Monday , 21 May 2018
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चपलोत के आमरण अनशन की चेतावनी पर सरकार में हड़कंप

  • वार्ता के लिए आए दो मंत्री, नहीं समझा पाए अधिवक्ताओं को
  • अधिवक्ताओं का प्रतिनिधि मंडल आज मुख्यमंत्री से मिलेगा
  • मर जाऊँगा, मिट जाऊँगा, लेकिन इस आंदोलन को कमजोर नहीं होने दूंगा : चपलोत

उदयपुर। मेवाड़-वागड़ हाईकोर्ट बैंच संघर्ष समिति के तत्वावधान में चल रहे हाईकोर्ट बैंच आंदोलन के 28वें दिन सरकार ने सुध लेते हुए दो मंत्रियों को अधिवक्ताओं से वार्ता के लिए सोमवार को भेजा। 16 मई को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष आमरण अनशन पर बैठेंगे या नहीं इसका निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक के बाद ही होगा। दोनों मंत्रियों को अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट बैंच केवल सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण उदयपुर में नहीं दिया जाना बताया है। बाकी सभी आधार उदयपुर में हाईकोर्ट बैंच स्थापित करने के लिए पर्याप्त है। काफी देर तक चर्चा के बाद भी अधिवक्ताओं को दोनों मंत्री समझा नहीं पाए और ना ही चपलोत का आमरण अनशन रोक पाए। वार्ता के लिए आए वरिष्ठ मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि उदयपुर में हाईकोर्ट बैंच स्थापित हो मुख्यमंत्री की भी यही मंशा है।
हाईकोर्ट बैंच संघर्ष समिति के सम्भागीय संयोजक शान्तिलाल चपलोत के नेतृत्व में 16 अप्रेल से हाईकोर्ट बैंच के लिए क्रमिक अनशन आंदोलन शुरू हुआ था। इस आंदोलन के एक माह की अवधि पूर्ण होने पर स्वयं चपलोत द्वारा आमरण अनशन पर बैठने की पूर्व में घोषणा कर रखी थी। हाईकोर्ट बैंच को लेकर अधिवक्ताओं को मिल रहे जन समर्थन एवं आंदोलन को मिल रही गति को देखते हुए गत शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने भी धरनास्थल पर पहुंच कर आंदोलन का समर्थन किया और सरकार तक उनकी बात पहुंचाने का आश्वासन दिया। कैलाश मेघवाल द्वारा मुख्यमंत्री से उदयपुर में आंदोलन की बात को रखा और साथ ही 16 मई से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत के आमरण अनशन करने की बात भी कही। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पहल पर केबिनेट मंत्री श्रीचंद कृपलानी एवं जिला प्रभारी मंत्री धनसिंह रावत सोमवार को न्यायालय परिसर में पहुंचे और बार सभागार में अधिवक्ताओं से वार्ता की। वार्ता के प्रारम्भ में बार अध्यक्ष रामकृपा शर्मा ने बार के पदाधिकारियों का परिचय कराया। उसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश नंदवाना ने हाईकोर्ट बैंच को लेकर चल रहे आंदोलन की जानकारी देते हुए बताया कि 2017 में प्रधानमंत्री के उदयपुर आगमन के दौरान मुख्यमंत्री से अधिवक्तागण मिले थे, उस दौरान उन्होंने संभागीय आयुक्त को हाईकोर्ट बैंच की रिपोर्ट तैयार कर भेजने के लिए कहा, लेकिन सम्भागीय आयुक्त ने आज तक रिपोर्ट नहीं भेजी। हाल ही में चीफ सेके्रट्री एवं लॉ सेके्रट्री को भी पत्र लिखे, उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर 16 अप्रेल से क्रमिक अनशन शुरू किया और 16 मई को संभागीय संयोजक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत आमरण अनशन पर बैठेंगे।
टीएसपी क्षेत्र में हाईकोर्ट बैंच दिए जाने के पर्याप्त आधार है, केवल सरकार की इच्छाशक्ति की कमी है। शांतिलाल पामेचा एवं प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि 2015 में भी लॉ सेके्रट्री के साथ वार्ता हुई थी, लेकिन आज तक विधिक परीक्षण नहीं किया गया। दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस ओर कोई पहल नहीं की। वरिष्ठ अधिवक्ता रतन सिंह राव ने कहा कि वार्ता बहुत हो चुकी है सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है जो यहां हाईकोर्ट बैंच नहीं दे रही है? केवल इच्छाशक्ति की कमी है। न्याय का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता रोशनलाल जैन ने कहा कि सरकार प्रथम तौर पर सर्किट बैंच की घोषणा तो कर सकती है। अन्य अधिवक्ताओं ने भी अपनी बात रखी। उसके बाद श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि हम भी मेवाड़ और वागड़ में हाईकोर्ट बैंच के पक्षधर है और टीएसपी क्षेत्र होने के कारण यहां पर हाईकोर्ट बैंच होनी चाहिए और हम दोनों ने भी सरकार के समक्ष यहां का पक्ष रखा था। मुख्यमंत्री की भी यही मंशा है कि उदयपुर में भी हाईकोर्ट बैंच की स्थापना हो, लेकिन कुछ राजनैतिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने शांतिलाल चपलोत से आग्रह किया कि आप हमारे वरिष्ठ है और 16 मई से आमरण अनशन पर नहीं बैठें। इस पर चपलोत ने कहा कि जब तक सरकार उचित आश्वासन नहीं देती है तब तक उनका निर्णय अटल है। आज सीएम से मिलेगा प्रतिनिधि मंडल
अधिवक्ताओं से वार्ता के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केबिनेट मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि सकारात्मक माहौल में वार्ता हुई है। टीएसपी क्षेत्र होने के कारण संभाग में उदयपुर में हाईकोर्ट बैंच होनी चाहिए। ऐसी हमारी भी भावना है। मंगलवार को अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए जाएगा और सकारात्मक पहलुओं पर उनसे वार्ता के बाद शांतिपूर्ण तरीके से इसका समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि शांतिलाल चपलोत आमरण अनशन पर नहीं बैठें और वे उनका आग्रह नहीं टालेंगे। सीएम से वार्ता के बाद अच्छे से अच्छा रास्ता निकालेंगे।
सीएम से मोबाइल पर हुई वार्ता
अधिवक्ताओं से वार्ता करने के बाद श्रीचंद कृपलानी ने अलग से जाकर करीब दस-बारह मिनट तक मुख्यमंत्री से मोबाइल पर वार्ता की। वार्ता के दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं द्वारा रखे गए पक्ष की जानकारी दी। इस पर मुख्यमंत्री ने उनके प्रतिनिधि मंडल से मंगलवार को जयपुर या झालावाड़ में मिलने की स्वीकृति दी और समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की सहमति दी। इस फैसले को उन्होंने बैठक में बताया तत्पश्चात बैठक समाप्त हुई। बैठक में नगर विकास प्रन्यास के चेयरमैन रविंद्र श्रीमाली एवं भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट के अलावा बार की कार्यकारिणी एवं बार के वरिष्ठ सदस्य बैठक में उपस्थित रहे।
चार्टर प्लेन से आए उदयपुर
28 दिनों से चल रहे आंदोलन को लेकर सरकार ने जहां सुध नहीं ली वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत के आमरण अनशन के बैठने के दो दिन शेष रहते सरकार हरकत में आई और केबिनेट मंत्री श्रीचंद कृपलानी एवं जिला प्रभारी मंत्री धनसिंह रावत को विशेष चार्टर प्लेन से वार्ता के लिए भेजा। केबिनेट बैठक से प्रस्ताव करें पारित
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने कहा कि मंत्रिमंडल उदयपुर में हाईकोर्ट बैंच का प्रस्ताव पारित करे। इसके नीचे कोई समझौता नहीं होगा। यदि सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो वे 16 मई को हाईकोर्ट बैंच के लिए आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने फिर कहा कि हाईकोर्ट बैंच के लिए मर जाऊँगा, मिट जाऊँगा, लेकिन इस आंदोलन को कमजोर नहीं होने दूंगा। फेसबुक पर बने उदयपुर यूथ ग्रुप ने निकाला मशाल जुलूसथानाधिकारी ने ग्रुप एडमिन को थाने बुलाया तो वकीलों ने किया हंगामाउदयपुर। अधिवक्ताओं के हाईकोर्ट बैंच आंदोलन के दौरान ही फेसबुक पर बने उदयपुर यूथ ग्रुप की ओर से आंदोलन का समर्थन करते हुए मशाल जुलूस निकाला। जिसमें भुपालपूरा थानाधिकारी हरेन्द्रसिंह ने ग्रुप एडमिन से नम्बर मांगकर उसे थाने आने के लिए कहा तो अधिवक्ताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया और जमकर विरोध किया। बाद में थानाधिकारी सौदा ने कहा कि ग्रुप के 8 हजार सदस्य है और ऐसे में गु्रप एडमिन से सामान्य बात की थी और नम्बर तो इसलिए मांगे थे कि सकारात्मक काम में सहयोग लिया जा सके।
जानकारी के अनुसार अधिवक्ताओं के हाईकोर्ट बैंच के आंदोलन के समर्थन में सोशल मीडिया फेसबुक पर बने उदयपुर यूथ ग्रुप ने अपना समर्थन देते हुए शाम को मशाल जुलूस निकाला था। जुलूस में इस ग्रुप से जुड़े काफी सदस्यों ने भाग लिया और अधिवक्ताओं ने भी उत्साह से भाग लिया था। शाम को यह मशाल जुलूस सूरजपोल चौराहे पर पहुंचा तो इस दौरान भुपालपूरा थानाधिकारी हरेन्द्रसिंह सौदा ने फेसबुक पर बने इस ग्रुप के एडमिन नौशाद से बात की। थानाधिकारी सौदा ने नौशाद से ग्रुप के बारे में पूछा तो नौशाद ने बताया कि इस ग्रुप में आठ हजार सदस्य है। इस पर थानाधिकारी ने उससे थाने पर आने के लिए कहा। उसने भी मंगलवार को आने के लिए कहा। इसी दौरान थानाधिकारी सौदा ने नौशाद से उसका फोन नम्बर मांग लिया। इसी दौरान अधिवक्ताओं को यह बात पता चल गई। इस पर बार एसोसिएशन के सदस्य रामकृपा शर्मा, पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र नागदा, रमेश नंदवाना सहित कई अधिवक्ताओं ने थानाधिकारी सौदा का घेराव कर लिया और नम्बर मांगने के बारे में पूछना शुरू कर दिया। थानाधिकारी सौदा ने समझाने का और नम्बर मांगने का उद्देश्य बताने का प्रयास भी किया। इस दौरान डिप्टी भगवतसिंह हिंगड़ भी मौके पर पहुंच गए और अधिवक्ताओं को शांत किया। डिप्टी हिंगड़ ने अधिवक्ताओं से कहा कि थाने पर बुलाने के पीछे कोई गलत उद्देश्य नहीं था। इस पर अधिवक्ता माने और जुलूस आगे बढ़ा। इधर थानाधिकारी सौदा का कहना है कि उसके ग्रुप में 8 हजार सदस्य होना बता रहा है। जिस ग्रुप से इतने सदस्य जुड़े हो उसके नम्बर लेना अपराध नहीं हो सकता है। किसी अच्छे काम में उसका सहयोग लिया जाए।

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