Thursday , 14 December 2017
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धानमण्डी थानाधिकारी को दौसा में किया हवालात में बंद

गिरफ्तारी वारंट से तलब थे, एक दिन पहले न्यायालय पहुंचने पर न्यायालय ने करवाई हवालात की सैर
उदयपुर। शहर के धानमण्डी थानाधिकारी राजेश शर्मा को दौसा में ग्राम न्यायालय ने हवालात की सैर करवा दी। थानाधिकारी पर कोर्ट के आदेश नहीं मानने पर न्यायालय द्वारा लिए प्रसंज्ञान का मामला चल रहा है और इस मामले में 24 को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था, परन्तु गफलत में एक दिन पूर्व पहुंचने तथा उपर से पुलिसकर्मी द्वारा पेश नहीं करने पर न्यायाधीश ने थानाधिकारी को न्यायालय परिसर में ही सीधे बैरक में बंद करने के आदेश दिए। पहले तो पुलिसकर्मी अपने उच्च अधिकारी को बैरक में बंद नहीं कर रहे थे, बाद में न्यायाधीश के आकस्मिक दौरा करने की सूचना पर बैरक में बंद किया गया। हालांकि बाद में जमानत लेकर छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार धानमण्डी थानाधिकारी राजेश शर्मा जब उपनिरीक्षक थे तब करीब चार वर्ष तक दौसा जिले में कोलवा, बांदीकुई, मंडावर, सलेमपुर में थानाधिकारी के रूप में कार्यरत थे। जहां पर इनका कार्यकाल काफी चर्चित रहा था। राजेश शर्मा जब कोलवा थानाधिकारी थे तब वर्ष 2004 में बैरावास निवासी एक व्यक्ति ने एक गाड़ी खरीदी थी और इस गाड़ी को वह अपने नाम पर करवाने के लिए आरटीओ कार्यालय में गया तो वहां पर पता चला कि उक्त नम्बरों से यह गाड़ी नहीं है। इस पर यह व्यक्ति थाने में गया और धोखाधड़ी से गलत नम्बरों की गाड़ी बेचने का मामला दर्ज करने के लिए एक प्रार्थना पत्र दिया था। परन्तु थानाधिकारी राजेश शर्मा ने करीब तीन माह तक मामला दर्ज नहीं किया। बाद में इस व्यक्ति ने न्यायालय में परिवाद पेश किया और न्यायालय ने मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी एक माह से अधिक समय तक थानाधिकारी राजेश शर्मा ने मामला दर्ज नहीं किया था। इसके बाद न्यायालय ने थानाधिकारी के खिलाफ आदेश की अवमानना करने का प्रसंज्ञान लिया था और यह मामला चल रहा था।
दौसा से तबादला होने पर थानाधिकारी राजेश शर्मा उदयपुर आ गए। दौसा में चल रहे इस मामले में बार-बार न्यायालय राजेश शर्मा को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था, परन्तु हर बार थानाधिकारी कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल रहे थे। आखिर में दौसा ग्राम न्यायालय ने स्थानीय पुलिस को राजेश शर्मा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए थे। यह पेशी 24 नवम्बर को नीयत की थी, परन्तु दौसा से आए मैसेज और ई-मेल में गफलत से 23 नवम्बर हो गया था। गुरूवार को थानाधिकारी राजेश शर्मा सूचना के आधार पर दौसा ग्राम न्यायालय में पहुंचे और न्यायाधीश के समक्ष पेश हुए। एक दिन पहले न्यायालय के आदेश की अवमानना करने वाले थानाधिकारी को उपस्थित देखकर तत्काल वहां पर मौजूद पुलिसकर्मियों को राजेश शर्मा को बैरक में बंद करने के आदेश दिए। इस पर न्यायालय परिसर में तैनात रहने वाले पुलिसकर्मी थानाधिकारी को ले जाने लगे तो न्यायाधीश ने फिर से आदेश दिए कि थानाधिकारी को अन्य आरोपियों की तरह हाथ पकड़कर ले जाया जाए।
न्यायाधीश के आदेश पर थानाधिकारी राजेश शर्मा को हाथ पकड़कर ले जाया गया। इस दौरान न्यायाधीश ने पुलिसकर्मियों से आकस्मिक बैरक का निरीक्षण करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों ने राजेश शर्मा को बैरक में बंद नहीं किया। थानाधिकारी राजेश शर्मा बैरक के पास में ही एक दीवार से छिपकर खड़े थे। आधे घंटे तक थानाधिकारी राजेश शर्मा दीवार के पास में ही खड़े रहे। इस बारे में किसी ने न्यायाधीश को सूचित कर दिया तो न्यायाधीश ने आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया। जैसे ही पुलिसकर्मियों को यह पता चला तो उन्होंने तत्काल बैरक खोलकर थानाधिकारी राजेश शर्मा को बैरक में बंद कर दिया। हालांकि न्यायाधीश निरीक्षण करने नहीं आई थी। कुछ देर तक बैरक में बंद रखने के बाद पुन: ग्राम न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जमानत पर छोड़ गया। बताया जा रहा है कि 24 नवम्बर को पुन: थानाधिकारी को न्यायालय में पेश होना है।
विडियों हुआ सोशल मीडिया पर वायरल
इधर सूचना पर न्यायालय परिसर में मीडियाकर्मी भी पहुंंच गए। जहां पर बैरक के पास एक दीवार के पास थानाधिकारी राजेश शर्मा चिपककर खड़ा था। जैसे ही थानाधिकारी को बैरक में डाला गया तो शर्मा को बैरक में डालने और बाहर निकालने का विडियों बना लिया गया, जो कुछ ही देर में वायरल हो गया और दिन भर यह सोशल मीडिया पर चल रहा था।

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