Saturday , 26 May 2018
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चपलोत के स्वास्थ्य में गिरावट पर परिवार हुआ आक्रोशित

अधिवक्ताओं ने कहा स्वास्थ्य ठीक है, आंदोलन जारी रहेगा

उदयपुर। आमरण अनशन पर बैठे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत का दूसरे दिन सांस में गिरावट आने पर परिवारजन परेशान होकर आक्रोशित हो गये। धरना स्थल पर सरकार का पक्ष रखने गए कलेक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक की बात भी नहीं सुनी और उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। अधिवक्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। चपलोत को अस्पताल ले जाने की सोशल मिडिया पर चली खबर से एकाएक धरना स्थल पर अधिवक्ताओं का जमावड़ा लग गया।
गुरुवार को आमरण अनशन के दूसरे दिन शांतिलाल चपलोत का दिन में तीन बार मेडिकल परीक्षण किया गया। सुबह के सत्र में परीक्षण के दौरान उनका बीपी बढ़ा हुआ था और शुगर कम हो रही थी, दोपहर को फिर परीक्षण किया उस समय बीपी तो स्थिर हो गई लेकिन शुगर में गिरावट रही। शाम को छह बजे पुन: चिकित्सकों का प्रतिनिधि मण्डल रूटिन चैकअप के लिए आया तो हालात में गिरावट देखी। इसी दौरान धरना स्थल पर मौजूद चपलोत की पत्नी महेन्द्र चपलोत, पुत्र प्रदीप चपलोत व परिवार के अन्य सदस्य आक्रोशित हो गये और अधिवक्ताओं से उनके स्वास्थ्य को लेकर उलझ गये। अधिवक्ताओं ने कहा कि उनके स्वास्थ्य में कोई खराबी नहीं हुई है। स्वास्थ्य ठीक है इस पर उनका पुत्र कहने लगा कि यदि इन्हें कुछ हो गया तो हम क्या करेंगे, अधिवक्ताओं ने उन्हें काफी समझाया लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे और पिता को अस्पताल ले जाने की बात करने लगा।
बार के पूर्व अध्यक्ष रतनसिंह राव ने मंच संभालते हुए कहा कि चपलोत का स्वास्थ्य ठीक है, इसके बाद चपलोत को माइक दिया, चपलोत ने कहा मैं ठीक हूं, मैं दबने वाला नहीं, अगर तबियत बिगड़ी तो जांच करवा लेंगे, देश के लिए जिदंगी समर्पित है, पीछे नहीं हटूंगा। इस बीच परिवारजन संगठनों की बैठक में पहुंच गये तो बैठक आनन-फानन में बिना निर्णय के समाप्त कर दी गई लेकिन फिर भी माहौल शांत नहीं हुआ। इस पर परिवारजन कलेक्टर के समक्ष पहुंच गये और उन्हें कहा कि चपलोत को अस्पताल में दाखिल करवाया जाए उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है। कलेक्टर ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि मण्डल को बुलाया और वहां भी परिवारजन उनसे उलझ गये और कहने लगे कि प्रशासन व अधिवक्ता यह लिखकर दे कि चपलोत के स्वास्थ्य में कोई भी गिरावट या गड़बड़ी हुई तो उसके लिए हम जिम्मेदार है लेकिन कोई भी पक्ष यह लिखकर देने को तैयार नहीं हुआ।
शाम करीब सवा सात बजे धरना स्थल पर पुलिस का दबाव बढ़ गया। सभी पुलिस के आलाधिकारी धरना स्थल पर पहुंच गये कुछ ही देर बाद जिला कलेक्टर बिष्णुचरण मल्लिक एवं जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल पहुंचे। उन्होंने मंच पर बैठकर अनशन पर बैठे चपलोत से वार्ता की।
सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि सरकार प्रतिनिधि मण्डल से 19 मई को वार्ता करेगी और उसी में ही निर्णय हो जाएगा। इस पर चपलोत ने कहा कि मैं कोई निर्णय करने वाला नहीं हूं, निर्णय तो बार को करना है। इस दौरान चपलोत आक्रोशित हो गये और कहने लगे कि मैं कायर नहीं हूं, एक युवा अधिवक्ता बीच में बोला तो उसे यहां तक कह दिया कि थप्पड़ मार दूंगां। इसके बाद बार अध्यक्ष रामकृपा शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन जनता का आंदोलन है और निर्णय जनता के बीच में ही होगा। चपलोत को यदि जबरन उठाकर हॉस्पीटल ले जाने का प्रयास किया तो इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। इसके बाद शाम को सुंदरकांड का पाठ हुआ।
तीन बार हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार चपलोत व उनके साथ आमरण अनशन पर बैठे रोशनलाल सामोता का तीन बार चिकित्सकीय टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। एमबी चिकित्सालय आपातकालीन प्रभारी डॉ. इंद्रनील बनर्जी, मेडिकल ‘यूरिष्ट डॉ. आशीष गर्ग एवं नर्सिंगकर्मी अभिषेक हाड़ा ने उनका मेडिकल परीक्षण किया। इसमें उनके स्वास्थ्य में गिरावट देखी गई। बीपी बढ़ा हुआ था। इसके बाद एक और चिकित्सकीय टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। शाम को फिर चिकित्सकों की टीक ने स्वास्थ्य का परीक्षण किया। हालात को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर धरना स्थल पर एंबुलैंस, उसमें डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी, टेक्रिशियन को रखा गया है, जो 24 घंटे धरना स्थल पर रहेंगे।
विभिन्न संगठनों की बैठक, असमंजस के चलते समाप्त
इधर शाम को बार सभागार में विभिन्न संगठनों की बैठक हुई। यह बैठक बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। बैठक में असमंजस की स्थिति बनी रही। इधर कुछ अधिवक्ताओं ने पोर्च में हंगामा कर दिया था, जिससे बैठक को समाप्त कर दिया।
चपलोत को चिकित्सालय ले जाने की अफवाह
इधर शाम को अफवाह उड़ी कि आमरण अनशन पर बैठे शांतिलाल चपलोत को जबरन चिकित्सालय ले जाया जा रहा है तो कोर्ट में मॉजूद अधिवक्ता भागकर बाहर आए। यह देखकर पुलिस के भी होंश उड़ गए और हंगामे की दृष्टि पर अतिरिक्त जाब्ता मंगवाया गया। बाद में पता चला कि यह तो मात्र एक अफवाह थी।

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