईट्रेट को गायब करने वाले मुख्य आरोपी इन्दौर निवासी अविनाश पुत्र महेन्द्र बाहेती को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में पुलिस ने ट्रक चालक बालाथल देलवाड़ा निवासी दिलीप सिंह पुत्र बहादुर सिंह झाला और इटाली चौराहा फतेहनगर निवासी रामसिंह पुत्र किशनङ्क्षसह राजपूत को गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने जांच करते हुए ट्रक के मालिक खेमपुर घासा निवासी रमेश चन्द्र पुत्र हरलाल गुर्जर व किशोरीलाल नायक को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ में सामने आया कि अमोनियम नाईट्रेट का यह रसायन चाखण टोल नाका नासिक महाराष्ट्र के पास से ट्रांसपोर्टर रविन्द्र चुघ उर्फ रवि भाई के यहां से भरवाया था। जांच से यह भी सामने आया कि इस दौरान अमोनियम नाईट्रेट के अवैध क्रय-विक्रय होने के साथ-साथ पिछले डेढ वर्षो में इसका अवैध व्यापार हो रहा है और रविन्द्र चुघ द्वारा जो अमोनियम नाईट्रेट भरवाया वह दीपक फर्टीलाईजर पूना से सप्लाई किया था। पुलिस ने इस मामले में रविन्द्र चुघ को भी गिरफ्तार किया था। जब चुघ से पुलिस से सख्ती से पूछताछ की तो चुघ ने एक के बाद एक करते हुए राज खोलना शुरू किया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अनुसंधान कर रही टीम को रविन्द्र चुघ ने बताया कि अमोनियम नाईट्रेट रसायन को अविनाश बाहेती ने भरवाया था। बाहेती अमोनियम नाईट्रेट को एमपी नम्बर के ट्रकों से भरकर नासिक के पास में रविन्द्र चुघ के माध्यम से दूसरे ट्रकों में रिलोड करवा देता था। जो विभिन्न माध्यमों से होता हुआ सीधा फर्जी नाम पते से बनी कंपनी के पास चला जाता था। इसके बाद इस अमोनियम नाईट्रेट का पता ही नहीं चलता था कि आखिरकार वह गया कहां। इस तरह से अब तक करीब 300 करोड़ रूपए का अमोनियम नाईट्रेट गायब कर चुके है। जो कहां गया अविनाश बाहेती को ही पता है। एसपी गोयल ने बताया कि इन दोनों मामलों में मुख्य सरगना अविनाश बाहेती का नाम सामने आया। इस पर पुलिस ने उसके पुणे, नागपुर, इन्दौर, देवास, भीलवाड़ा, जयपुर स्थित ठिकानों पर कई बार दबिश दी, लेकिन उसके इंदौर में होने की सूचना मिली तो प्रतापनगर थानाधिकारी डॉ. हनुमंत सिंह राजपुरोहित मय टीम इन्दौर पहुंचे और अनिाश बाहेती को गिरफ्तार किया। अब तक 1500 ट्रक अमोनियम नाईट्रेट की तस्करी
पुलिस ने जब सबसे पहले अमोनियम नाईट्रेट को पकड़ा था तो सामने आया कि उक्त रसायन एक्सीलेेंट इंडिया लोजिस्टिक अकुरड़ी पुना द्वारा मैसर्स स्मृति कैमिकल्स एण्ड इन्टरमेडिज पोलापुर जाना बताया। इस पर जांच की तो इस नाम पते की कोई कंपनी नहीं थी। इसके बाद जब ट्रक मालिकों को पकड़ा तो उन्होंने आरोपी रविन्द्र चुघ द्वारा भरवाना बताया, जिसे दीपक फर्टीलाईजर द्वारा सप्लाई करना बताया। इसके बाद पुलिस ने दीपक फर्टीलाईजर का रिकार्ड निकाला तो सामने आया किे इस कंपनी ने बालाजी ट्रेडर्स और बालाजी इन्टरप्राईजेज नाम की फर्मो को भारी मात्रा में अमोनियम नाईट्रेट दिया है। बालाजी ट्रेडर्स ने तिरूपति ट्रेडिंग नामक कंपनी को एक हजार गाडिय़ां और बालाजी इन्टरप्राईजेज ने तिरूपति ट्रेडिंग को 500 गाडिय़ां बेची है।
अपने ही कर्मचारियों के नाम पर खोल रखी थी फर्मे
तिरूपति ट्रेडिंग फर्म की जांच से पुलिस पता चला कि फर्म अंटाली आसिन भीलावाड़ा निवासी घेवरङ्क्षसह के नाम पर रजिस्टर्ड है और बालाजी इन्टरप्राईजेज भीलवाड़ा के ही बालमुकून्द वैष्णव के नाम रजिस्टर्ड कर रखी है। जिन व्यक्तियों के नाम से ये फर्म रजिस्टर्ड कर रखी है वे साधारण व्यक्ति है और अविनाश के यहां 20 हजार रूपये मासिक वेतन भोगी है जबकि इनका टर्न ऑवर करोड़ों रूपये में है। इनका सम्पूर्ण ट्रांजेक्शन आईसीआईसी बैंक में घेवरङ्क्षसह के नाम से होता था लेकिन ट्रांजेक्शन अविनाश करता था। बैंक में घेवरसिंह के नाम के आगे अविनाश का मोबाईल नम्बर और ईमेल आईडी ही रजिस्टर्ड था। घेवरसिंह के पास किसी तरह का कोई लाईसेंस नहीं था।
आठ फर्जी कंपनियां बनाई
पुलिस जांच में सामने आया कि अविनाश बाहेती एवं उसके पिता महेन्द्र बाहेती ने कुल 8 फर्जी फर्में बना रखी है। जिसमें श्री तिरूपति इन्टरप्राईजेज, बालाजी ड्रिलिंग, बालाजी ट्रेडर्स, जी.टी. सेल्स, बालाजी इन्टरप्राईजेज, तिरूपति इन्टरप्राईजेज, श्रीनाथ इन्टरप्राईजेज, तिरूपति ट्रेडिंग के नाम से बना रखी है। इसमें से कुछ फर्म अपने नौकरों के नाम तथा कुछ अपने परिजनों के नाम बनायी है। जिन्हें पता तक नहीं था।अवैध रूप से सीधा पांच गुना अधिक कमाई
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी एक ट्रक पर पांच लाख रूपए से अधिक की कमाई करता था। यह अमोनियम नाईट्रेट 35 रूपए किलो कंपनी से मिलता है और आरोपी इसे बिना बिल्टी के बेचने के एवज में 125 रूपए से 150 रूपए प्रतिकिलों की दर वसूलता था।
ट्रक मालिकों को देता था किराए से ज्यादा पैसे
पुलिस के अनुसार अविनाश बाहेती अपने विश्वास के ट्रंासपोर्टर के माध्यम से अमोनियम नाईट्रेट को परिवहन करने के लिए किसी भी फर्जी पते व फर्जी कम्पनीयों के नाम की बिल्टी काट देता था। परिवहन करने वाले ट्रक चालक को भी यह पता नहीं होता था कि ट्रक में जो माल भरा गया है वो कहां से आया है और कहां जा रहा था। ट्रक को नियत शहर के आस-पास कहीं रोक कर अविनाश के एजेन्ट दूसरी गाड़ी में माल (अमोनियम नाईट्रेट) सिफ्ट कर देते थे तथा उसके बाद जहां माल को ले जाना होता वहां ट्रक के चालक को जरिये मोबाईल सूचित करा देते थे।
पिता के साथ कई आरोपी शामिल
इधर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अविनाश बाहेती का पिता महेन्द्र बाहेती भी इसमें शामिल है। पहले यह काम महेन्द्र बाहेती करता था, बाद में अविनाश बाहेती इस लाईन में आया। कुछ ही समय में पूरे देश में नेटवर्क फैला दिया और अवैध रूप से सप्लाई शुरू की। पुलिस को विशेषकर खरीददारों के बारे में जानकारी जुटानी है, ताकि पता चल सकें।एसपी-कलेक्टर की जानकारी में होना आवश्यक
विस्फोटक नियमों के अन्तर्गत यह आवश्यक है कि जिस वाहन से विस्फोटक या अमोनियम नाइट्रेट का परिवहन किया जा रहा हो उस वाहन के रूट की सूचना रूट में आने वाले प्रत्येक जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को आवश्यक रूप से देनी होती है और प्रत्येक वाहन के साथ सुरक्षा गार्ड भी होने आवश्यक होते हैं। एक ग्राम तक का हिसाब रखना होता है
अमोनियम नाईट्रेट से सम्बंधित कानूनी प्रावधानों व नियमों के अनुसार विस्फोटक नियमों के अन्तर्गत प्रत्येक लाईसेंसशुदा फर्म को विगत पांच वर्षों के रिकार्ड का संधारण रखना होता है कि किस फर्म ने कितना विस्फोटक किस फर्म से खरीदा व किसे बेचा है एवं किस काम में लिया गया है। अमोनियम नाईट्रेट के विस्फोटक के रूप में दुरूपयोग पर अंकुश लगाने के लिये भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011 में अमोनियम नाईट्रेट के अलग लाईसेंस की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिये विस्फोटक अधिनियम में संशोधन करते हुए अमोनियम नाईट्रेट के अवैध परिवहन व बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के प्रावधान किये गये हैं।अपराधिक संगठनों को बेचने की आशंका
इधर पुलिस आरोपी अविनाश बाहेती से यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं उसने इसे आपराधिक संगठनों को तो नहीं बेचा है। क्योंकि पिछले कुछ समय में देश में हुए विस्फोटकों में भारी मात्रा में अमोनियम नाईट्रेट का प्रयोग किया गया है। इधर पुलिस विस्फोटक खरीदने वालों के बारे में जानकारी जुटा रही है क्योंकि बिना लाईसेंस के खरीदने वाला भी अपराधी होता है।ऐसे बनते है इस रसायन से विस्फोटक
विगत कुछ वर्षो से देश में हुए अधिकांश बम विस्फोटों में अमोनियम नाईट्रेट का प्रयोग किया गया। विस्फोटक के रूप में 86-88 प्रतिशत अमोनियम नाईट्रेट, 8-10 प्रतिशत चूरा किए हुए कोयले की ईट एवं चार प्रतिशत डिजल के अंश मिलाया जाकर उसे किसी लोहे या हार्ड प्लास्टिक के कंटेनगर में टाइट भरकर डिटोनेटर के माध्यम से ब्लास्ट किया जाता है।

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