Tuesday , 20 February 2018
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भारतीय समय के मानक का निर्धारण दो साल में

नई दिल्ली। करीब 100 करोड़ रूपये की लागत से अगले दो साल में भारतीय समय के मानक का निर्धारण कर लिया जायेगा। उपभोक्ता मामले के सचिव अविनाश श्रीवास्तव ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि इस परियोजना के पूरा होने पर जिला स्तर पर समय का मानक उपलब्ध होगा और जगह-जगह समय में होने वाले सेकेंड या उससे भी कम के अंतर की समस्या का समाधान हो सकेगा। यह परियोजना अगले दो साल में पूरी हो जायेगी। श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में अमेरिका की संस्था एनआईएसटी से समय का मानक लिया जाता है। इंटरनेट, मोबाइल सेवा प्रदाता, कम्प्यूटर निर्माता कम्पनियों, बैंकों और शेयर बाजार जैसी संस्थाओं को इसके लिए अमेरिकी कम्पनी को भुगतान करना पड़ता है। इस योजना के तहत 6 क्षेत्रीय केन्द्रों में ऑटोमिक सीजीएम घड़ियां लगायी जायेंगी। दिल्ली, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, बेंगलुरू समेत 6 स्थानों पर ऐसे क्षेत्रीय केन्द्र हैं तथा नागपुर और वाराणसी में ऐसे ही केन्द्रों का निर्माण किया जा रहा है।
देश के अपने मानक समय के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला (एनपीएल) ने पिछले साल अगस्त में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये थे। इसके तहत सभी सरकारी विभागों तथा मंत्रालयों को इंडियन रीजनल नेविगेशनल सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) के जरिये भारत का अपना समय उपलब्ध कराया जाना है जिसका विस्तार बाद में अन्य सेवाओं के लिए भी करने की योजना है। इससे मानक समय के लिए जीपीएस पर देश की निर्भरता समाप्त हो जायेगी। अभी देश के सभी मोबाइल सेवा प्रदाता जीपीएस आधारित समय ही उपलब्ध करा रहे हैं। जीपीएस समय का संचालन अमेरिकी नौसेना की ऑब्जर्वेट्री द्वारा किया जाता है।

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